दूसरा चरणः हेमा मालिनी और राज बब्बर का इम्तिहान, कहीं सीधा तो कहीं त्रिकोणीय मुकाबला
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लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में गुरुवार को यूपी की आठ सीटों पर कहीं सीधा, तो कहीं त्रिकोणीय मुकाबला है। मथुरा लोकसभा सीट पर मशहूर फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी और फतेहपुर सीकरी में अभिनेता से राजनेता बने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर की किस्मत का फैसला इसी चरण में होगा। हाथरस (सुरक्षित) सीट पर पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री व चार बार सांसद रहे सपा के रामजी लाल सुमन की हार-जीत पर भी गुरुवार को मुहर लगेगी। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में इन आठों सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। इस चरण में भाजपा व कांग्रेस सभी आठों सीट पर, जबकि गठबंधन में बसपा 6 और सपा व रालोद एक-एक सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं।
मथुरा: सबसे चर्चित सीट पर सभी की निगाहें
कान्हा की धरती पर भाजपा की मौजूदा सांसद हेमा मालिनी का मुकाबला राष्ट्रीय लोकदल के उम्मीदवार कुंवर नरेंद्र सिंह व कांग्रेस के महेश पाठक से है। ग्रामीण इलाकों में रालोद मुकाबले में दिखता है, तो शहर में भाजपा को बड़ी बढ़त मिलने की उम्मीद है। रालोद का समीकरण जातीय गणित पर टिका है, जबकि भाजपा, राष्ट्रवाद व नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के नाम पर वोट मांग रही है। महेश पाठक ब्राह्मण व पंरपंरागत वोटों के भरोसे हैं। स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा भी उठ रहा है। ब्रज के इस सबसे चर्चित चुनावी मुकाबले पर सभी की नजरें लगी हैं। सभी की कोशिश प्रतिद्वंद्वी दलों के जातिगत वोटरों में सेंधमारी के साथ अपने परंपरागत वोटरों को लामबंद करने की है। मुस्लिम मतदाताओं व जाटों के बाद जिले में सबसे अधिक वोट वाले ब्राह्मण समुदाय को सभी साधने में जुटे हैं।
फतेहपुर सीकरी: क्षत्रिय-ब्राह्मणों से तय होगा नतीजा
फतेहपुर सीकरी सीट में भाजपा के राजकुमार चाहर व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर के बीच चुनावी जंग है। भाजपा ने मौजूदा सांसद चौधरी बाबू लाल का टिकट काटकर चाहर पर भरोसा जताया है। राज बब्बर इस सीट पर वर्ष 2009 में मामूली मतों से हारे थे। बसपा ने आखिरी वक्त पर पूर्व विधायक श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित को उतारा है। टिकट वितरण में असंतोष के चलते बसपा के कई नेता कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। हार-जीत का फैसला काफी हद तक ब्राहमण व क्षत्रिय वोटरों के रुख पर निर्भर करेगा। भाजपा के राजकुमार को स्थानीय और जाट होने की वजह से जाट वोट मिलने की उम्मीद है। वह ब्राह्मण, क्षत्रिय वोटरों से भी आस लगाए हैं। उनकी चुनौती है एससी और कुशवाहा वोटरों को अपनी ओर करना। गुड्डू पंडित का सारा गणित गठबंधन के जातिगत समीकरणों पर है।
अलीगढ़: जाट-मुस्लिमों के बिखराव पर टिका गणित
राजस्थान के राज्यपाल व प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गृह जनपद में भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर है। मुस्लिम बहुतायत वाली अलीगढ़ लोकसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला है। मुस्लिम और जाटों के बिखराव पर यहां हार-जीत का फैसला टिका है। प्रयास है कि किसी तरह एक-दूसरे के वोटों में सेंधमारी कर अपनी जीत का रास्ता साफ किया जाए। भाजपा प्रत्याशी मौजूदा सांसद सतीश गौतम फिर से मोदी लहर और वोटों के ध्रुवीकरण की उम्मीद लगाए बैठे हैं। वहीं, गठबंधन प्रत्याशी अजित बालियान मुस्लिम, दलित और जाट वोटों की एकजुटता के सहारे वैतरणी पार करने की उम्मीद में हैं। कांग्रेस प्रत्याशी चौ.बिजेंद्र सिंह भी मुस्लिम और जाट वोटों के सहारे हैं। पिछली बार मुस्लिम वोट सपा व बसपा के बीच बंटा था। इस बार राजनीतिक जानकार यही मान रहे हैं कि अगर मुस्लिम और जाटों में बिखराव नहीं हुआ तो भाजपा को मुश्किल होगी।
जातीय गणितः 3.5 लाख मुस्लिम, 7 लाख ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, 4 लाख जाट, यादव, लोधी, 3.5 लाख एससी-एसटी।
अमरोहा: दलित-मुस्लिम के गणित से बनेगा जीत का समीकरण
इस चुनाव में अमरोहा सीट पर बदलाव होते-होते मुकाबला दिलचस्प होता गया। भाजपा ने मौजूदा सांसद कंवर सिंह तंवर को ही उतारा है। कांग्रेस ने पहले पूर्व सांसद राशिद अल्वी को उतारा था, लेकिन अल्वी ने अगले ही दिन नाम वापस लेकर सियासी हल्के में हलचल मचा दी। तब कांग्रेस ने नए चेहरे सचिन चौधरी को उतारा। गठबंधन से ये सीट बसपा के खाते में थी। देवगौड़ा के करीबी माने जाने वाले कुंवर दानिश अली को बसपा ने टिकट दिया। मुकाबला भाजपा व बसपा के बीच माना जा रहा था, लेकिन सचिन चौधरी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। जीत का गणित मुस्लिम व दलितों के आधार पर ही तय होगा। क्षेत्र में पांच विधानसभाओं में जहां तीन विधानसभा क्षेत्र मुस्लिम बहुल हैं, वहीं दो हिंदू बहुल हैं।
हाथरस: राष्ट्रवाद और जातीय समीकरणों पर टिकी हार-जीत
हाथरस (सुरक्षित) सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला है। भाजपा प्रत्याशी राजवीर दिलेर के पिता किशन लाल दिलेर यहां से चार बार सांसद रहे हैं। गठबंधन प्रत्याशी रामजीलाल सुमन केंद्रीय मंत्री और 4 बार सांसद रह चुके हैं। जबकि कांग्रेस उम्मीदवार त्रिलोकी राम दिवाकर हाल ही में रालोद छोड़कर पहुंचे हैं। भाजपा को मोदी मैजिक और राष्ट्रवाद का सहारा है, वहीं गठबंधन को उम्मीद है कि तीनों दलों का परंपरागत वोट जीत दिला देगा। कांग्रेस को न्याय और पार्टी के परंपरागत वोट का भरोसा है। भाजपा को अपना अभेद्य दुर्ग बचाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। पार्टी ने मौजूदा सांसद राजेश कुमार दिवाकर का टिकट काट दिया है। दिवाकर वर्ष 2014 में 3.26 लाख मतों से जीते थे। सुमन को जहां जातीय गणित का भरोसा है, वहीं दिलेर पीएम मोदी के नाम पर चुनाव मैदान में हैं।
आगरा: कम-ज्यादा वोटिंग से तय होगा हार-जीत का गणित
आगरा (सुरक्षित) सीट पर प्रदेश के मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल का मुकाबला बसपा के मनोज सोनी से है। दोनों के समीकरण मजबूत हैं। हार-जीत का फैसला काफी हद तक इस पर टिका है कि किसके कितने वोटर वोट डालने के लिए जाते हैं। बघेल को भाजपा के परपंरागत वोटर वैश्य, ब्राहमण, जाट, क्षत्रिय के साथ एससी वोटरों में से भी बड़ा हिस्सा मिलने की उम्मीद है। बघेल आगरा से सटी हुई जलेसर सीट से तीन बार सांसद रह चुके हैं और वर्तमान में फिरोजाबाद की टुंडला सीट से विधायक हैं। गठबंधन के मनोज सोनी उम्मीद लगाए हैं कि बसपा के परपंरागत वोटरों के साथ जाट, यादव और मुस्लिम उनका साथ देंगे। 2014 में भी मुस्लिमों ने भाजपा के खिलाफ सपा व बसपा को वोट किया था। वह पिछला चुनाव हाथरस सुरक्षित सीट से लड़े थे, लेकिन जीत नहीं पाए थे। कांग्रेस ने वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी रहीं प्रीता हरित चुनाव को मैदान में उतारा है। उन्हें कांग्रेस के परंपरागत वोटरों के साथ मुस्लिम और एससी वोटरों से आस है।
बुलंदशहर: जातीय समीकरण पर टिका जीत का गणित
बुलंदशहर लोकसभा सीट पर पिछले कुछ वर्षों से भाजपा का दबदबा रहा है। राजस्थान के राज्यपाल और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का इस सीट पर प्रभाव माना जाता है। वर्ष 2009 में इस सीट से सपा के उम्मीदवार कमलेश बाल्मीकी विजयी हुए थे। इस सीट से 2014 में भाजपा के डॉ. भोला सिंह जीते थे और वह वर्तमान में भी भाजपा के प्रत्याशी हैं। भोला सिंह इस बार भी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। दूसरी ओर गठबंधन के प्रत्याशी योगेश वर्मा एससी/एसटी, मुस्लिम और जाट वोटरों के सहारे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी बंशी पहाड़िया की नजर काडर वोट और मुस्लिम वोटरों पर है।
नगीना: भाजपा-बसपा में सीधा मुकाबला
नगीना सीट पर भाजपा के डॉ. यशवंत सिंह का मुकाबला बसपा प्रत्याशी गिरीश चंद्र से है। कांग्रेस ने पूर्व सांसद ओमवती को उम्मीदवार बनाया है। वह परंपरागत वोटरों केे साथ ही दलित व मुस्लिमों में सेंधमारी से मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में जुटी हैं। डॉ. यशवंत वर्ष 2014 में सपा के यशवीर सिंह धोबी से 92 हजार से ज्यादा मतों से जीते थे। यशवीर अब भाजपा में आ चुके हैं। तब बसपा से गिरीश चंद्र को 2.45 लाख वोट मिले थे। अब वह गठबंधन के उम्मीदवार हैं। मुस्लिम व दलित वोटों की अधिक संख्या को देखते हुए गठबंधन की नजर उन पर है।