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सुना है क्या: 'तेवर पड़े ठंडे' की कहानी, साथ ही बाहुबली ने तोड़ा तिलिस्म व विपक्षी माननीय का राम-राम के किस्से

अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Mon, 09 Feb 2026 03:59 PM IST
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सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

suna hai kya Tevar Pade Thande story along with Bahubali breaking spell and opposition honorable Ram-Ram tales
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'डंडे से तेवर पड़े ठंडे' की कहानी। इसके अलावा 'बाहुबली ने तोड़ा तिलिस्म' और 'विपक्षी माननीय का राम-राम' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी... 

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डंडे से तेवर पड़े ठंडे

मंत्री को घेरकर माहौल बनाने वाले माननीय मुखिया को घेरने की धमकी देकर फंस गए हैं। उनके इस बयान पर अनुशासन का डंडा क्या पड़ा, उनके तेवर ठंडे पड़ गए हैं। यही नहीं मामला गंभीर होता देख वह माननीय बीते कई दिनों से अर्न्तध्यान हैं। हालांकि, उनके समर्थक माननीय के आध्यात्मिक यात्रा पर होने का दावा कर रहे हैं जबकि पूर्व माननीय रहे उनके पिता मौके की नजाकत को समझते हुए आग पर पानी डालने की कोशिश कर रहे हैं। पिता खुद को धृतराष्ट्र न होने देने का दावा भी कर रहे हैं। बेटे को बचाने के लिए मैदान में उतरे पिता अब तो माफीनामा पर भी राजी हैं। चर्चा है कि माननीय के टिकट पर भी संकट आ गया है।

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बाहुबली ने तोड़ा तिलिस्म

खाकी वाले विभाग में डीजी लेवल के अफसरों के तबादले क्या हुए, सबकी जुबां पर एक खास शाखा में हुए बदलाव को लेकर तंज कसा जाने लगा। एक डीजी इस शाखा के रहनुमा बनने की चाहत रखते थे। उन्होंने इसके लिए फील्डिंग भी की थी। ऐन मौके पर उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया तो अपने बैच के व्हाट्सएप ग्रुप में भड़ास निकालने लगे। जिन्हें शाखा की कमान सौंपी गई, उन्हें बाहुबली का खिताब देते हुए लिखा कि उन्होंने तिलिस्म को तोड़ने में सफलता पाई। अब बाकी अफसर साथी तय नहीं कर पा रहे हैं कि उन्होंने बाहुबली बने अफसर की तारीफ की है या तंज कसा है।

विपक्षी माननीय का राम-राम

विपक्ष वाले माननीय के पास सदन में अहम जिम्मेदारी है लेकिन यह तय करने की जिम्मेदारी सुपर पॉवर की है कि वह कहां जाएंगे, कहां नहीं। कई बार सीधे बात नहीं हो पाती है तो इंतजार करना पड़ जाता है। फिर खुद ही राम-राम जपने लगते हैं कि किसी तरह मार्गदर्शन मिल जाए। कहते हैं कि अब तो राम-राम का ही सहारा है। साथ वाले भी कहने लगे हैं कि माननीय खुद कुछ भी निर्णय न लेने में ही भलाई समझते हैं।

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