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Lucknow News: अभिभावकों पर निजी स्कूलों की मनमानी का बोझ
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लखनऊ। राजधानी के निजी स्कूलों ने एक बार फिर अभिभावकों पर महंगी पढ़ाई का बोझ लाद दिया है। प्री नर्सरी से लेकर 12वीं तक की किताबों के दाम 35 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। कमीशन की खातिर निजी स्कूल महंगे प्रकाशकों की किताबें चला रहे हैं। खास बात है कि ये किताबें भी स्कूल की ओर से तय दुकानों से ही मिल रही हैं।
वैसे तो नियम है कि एनसीईआरटी की किताबों से ही पढ़ाई कराई जाए, लेकिन बड़े निजी स्कूलों में इसका पालन नहीं हो रहा है। विभागीय अधिकारी भी मानते हैं कि एनसीईआरटी पाठ्यक्रम चले तो अभिभावकों को बड़ी राहत मिल जाएगी। यूपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूल यदि अभिभावकों पर तय दुकान से किताबें खरीदने का दबाव बनाएं तो शिक्षा विभाग में इसकी शिकायत कर सकते हैं। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा परिषद के सरकारी व निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू है। इसमें कोर्स की कीमत 400 से 500 रुपये तक है। कॉपी की कीमत उसकी गुणवत्ता पर निर्भर करती है।
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आशियाना व एल्डिको स्थित बड़े निजी स्कूलों के कोर्स के रेट
कक्षा बीते वर्ष के दाम इस वर्ष
नर्सरी 5200 7500 से 8500 तक
कक्षा एक 5500 8000 से 9500 तक
कक्षा तीन 6000 8500 से 10000 तक
कक्षा छह 6500 9600 से 10,500 तक
कक्षा आठ 7500 10000 से 11,000 तक
कक्षा दस 8000 11,500 से 12,000 तक
कक्षा 11 8500 12,000 से 13000 तक
कक्षा 12 9000 13,000 से 14000 तक
यूपी बोर्ड में है किताबें अपलोड करने की सुविधा
माध्यमिक शिक्षा परिषद ने अपनी वेबसाइट पर कक्षा व विषयवार किताबें अपलोड कर दी हैं। लिंक https://upmsp.edu.in/Books.html से इनकी पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं।
अभिभावकों का दर्द
मेरा बच्चा आशियाना के निजी स्कूल में पढ़ता है। उसका कोर्स 15 हजार रुपये में मिला। निजी प्रकाशकों की किताबें भी वहीं मिलती हैं, जहां स्कूल प्रबंधन बताते हैं।
- श्रुति, अभिभावक
मेरे बेटे ने एल्डिको स्थित निजी विद्यालय में सातवीं में प्रवेश लिया है। उसका कॉपी-किताबों का सेट 14 हजार रुपये में मिला है। स्टेशनरी का सामान अलग से खरीदा है।
- निधि सिंह अभिभावक
कोट.........
सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें चलेंगी। बाजार में किताबें हैं। जो स्कूल निजी प्रकाशकों की किताबें लेने का दबाव बना रहे हों, उनकी शिकायत मेरे कार्यालय में अभिभावक कर सकते हैं। इस पर कार्रवाई की जाएगी।
- राकेश कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक
कोट....
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए कोर्स अपडेट होता है तो किताबें बदल जाती है। जरूरत के अनुसार किताबें अभिभावकों से लेने के लिए कहा जाता है। किसी को निर्धारित दुकान से किताबें लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाता है।
- अनिल अग्रवाल, अनएडेड स्कूल एसोसिएशन
कोट......
बाजार में सस्ते और महंगे दोनों प्रकाशक हैं। कई प्रकाशकों की किताबें अच्छी गुणवत्ता की होती हैं, इसलिए उनकी कीमत ज्यादा होती है। सस्ते प्रकाशकों की किताबें भी हैं।
- संजय कुमार पुस्तक व कॉपी विक्रेता