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जो पति को पतन से बचा ले, वही पत्नी कहलाने योग्य : रामभद्राचार्य
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बृज की रसोई परिसर में कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत ः आयोजक
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संवाद न्यूज एजेंसी
लखनऊ। भारतीय संस्कृति में वाइफ और बीवी नहीं होती, यहां धर्मपत्नी होती है। जो पति को पतन से बचा ले, वही पत्नी कहलाने योग्य है। यह बात सोमवार को जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई परिसर में चल रही कथा के आठवें दिन कही।
उन्होंने कहा कि नारी सम्मान सनातन का मूल मंत्र है। महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए लाए गए नारी शक्ति वंदन प्रस्ताव का भी विरोध हुआ था, जबकि भारतीय संस्कृति के अनुसार महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण भी दिया जाए तो कम है। परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका सर्वोपरि है।
कथा के दौरान रामभद्राचार्य ने भगवान श्रीराम के वनवास काल में आदिवासियों, गिरिवासियों एवं शबरी से मिलन के प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने ऋषि शरभंग प्रसंग का उल्लेख करते हुए नवधा भक्ति के छठे स्वरूप वंदन भक्ति की विस्तृत व्याख्या की।
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इस दौरान उन्होंने भक्ति गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां भी दीं, जिस पर भक्त झूमते नजर आए। कार्यक्रम में पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र, भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू, उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री भूपेंद्र चौधरी, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
लखनऊ। भारतीय संस्कृति में वाइफ और बीवी नहीं होती, यहां धर्मपत्नी होती है। जो पति को पतन से बचा ले, वही पत्नी कहलाने योग्य है। यह बात सोमवार को जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई परिसर में चल रही कथा के आठवें दिन कही।
उन्होंने कहा कि नारी सम्मान सनातन का मूल मंत्र है। महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए लाए गए नारी शक्ति वंदन प्रस्ताव का भी विरोध हुआ था, जबकि भारतीय संस्कृति के अनुसार महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण भी दिया जाए तो कम है। परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका सर्वोपरि है।
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कथा के दौरान रामभद्राचार्य ने भगवान श्रीराम के वनवास काल में आदिवासियों, गिरिवासियों एवं शबरी से मिलन के प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने ऋषि शरभंग प्रसंग का उल्लेख करते हुए नवधा भक्ति के छठे स्वरूप वंदन भक्ति की विस्तृत व्याख्या की।
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बृज की रसोई परिसर में कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत ः आयोजक

बृज की रसोई परिसर में कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत ः आयोजक