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Lucknow News: लविवि के शोध से बढ़ेगी नींबू की शेल्फ लाइफ

Mon, 26 Oct 2026 02:19 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 26 Oct 2026 02:19 AM IST
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Research from Lucknow University will extend the shelf life of lemons
लखनऊ। नींबू को लंबे समय तक ताजा रखने और कटाई के बाद होने वाली बर्बादी कम करने के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने प्राकृतिक उपाय की संभावनाएं तलाशी हैं। वनस्पति विज्ञान और जैव रसायन विभाग के शोधकर्ताओं ने लौंग और लेमनग्रास से प्राप्त आवश्यक तेलों का इस्तेमाल कर नींबू में हरे रंग की फफूंद के संक्रमण को नियंत्रित करने का अध्ययन किया। प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों में दोनों तेलों ने फफूंद की वृद्धि रोकने में प्रभावी परिणाम दिए। वहीं, तेलों की निर्धारित सांद्रता से उपचारित नींबुओं में 14 दिन बाद भी सड़न के लक्षण नहीं मिले।
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यह शोधपत्र वर्ष 2026 में जर्नल ऑफ फूड प्रोसेसिंग एंड प्रिजर्वेशन में प्रकाशित हुआ है। शोध के नतीजे किसानों, फल कारोबारियों और खाद्य उद्योग के लिए भविष्य में प्राकृतिक संरक्षण का विकल्प विकसित करने की उम्मीद जगाते हैं। अध्ययन में लखनऊ विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रो. प्रदीप कुमार, जैव रसायन विभाग की डॉ. मधु कमले और शोधार्थी चिकांशी शर्मा, रितुराज बोरा व पूर्णमश्री गोगोई शामिल रहे। प्रो. प्रदीप कुमार व डॉ. मधु कमले के अनुसार, शोध के निष्कर्ष संकेत देते हैं कि पौधों से प्राप्त आवश्यक तेल भविष्य में इस नुकसान को कम करने में उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, व्यावसायिक स्तर पर इनके इस्तेमाल से पहले बड़े पैमाने पर परीक्षण करने होंगे। साथ ही, नींबू के स्वाद, गुणवत्ता, उपचार की सुरक्षा, लागत और अलग-अलग भंडारण परिस्थितियों में इनकी प्रभावशीलता का आकलन भी जरूरी होगा।
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लौंग के तेल ने दिखाया बेहतर असर
शोधकर्ताओं ने नींबू में हरे रंग की फफूंद लगाने वाले पेनिसिलियम डिजिटेटम पर दोनों आवश्यक तेलों के प्रभाव का परीक्षण किया। प्रयोगशाला में लौंग के तेल से फफूंद की वृद्धि में लगभग 89.81 प्रतिशत और लेमनग्रास के तेल से 76.69 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसके बाद फफूंद के संपर्क में लाए गए नींबुओं पर भी इन तेलों का परीक्षण किया गया। परिणामों के अनुसार, लौंग के तेल की 1,500 पीपीएम और लेमनग्रास के तेल की 2,000 पीपीएम सांद्रता से उपचारित नींबुओं में 14 दिन बाद तक सड़न के दिखाई देने वाले लक्षण नहीं मिले।
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