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लखनऊ: मेट्रो के दूसरे चरण के आड़े आ रहे 450 पेड़, सात छोटे जलाशय, शिफ्टिंग पर हो रहा मंथन
Fri, 11 Sep 2026 09:32 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Fri, 11 Sep 2026 09:32 AM IST
सार
मेट्रो से जुड़े सूत्र बताते हैं कि चारबाग से बसंतकुंज रूट के बीच पेड़, छोटे जलाशय होने से अंडरग्राउंड खोदाई और निर्माण में परेशानियां आ सकती हैं। ऐसे में मंथन किया जा रहा है कि अधिक से अधिक पेड़ों की शिफ्टिंग कराई जा सके।
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लखनऊ मेट्राे (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चारबाग से बसंतकुंज के मेट्रो के दूसरे चरण के रूट के आड़े 450 पेड़ और सात छोटे जलाशय आ रहे हैं। मेट्रो प्रशासन पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से पेड़ों को काटने के बजाय इनकी शिफ्टिंग पर मंथन कर रहा है। जलाशयों को पाटने पर विचार हो रहा है।
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चारबाग से बसंतकुंज के बीच मेट्रो रूट के निर्माण के लिए इन दिनों मूसा मूसाबाग में मिट्टी की जांच चल रही है। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 5801 करोड़ रुपये है। इनमें से 2900 करोड़ रुपये राज्य और केंद्र सरकार ने दिए हैं। बाकी रकम ऋण पर ली जाएगी। मेट्रो प्रशासन ने स्टेशनों व डिपो निर्माण से जुड़े कई टेंडर कर दिए हैं। बसंतकुंज डिपो बनाने में 150 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
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मेट्रो से जुड़े सूत्र बताते हैं कि चारबाग से बसंतकुंज रूट के बीच पेड़, छोटे जलाशय होने से अंडरग्राउंड खोदाई और निर्माण में परेशानियां आ सकती हैं। ऐसे में मंथन किया जा रहा है कि अधिक से अधिक पेड़ों की शिफ्टिंग कराई जा सके। इसके अलावा जहां जरूरत नहीं होगी, वहां जलाशय नहीं पाटे जाएंगे। हालांकि, मुद्दे पर मेट्रो अधिकारी अभी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
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दिसंबर से शुरू होगा निर्माण कार्य
चारबाग-बसंतकुंज मेट्रो रूट पर अभी मिट्टी का परीक्षण चल रहा है। यह काम कई चरणों में होता है। हर मेट्रो स्टेशन और भूमिगत ढांचे के लिए मिट्टी की जांच की जा रही है। यह काम दो महीने और चलेगा। इसके बाद दिसंबर से मेट्रो स्टेशनों के निर्माण का काम शुरू होने की उम्मीद है।
मेट्रो का दूसरा चरण...
- 12 किमी होगी इस चरण के ट्रैक की लंबाई।
- 07 भूमिगत स्टेशन चारबाग, गौतमबुद्ध मार्ग, अमीनाबाद, पांडेयगंज, सिटी रेलवे स्टेशन, मेडिकल कॉलेज चौराहा और चौक बनेंगे।
- 05 एलिवेटेड स्टेशन ठाकुरगंज, बालागंज, सरफराजगंज, मूसाबाग और बसंतकुंज बनेंगे।
- 05 वर्ष में दूसरे चरण का काम पूरा करने का है लक्ष्य।