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दो साल में दूसरी गर्भावस्था पर मातृत्व अवकाश पर रोक नहीं : हाईकोर्ट
Fri, 14 Aug 2026 02:32 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Fri, 14 Aug 2026 02:32 AM IST
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लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने महिला कर्मचारियों के मातृत्व अधिकारों पर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि पहले मातृत्व अवकाश के दो साल के भीतर दूसरी गर्भावस्था के लिए अवकाश लेने पर कोई वैधानिक रोक नहीं है। कोर्ट ने लखनऊ के कल्याण सिंह कैंसर संस्थान की महिला कर्मचारी सीमा को 180 दिन का मातृत्व अवकाश देने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने सीमा की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों के लिए मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के प्रावधान अपना चुकी है। ऐसे में वित्तीय पुस्तिका में मौजूद विपरीत कार्यकारी प्रावधानों के आधार पर मातृत्व लाभ से इन्कार नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ता ने 17 जून से 13 दिसंबर 2026 तक 180 दिन के मातृत्व अवकाश का आवेदन किया था। विभाग ने वित्तीय पुस्तिका के नियम 153(1) का हवाला देते हुए आवेदन खारिज कर दिया था। विभाग का तर्क था कि पहले मातृत्व अवकाश के दो साल के भीतर दूसरा मातृत्व अवकाश अनुमन्य नहीं है।
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इस आदेश को चुनौती देते हुए सीमा ने हाईकोर्ट का रुख किया। उनके अधिवक्ता प्रशांत देव सिंह ने अनुपम यादव समेत अन्य मामलों में दिए गए पूर्व फैसलों का हवाला दिया। उन्होंने तर्क दिया कि संसद के बनाए वैधानिक कानून को वित्तीय पुस्तिका का कार्यकारी प्रावधान निष्प्रभावी नहीं कर सकता।
कोर्ट ने महिला का अवकाश आवेदन खारिज करने वाला आदेश रद्द कर दिया। साथ ही 17 जून से 13 दिसंबर 2026 तक 180 दिन का मातृत्व अवकाश और उससे जुड़े सभी सेवा लाभ देने के निर्देश दिए।
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न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने सीमा की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों के लिए मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के प्रावधान अपना चुकी है। ऐसे में वित्तीय पुस्तिका में मौजूद विपरीत कार्यकारी प्रावधानों के आधार पर मातृत्व लाभ से इन्कार नहीं किया जा सकता।
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याचिकाकर्ता ने 17 जून से 13 दिसंबर 2026 तक 180 दिन के मातृत्व अवकाश का आवेदन किया था। विभाग ने वित्तीय पुस्तिका के नियम 153(1) का हवाला देते हुए आवेदन खारिज कर दिया था। विभाग का तर्क था कि पहले मातृत्व अवकाश के दो साल के भीतर दूसरा मातृत्व अवकाश अनुमन्य नहीं है।
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इस आदेश को चुनौती देते हुए सीमा ने हाईकोर्ट का रुख किया। उनके अधिवक्ता प्रशांत देव सिंह ने अनुपम यादव समेत अन्य मामलों में दिए गए पूर्व फैसलों का हवाला दिया। उन्होंने तर्क दिया कि संसद के बनाए वैधानिक कानून को वित्तीय पुस्तिका का कार्यकारी प्रावधान निष्प्रभावी नहीं कर सकता।
कोर्ट ने महिला का अवकाश आवेदन खारिज करने वाला आदेश रद्द कर दिया। साथ ही 17 जून से 13 दिसंबर 2026 तक 180 दिन का मातृत्व अवकाश और उससे जुड़े सभी सेवा लाभ देने के निर्देश दिए।