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Lucknow News: एफसीआई के सेवानिवृत्त अधिकारी व पत्नी को रखा 19 दिन डिजिटल अरेस्ट, वसूले 42 लाख
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लखनऊ। कैसरबाग के लालबाग निवासी भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से सेवानिवृत्त अधिकारी अंसार जमाल अब्बासी व उनकी पत्नी साइबर जालसाजों के जाल में फंस गए। साइबर जालसाजों ने 19 दिन तक दंपती को डिजिटल अरेस्ट रखा और फिर 42 लाख वसूल लिए। ठगों ने दंपती को जेट एयरवेज के मालिक मनीष गोयल के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दोषी बताया था। पीड़ित की तहरीर पर 14 अगस्त को साइबर अपराध थाने में आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
अंसार जमाल ने दर्ज प्राथमिकी में बताया कि 23 जुलाई को दोपहर करीब 1:32 बजे उन्हें व्हाट्सएप पर एक ऑडियो कॉल आई। फोन करने वाले ने कहा कि पुलवामा हमले के मामले में पकड़े गए आतंकवादियों ने पूछताछ में मनीष गोयल का नाम लिया था। ठग ने बताया कि उसके पास से मिले दस्तावेजों की जांच में पता चला कि तुम्हारे नाम से सिम कार्ड खरीदा गया है। तुम्हारे नाम पर कर्नाटक स्थित आईसीआईसीआई बैंक में खाता भी है। ठग ने कहा कि इसलिए तुम दोषी हो मगर वरिष्ठ नागरिक होने के नाते तुम्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। तुम्हें और तुम्हारी पत्नी को डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है। इसके बाद ठग ने अंसार से पूछताछ शुरू कर दी जो रात दस बजे तक चली। उसने सभी बैंक खातों, एफडी और पत्नी के गहनों की जानकारी ले ली।
एनआईए के फर्जी दस्तावेज भी भेजे
ठग ने बीच में उन्हें एनआईए के फर्जी दस्तावेज भी व्हाट्सएप पर भेज दिए और कॉल काट दी। अंसार ने बताया कि अगले दिन सुबह करीब दस बजे उनके पास व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल आई। इस बार दूसरे ठग ने बात की जिसने खुद को एटीएस पुणे का अधिकारी बताया। उसने कहा कि आपका केस ट्रांसफर हो गया है। अब मामले की जांच सीबीआई ऑफिसर करेंगे और हाईकोर्ट के जज से तुमसे बात करेंगे।
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मोबाइल पर जैमर लगाने की कही बात
ठग ने दंपती से कहा कि तुमसे फिर पूछताछ की जाएगी। इसके बाद तुम जमानत के लिए याचिका दायर करोगे। डरे सहमे दंपती राजी हो गए। जालसाजों ने कहा तुम्हारे मोबाइल पर जैमर लगा दिया गया है। तुम किसी से कोई बात नहीं कर सकोगे। कुछ देर बाद जालसाजों ने पूछताछ का जाल फेंका जो दस अगस्त को खत्म हुआ। इस बीच आरोपियों ने जांच के बहाने उनसे कई बार में 42 लाख रुपये वसूल लिए। ठगों ने 10 अगस्त की रात करीब 10 बजे कॉल काट दी। एक पल में सब खो जाने के कारण दंपती सदमे में आ गए। उन्होंने किसी तरह से हिम्मत जुटाई और पुलिस से शिकायत की। इंस्पेक्टर आलोक रॉव ने बताया कि मामले की तफ्तीश की जा रही है। पीड़ित की रकम फ्रीज कराने के लिए संबंधित बैंकों से संपर्क किया जा रहा है।
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डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का नया तरीका है। इसमें जालसाज पुलिस, सीबीआई, एनआईए या ईडी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल करते हैं। झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देते हैं और डर दिखाकर घर बैठे ऑनलाइन नजरबंद जैसा महसूस कराकर पैसे ऐंठते हैं। कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। अगर आपके पास अनजान नंबर से काॅल आए तो सावधान हो जाएं। खासकर अनजान नंबर से आने वाली वीडियो कॉल से होशियार रहें। अगर कोई फोनकर्ता खुद को पुलिस अधिकारी बताकर अपना को डराता-धमकाता है तो डरें नहीं। तत्काल पुलिस से शिकायत करें। साइबर क्राइम थाने, साइबर सेल, लोकल पुलिस स्टेशन, टोल फ्री नंबर 1930 या www.cybercrime.gov.in वेबसाइट के जरिये शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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अंसार जमाल ने दर्ज प्राथमिकी में बताया कि 23 जुलाई को दोपहर करीब 1:32 बजे उन्हें व्हाट्सएप पर एक ऑडियो कॉल आई। फोन करने वाले ने कहा कि पुलवामा हमले के मामले में पकड़े गए आतंकवादियों ने पूछताछ में मनीष गोयल का नाम लिया था। ठग ने बताया कि उसके पास से मिले दस्तावेजों की जांच में पता चला कि तुम्हारे नाम से सिम कार्ड खरीदा गया है। तुम्हारे नाम पर कर्नाटक स्थित आईसीआईसीआई बैंक में खाता भी है। ठग ने कहा कि इसलिए तुम दोषी हो मगर वरिष्ठ नागरिक होने के नाते तुम्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। तुम्हें और तुम्हारी पत्नी को डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है। इसके बाद ठग ने अंसार से पूछताछ शुरू कर दी जो रात दस बजे तक चली। उसने सभी बैंक खातों, एफडी और पत्नी के गहनों की जानकारी ले ली।
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एनआईए के फर्जी दस्तावेज भी भेजे
ठग ने बीच में उन्हें एनआईए के फर्जी दस्तावेज भी व्हाट्सएप पर भेज दिए और कॉल काट दी। अंसार ने बताया कि अगले दिन सुबह करीब दस बजे उनके पास व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल आई। इस बार दूसरे ठग ने बात की जिसने खुद को एटीएस पुणे का अधिकारी बताया। उसने कहा कि आपका केस ट्रांसफर हो गया है। अब मामले की जांच सीबीआई ऑफिसर करेंगे और हाईकोर्ट के जज से तुमसे बात करेंगे।
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मोबाइल पर जैमर लगाने की कही बात
ठग ने दंपती से कहा कि तुमसे फिर पूछताछ की जाएगी। इसके बाद तुम जमानत के लिए याचिका दायर करोगे। डरे सहमे दंपती राजी हो गए। जालसाजों ने कहा तुम्हारे मोबाइल पर जैमर लगा दिया गया है। तुम किसी से कोई बात नहीं कर सकोगे। कुछ देर बाद जालसाजों ने पूछताछ का जाल फेंका जो दस अगस्त को खत्म हुआ। इस बीच आरोपियों ने जांच के बहाने उनसे कई बार में 42 लाख रुपये वसूल लिए। ठगों ने 10 अगस्त की रात करीब 10 बजे कॉल काट दी। एक पल में सब खो जाने के कारण दंपती सदमे में आ गए। उन्होंने किसी तरह से हिम्मत जुटाई और पुलिस से शिकायत की। इंस्पेक्टर आलोक रॉव ने बताया कि मामले की तफ्तीश की जा रही है। पीड़ित की रकम फ्रीज कराने के लिए संबंधित बैंकों से संपर्क किया जा रहा है।
डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का नया तरीका है। इसमें जालसाज पुलिस, सीबीआई, एनआईए या ईडी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल करते हैं। झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देते हैं और डर दिखाकर घर बैठे ऑनलाइन नजरबंद जैसा महसूस कराकर पैसे ऐंठते हैं। कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। अगर आपके पास अनजान नंबर से काॅल आए तो सावधान हो जाएं। खासकर अनजान नंबर से आने वाली वीडियो कॉल से होशियार रहें। अगर कोई फोनकर्ता खुद को पुलिस अधिकारी बताकर अपना को डराता-धमकाता है तो डरें नहीं। तत्काल पुलिस से शिकायत करें। साइबर क्राइम थाने, साइबर सेल, लोकल पुलिस स्टेशन, टोल फ्री नंबर 1930 या www.cybercrime.gov.in वेबसाइट के जरिये शिकायत दर्ज करा सकते हैं।