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Lucknow News: आठ हजार की ओपीडी, एचआरएफ से आठ सौ को मिली दवाएं
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केजीएमयू के एचआरएफ काउंटर पर लगी भीड़
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किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) की सफलता बताने के लिए यहां के आंकड़े ही काफी हैं। केजीएमयू रोजाना औसतन आठ हजार मरीजों को परामर्श दिया जाता है। वहीं ओपीडी के एचआरएफ काउंटर से रोजाना करीब आठ सौ मरीज ही दवाएं ले पाते हैं। यानी 90 फीसदी मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं।
केजीएमयू ने मरीजों को सस्ती दर पर दवाएं उपलब्ध कराने के लिए एचआरएफ की व्यवस्था शुरू की है। इसमें केजीएमयू कंपनियों से सीधे दवाएं खरीदता है। थोक, फुटकर और वितरक का खर्च बचने की वजह से ये दवाएं 70 फीसदी तक कम कीमत पर उपलब्ध हो जाती हैं। एचआरएफ से दवाएं मिलने पर मरीजों को कम कीमत चुकानी पड़ती है। ऐसे में फार्मा कंपनी और उनसे मिले कुछ डॉक्टरों को यह बात नागवार गुजर रही है। डॉक्टर मरीजों को एचआरएफ के बजाय बाहरी दवाएं लिख रहे हैं। इसके एवज में उन्हें हर महीने मोटा कमीशन मिल जाता है।
नहीं सुधर रहे कई सीनियर डॉक्टर
केजीएमयू में बाहर से दवाएं लिखने वाले ज्यादातर डॉक्टर काफी सीनियर है। इसी वजह से केजीएमयू प्रशासन उन पर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। मरीज महंगी दवाओं के बोझ तले दबा जा रहा है और केजीएमयू प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा हुआ है।
एचआरएफ में दवाएं तो एमआर की भीड़ क्यों
केजीएमयू प्रशासन ने ज्यादातर दवाएं एचआरएफ में होने का दावा किया है। अब सवाल यह है कि अगर सभी दवाएं एचआरएफ में मौजूद हैं तो फिर परिसर में दवा कंपनियों के मेडिकल रीप्रेजेंटेटिव क्या करते रहते हैं। अगर सभी दवाएं मौजूद हैं तो फिर परिसर में एमआर का आखिर क्या काम है।
कोट-
ओपीडी के एचआरएफ काउंटर पर काफी भीड़ रहती है। इसलिए केजीएमयू प्रशासन ओपीडी के अंदर भी एचआरएफ का एक काउंटर खोलने जा रहा है। भीड़ कम होने पर एचआरएफ के लाभार्थी बढ़ेंगे।
डॉ. कुमार शांतनु, चेयरमैन केजीएमयू एचआरएफ
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नहीं सुधर रहे कई सीनियर डॉक्टर
केजीएमयू में बाहर से दवाएं लिखने वाले ज्यादातर डॉक्टर काफी सीनियर है। इसी वजह से केजीएमयू प्रशासन उन पर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। मरीज महंगी दवाओं के बोझ तले दबा जा रहा है और केजीएमयू प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा हुआ है।
एचआरएफ में दवाएं तो एमआर की भीड़ क्यों
केजीएमयू प्रशासन ने ज्यादातर दवाएं एचआरएफ में होने का दावा किया है। अब सवाल यह है कि अगर सभी दवाएं एचआरएफ में मौजूद हैं तो फिर परिसर में दवा कंपनियों के मेडिकल रीप्रेजेंटेटिव क्या करते रहते हैं। अगर सभी दवाएं मौजूद हैं तो फिर परिसर में एमआर का आखिर क्या काम है।
कोट-
ओपीडी के एचआरएफ काउंटर पर काफी भीड़ रहती है। इसलिए केजीएमयू प्रशासन ओपीडी के अंदर भी एचआरएफ का एक काउंटर खोलने जा रहा है। भीड़ कम होने पर एचआरएफ के लाभार्थी बढ़ेंगे।
डॉ. कुमार शांतनु, चेयरमैन केजीएमयू एचआरएफ