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लखनऊ: एक बार फिर से चर्चाओं में आया कसमंडी विवादित ढांचा, सावन पर जल चढ़ाने की कोशिश; पुलिस तैनात

Mon, 03 Aug 2026 01:57 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Mon, 03 Aug 2026 01:57 PM IST
सार

Lucknow Kasmandi controversy: लखनऊ के मलिहाबाद इलाके में बनी कसमंडी का विवाद एक बार फिर से गर्मा गया। लाखन आर्मी के कार्यकर्ताओं ने विवादित क्षेत्र में चल चढ़ाने की कोशिश की। 

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Lucknow: The disputed Kasamandi structure is back in the news, with attempts to offer water during the month o
लखनऊ में कसमंडी विवाद। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सावन के पहले सोमवार को मलिहाबाद क्षेत्र के कसमंडी कलां गांव में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब लाखन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ विवादित ढांचे की ओर बढ़े। वे 108 गांवों से एकत्रित की गई पवित्र मिट्टी और जल से जलाभिषेक करने के लिए दोपहर लगभग 12 बजे वहां पहुंचे थे।

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बैरिकेटिंग पर रोके जाने पर धरने पर बैठे समर्थक
सुरक्षा व्यवस्था के तहत मौके पर तैनात भारी पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को विवादित ढांचे से लगभग 200 मीटर पहले ही बैरिकेटिंग लगाकर रोक दिया। प्रवेश की अनुमति न मिलने से नाराज राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी अपने समर्थकों के साथ वहीं जमीन पर बैठकर विरोध जताने लगे।
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मौके पर मौजूद एसीपी मलिहाबाद ज्ञानेंद्र सिंह ने काफी देर तक वार्ता कर उन्हें समझाने का प्रयास किया और विवादित ढांचे की ओर जाने से स्पष्ट रूप से मना कर दिया। इसके बाद सूरज पासी ने बैरिकेटिंग के सामने ही सांकेतिक जलाभिषेक किया और लगभग आधे घंटे बाद समर्थकों के साथ वापस लौट गए।
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21 मई को गरमाया था विवादित ढांचों का मुद्दा।
लाखन आर्मी ने 21 मई को डीएम को ज्ञापन देकर विवादित ढांचों का मुद्दा उठाया था। साथ ही विवादित ढांचों में पहुंचकर कर दांतों की दीवार व खाम पर प्राचीन हिंदू स्थापित कलाकृतियां अंकित होने का दावा किया था साथ ही कार्बन डेटिंग की भी मांग की थी। जिसके बाद विवादित ढांचों में हो रही नमाज पर रोक लगा दी गई थी उसके कुछ दिनों के बाद योगेश पासी ने विवादित ढांचों में हनुमान चालीसा पढ़ने की कोशिश की थी। साथ ही 27 मई को ढांचों के निकट सूरज पासी ने ढांचों के निकट धरना दिया था।

 प्राचीन किले और मस्जिद-कब्रिस्तान को लेकर विवाद

Lucknow: The disputed Kasamandi structure is back in the news, with attempts to offer water during the month o
कसमंडी कलां का विवादित ढांचा।

लखनऊ के मलिहाबाद स्थित कसमंडी कलां में महाराजा कंस पासी के प्राचीन किले और मस्जिद-कब्रिस्तान को लेकर विवाद चल रहा है। पासी समाज का दावा है कि यह स्थल उनके पूर्वजों का ऐतिहासिक किला और शिव मंदिर था, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि यह सरकारी रिकॉर्ड में मस्जिद और मकबरा है। तनाव को देखते हुए प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया है।

सूरज पासी ने पहले भी उठाया है मुद्दा

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कसमंडी कलां में विवादित ढांचा में बैरीकेट।

21 मई को सूरज पासी ने यह मुद्दा उठाया था कि कसमंडी में बना मकबरा और मस्जिद सन 980 से 1031 के दौरान राजपासी राजा कंस शिव मंदिर और किला था, जिसमें आज भी उसमें कई प्रकार की हिंदुओं की परम्परागत आकृतियां दीवारों पर बनी हैं।

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