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Lucknow News: सेंट्रल व लखनऊ बार के पदाधिकारियों समेत तीन वकीलों को हाईकोर्ट का नोटिस

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jun 2026 02:53 AM IST
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High Court notice to three lawyers including office bearers of Central and Lucknow Bar
हाईकोर्ट लखनऊ खंडपीठ। 
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लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने वकीलों की हड़ताल पर सख्त रुख अपनाया है। यह मामला कैसरबाग स्थित जनपद न्यायालय के आसपास वकीलों के अवैध कब्जों को हटाने से जुड़ा है। कोर्ट ने सेंट्रल बार एसोसिएशन, लखनऊ बार एसोसिएशन और तीन अधिवक्ताओं को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए? उनके आचरण की शिकायत बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को क्यों न भेजी जाए?



न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की अवकाशकालीन पीठ सोमवार को अनुराधा सिंह व अन्य की ओर से दाखिल जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि 18 से 26 मई तक दोनों बार एसोसिएशनों के आह्वान पर लखनऊ में अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से विरत रहकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन किया। न्यायालय ने इसे प्रथमदृष्टया अवैध और अनुचित बताया। कोर्ट ने कहा कि हड़ताल के कारण बड़ी संख्या में वादकारी प्रभावित हुए। दूरदराज से आने वाले गरीब मुकदमेबाजों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और गवाहों सहित अन्य लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। आदेश में कहा गया कि किसी भी अधिवक्ता या बार एसोसिएशन को न्यायालयों के बहिष्कार अथवा हड़ताल का अधिकार नहीं है।
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खंडपीठ ने अधिवक्ता उत्तम त्रिपाठी, हिमांशु मिश्रा और बृजेश कुमार यादव को भी नोटिस जारी कर दो सप्ताह में शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि सेंट्रल बार एसोसिएशन ने दो अधिवक्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें पांच वर्ष के लिए सदस्यता से निष्कासित किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगाी।
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यह है मामला

कोर्ट ने अनुराधा सिंह व दो अन्य लोगों की याचिका पर अवैध कब्जों को सख्ती से हटाने का आदेश दिया था। मामले में नगर निगम की ओर से दाखिल रिपोर्ट के अनुसार संबंधित क्षेत्र में करीब 72 अतिक्रमण पाए गए थे, जिनमें अधिकांश अधिवक्ताओं के चैंबर और कुछ दुकानों का अवैध निर्माण भी शामिल थे। पिछली सुनवाई पर नगर निगम की ओर से कार्रवाई रिपोर्ट पेश की गई थी। इसमें नगर आयुक्त के पत्र के हवाले से कहा गया कि 17 मई को स्वास्थ्य भवन के पास चकबस्त चौराहे पर चिह्नित किए गए 72 अतिक्रमणों में से 14 को ही हटाया गया। बाकी अतिक्रमणों को मौके पर मौजूद वकीलों के अवरोध की वजह से नहीं हटाया जा सका। ऐसे में कोर्ट के आदेश के पालन के लिए प्रशासन से जरूरी सहयोग और पुलिस बल मांगा गया था।
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