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Lucknow News: बगैर ज्वॉइनिंग लेटर प्राइवेटकर्मियों से बनवा रहे डीएल,परिवहन विभाग के डाटा में सेंधमारी की आशंका

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 26 Feb 2026 06:22 PM IST
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परिवहन विभाग के सिस्टम में सेंधमारी, एसओपी का भी पालन नहीं कर रहीं निजी एजेंसियां

डीएल आवेदकों से वसूली पर है पूरा जोर

माई सिटी रिपोर्टर

लखनऊ। ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाले प्राइवेटकर्मियों को ज्वॉइनिंग लेटर दिए बगैर काम करवाया जा रहा है। इतना ही नहीं निजी एजेंसियों एसओपी का भी पालन नहीं कर रही हैं। सीसीटीवी, टोकन मैनेजमेंट सिस्टम सहित एसओपी से जुड़ा कोई भी काम तीन महीने में पूरा नहीं किया गया है। इससे खुलेआम परिवहन विभाग के सिस्टम में सेंधमारी हो रही है। लेकिन अफसर आंख मूंदे बैठे हैं।

25 जिलों के जिलाधिकारियों की ओर से कराई जा रही जांच में यह तथ्य सामने आया है। जोकि चौंकाने वाला है। दरअसल, परिवहन विभाग में डीएल बनाने, प्रिंटिंग व डिलीवरी का काम निजी एजेंसियों के पास है। प्रदेशभर में तीन एजेंसियों फोकॉम नेट, रोजमार्टा व सिल्वर टच को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सिल्वर टच लखनऊ संभाग के जिलों में डीएल का कामकाज देखती है। वहीं फोकाम के पास आगरा व कानपुर जोन है। खास बात यह है कि इन निजी एजेंसियों ने प्रदेशभर में 320 प्राइवेटकर्मियों को नियुक्त किया है. इसमें फोकाम नेट से जुड़े तुषार गर्ग,  तौकीर  व  राशिद फारुकी ने 120 कर्मचारियों को तैनाती दी है। सूत्रों का कहना है कि इनसे नियुक्ति के नाम पर वसूली भी की गई है। निजी एजेंसियों का पूरा फोकस कर्मियों से वसूली पर है। इस मुद्दे को लेकर अमर उजाला लखनऊ संस्करण में लगातार खबरें प्रकाशित की जा रही हैं, जिसके बाद परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने 25 जिलों के डीएम को जांच के लिए पत्र लिखा था। जांच रिपोर्ट तैयार हो रही है। जांच टीम से जुड़े लोगों का कहना है कि फोकाम नेट ने अंधेरगर्दी मचा रखी है। हालांकि तीनों एजेंसियां स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर एसओपी का पालन नहीं कर रही हैं। लेकिन फोकाम नेट व सिल्वर टच ने अपने कर्मचारियों को ज्वॉइनिंग लेटर तक नहीं दिए हैं। कर्मचारी तीन महीने से ऐसे ही काम कर रहे हैं। जिससे परिवहन विभाग का सिस्टम व डाटा खतरे में है।
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वसूली पर फोकस, एसओपी पर नहीं
निजी एजेंसियों का पूरा फोकस कर्मचारियों व डीएल आवेदकों से वसूली पर है। एसओपी को लेकर कहीं संजीदगी नहीं बरती जा रही है। परिवहन अधिकारी बताते हैं कि एसओपी के अनुसार प्रदेशभर के 77 आरटीओ, एआरटीओ में निजी एजेंसियों को सीसीटीवी लगवाने थे। डीवीआर, 5 केवीए का पावर बैकअप, टोकन मैनेजमेंट सिस्टम, सॉफ्टवेयर, डिस्प्ले मशीन, प्रिंटर लगाने थे। लेकिन अधिकतर जगहों पर यह काम पूरा नहीं हो पाया है। इसके अतिरिक्त फर्नीचर भी लगाना था, लेकिन एजेंसियों ने ऐसा नहीं किया।


अफसर भी लापरवाह, नहीं लगाई पेनाल्टी
एसओपी का पालन 45 दिन के भीतर नहीं करने पर निजी एजेंसियों पर पेनाल्टी लगाने का नियम है। लेकिन परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह से लेकर अफसर तक इस मामले में चुप्पी ओढ़े हुए हैं। निजी एजेंसियों द्वारा एसओपी पालन नहीं करने पर 45 दिनों के बाद अगले डेढ़ महीने तक पांच हजार रुपये प्रतिदिन व उसके बाद 10 हजार रुपये प्रतिदिन की पेनाल्टी लगाई जानी चाहिए थी। जबकि फोकाम, सिल्वर टच व रोजमार्टा को काम संभाले हुए तीन महीने हो चुका है, लेकिन एसओपी का पालन अधूरा ही है।





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