यूपी: लखनऊ नगर निगम में हर साल बिना ई-टेंडर हो रहे 500 करोड़ के काम, ठेकेदार फिक्स करने की चर्चा
लखनऊ नगर निगम में हर साल बिना ई-टेंडर 500 करोड़ के काम हो रहे हैं। इसको लेकर ठेकेदार फिक्स करने की चर्चा तो हो ही रही है, साथ ही 40 करोड़ की बचत को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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विस्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कानपुर नगर निगम में टेंडर प्रक्रिया की अनियमितताओं पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद वहां सख्ती हुई, लेकिन राजधानी लखनऊ में नगर निगम में मनमानी जारी है। यहां हर साल करीब 500 करोड़ रुपये के काम बिना ई टेंडर के कराए जा रहे हैं। इससे टेंडर पूलिंग को बढ़ावा मिल रहा है। प्रतिस्पर्धा न होने से नगर निगम को नुकसान हो रहा है।
पारदर्शी व्यवस्था के लिए शासन का आदेश है कि सभी कार्यों के ई टेंडर हों। इसके बावजूद निगम में पार्षद कोटा और नगर निगम निधि के कार्य बिना ई टेंडर के हो रहे हैं। कानूनी अड़ंगे से बचने के लिए सदन ने 10 लाख रुपये से कम लागत के कार्यों के लिए मैनुअल टेंडर का प्रस्ताव पास किया है। 10 लाख रुपये से अधिक लागत वाले कार्यों को कई हिस्सों में बांटकर फाइलें बनाई जाती हैं। फिर इनके अलग-अलग मैनुअल टेंडर कराए जाते हैं।
इस तरीके से टेंडर पूलिंग आसानी से हो रही है। 15वां वित्त और अवस्थापना बजट के कार्यों के लिए ठेकेदार 15 से 40 फीसदी तक कम दर पर टेंडर डालते हैं। वहीं, पार्षद कोटा के मैनुअल टेंडर एस्टीमेट दर पर या बहुत कम छूट पर आते हैं। वार्ड विकास निधि से इस साल 300 करोड़ रुपये के काम हो रहे हैं। यदि इनके ई-टेंडर हों तो निगम को हर साल करीब 40 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।
...इसलिए हो रहे मैनुअल टेंडर
सूत्रों के अनुसार मैनुअल टेंडर से पूलिंग आसान हो जाती है। हर वार्ड का एक निश्चित ठेकेदार है जिसे लंबे समय से काम मिल रहा है। ये ठेकेदार जनसेवकों के खास होते हैं। यदि कोई अन्य ठेकेदार टेंडर डालता है तो उसे किसी न किसी वजह से निरस्त कर दिया जाता है। इससे प्रतिस्पर्धा समाप्त हो जाती है और मनमानी बढ़ती है।
सफाई में भी चल रही मनमानी
नगर निगम के 50 से अधिक वार्डों में सफाई का काम कार्यदायी संस्थाओं के जरिये हो रहा है। इन कार्यों के लिए भी ई टेंडर नहीं कराए जा रहे हैं। ये कार्यदायी संस्थाएं केवल प्रस्ताव पर ही काम कर रही हैं। ऐसे में सालाना करीब 200 करोड़ रुपये का सफाई कार्य बिना टेंडर के ही कराया जा रहा है।
जिम्मेदारों ने साथ ली चुप्पी
महापौर सुषमा खर्कवाल से जब पूछा गया कि ई टेंडर पूरी तरह से क्यों लागू नहीं है और क्या आगे इसे लागू करेंगी तो उन्होंने कहा कि इस बारे में नगर आयुक्त से बात करें, वही बताएंगे। हालांकि नगर आयुक्त से बात नहीं हो सकी।