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सुना है क्या: दबाव में खाकी, अधिकारी सहमे; साथ ही कुर्सी के लिए शाह मात का खेल और पद एक दावेदार अनेक के किस्से
Mon, 29 Jun 2026 11:13 AM IST
Bhupendra Singh
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Bhupendra Singh
Updated Mon, 29 Jun 2026 11:13 AM IST
सार
यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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सुना है क्या/suna hai kya
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'दबाव में खाकी, अधिकारी सहमे' की कहानी। इसके अलावा 'कुर्सी के लिए शाह मात का खेल' और 'पद एक, दावेदार अनेक' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...
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दबाव में खाकी, अधिकारी सहमे
दान राशि चोरी का मामला चर्चा में है। कई बड़े लोगों पर तमाम आरोप लगे हैं। कार्रवाई भी शुरू हो चुुकी है। छोटी मछलियां जेल भेजी गई हैं। पर, मजाल है कि पुलिस की तरफ से कोई बयान जारी हुआ। इसके पीछे की वजह है पुलिस पर भारी दबाव। पुलिस खुद डरी है और अधिकारी सहमे हुए हैं। वह जानते हैं कि मामला बहुत ऊपर तक है, इसलिए वह फूंक फूंक कर कदम रख रहे हैं। अक्सर जो पुलिस चिंदी चोरों को पकड़ने के बाद अपनी पीठ थपथपाने से पीछे नहीं हटती, वही पुलिस इसमें पर्दे के पीछे चुप्पी साधे हुए है। सब दबाव का खेल है।
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कुर्सी के लिए शाह मात का खेल
प्रदेश के विभागों में यूं तो कुर्सी की लड़ाई आम बात है। किंतु पढ़ाई लिखाई वाले एक विभाग में इसकी खींचतान काफी चर्चा में है। एक साहब ने अपना दांव लगाते हुए सभी को पीछे कर कुर्सी तो पा ली लेकिन अब उनके प्रतिद्वंदी उनको फिर से मात देने में जुटे हुए हैं। इस शाह मात में एक एक कर पुराने मामले खोले जा रहे हैं और नोटिस का दौर भी शुरू हो गया है। जुलाई में नए सत्र के साथ ही यह शाह, मात भी कोई गुल जरूर खिलाएगी।
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