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Lucknow: शिव मंदिर की दीवार ढही, चार माह का मासूम दबा, बाहर निकालने में दो लोग हुए चोटिल; अस्पताल में तोड़ा दम

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Thu, 09 Apr 2026 06:55 PM IST
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सार

अलीगंज इलाके में शिव मंदिर की पुरानी बाउंड्री वॉल गिरने से चार माह के मासूम रूपलाल की मौत हो गई। दीवार पानी से कमजोर हो गई थी। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बच्चे को निकालते समय दो लोग भी घायल हुए।

Lucknow Shiv Temple Wall Collapses Month-Old Infant Trapped Injured During Rescue Attempt Child Dies
मासूम की अस्पताल में मौत हो गई। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

अलीगंज के डंडइया इलाके में बने शिव मंदिर की जर्जर बाउंड्री वॉल बृहस्पतिवार सुबह अचानक भरभरा कर ढह गई। दीवार से सटी एक मजदूर की झोपड़ी उसकी चपेट में आ गई। झोपड़ी में सो रहे चार माह के मासूम बच्चे रूपलाल की मलबे में दबकर मौत हो गई।

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रूपलाल के पिता सीतापुर मिश्रिख सड़क स्थित परागपुर गांव निवासी गजोधर ने बताया कि वह पुराने हनुमान मंदिर के सामने बने शिव मंदिर की बाउंड्री वॉल के ठीक पीछे झोपड़ी बनाकर परिवार के साथ रहते हैं। उनके परिवार में पत्नी संध्या, तीन बेटियां नंदिनी, अंजलि और अनाया है। गजोधर ऑटो चलाकर और संध्या घरों में काम कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। बृहस्पतिवार सुबह गजोधर काम पर गया था। 
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परिजनों के मुताबिक, संध्या बेटे रूपलाल और छोटी बेटी अनाया के साथ झोपड़ी में थी। नंदिनी व अंजलि दूसरे झोपड़ी में टीवी देख रही थी। संध्या ने बेटे रूपलाल को दूध पिलाकर तख्त पर सुला दिया। इसी बीच अनाया भी झोपड़ी से भागकर बाहर आ गई। संध्या उसे पकड़ने के लिए जैसे ही बाहर भागी। इसी दौरान अचानक हनुमान मंदिर की जर्जर बाउंड्री वॉल भरभराकर गिर गई, जिसकी चपेट में आकर मासूम रूपलाल दब गया।

बच्चे को निकालने में दो लोग हुए चोटिल

दीवार गिरते ही वहां अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। संध्या बेटे को बचाने के लिए लोगों से मदद मांगने लगी। आसपास के लोग दौड़कर मलबे में दबे बच्चे को निकालने में जुट गए। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद मासूम को गंभीर हालत में मलबे से बाहर निकाला गया। 


उसे पुलिस की मदद से सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया। ट्रामा सेंटर पहुंचने पर चिकित्सकों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। मासूम को निकालने के दौरान नंदा और सौरभ के पैर भी चोटिल हो गया।


 

पानी की वजह से कमजोर हो गई थी दीवार

करीब 55 फीट लंबी और नौ इंच थी दीवार स्थानीय लोगों के मुताबिक करीब 15 वर्ष पहले मंदिर की दीवार को बनाया गया। बाउंड्री वॉल करीब 55 फीट लंबी और नौ इंच ऊंची है। आरोप है कि मंदिर से निकलने वाला पानी इसी दीवार में जा रहा था, जिसके कारण दीवार कमजोर हो गई और हादसा हो गया।

काफी मन्नतों के बाद हुआ था रूपलाल

गजोधर की तीन बेटियां है। मासूम के बाबा मेवालाल ने बताया कि गजोधर व संध्या ने बेटे के लिए खूब मन्नत मांगी थी। ऑपरेशन से बेटे का जन्म हुआ। जन्म के समय उसे ऑक्सीजन की समस्या हो गई जिसके कारण वह कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहा। जच्चा बच्चा के स्वास्थ्य के लिए गजोधर ने गांव की जमीन बेचकर उनका इलाज कराया। इकलौते बेटे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मां-बाप समेत पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

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