{"_id":"699c515bd46a4aa91409b74c","slug":"transport-dept-lucknow-news-c-13-1-lko1068-1618828-2026-02-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: अफसरों की सिफारिश पर रखे गए 60 डीएल कर्मियों से भी हुई वसूली, जांच में उजागर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: अफसरों की सिफारिश पर रखे गए 60 डीएल कर्मियों से भी हुई वसूली, जांच में उजागर
विज्ञापन
विज्ञापन
Trending Videos
परिवहन विभाग के मामला का फॉलोअप
डीएल बनाने वाले प्राइवेटकर्मियों से वसूली की जिलाधिकारियों ने जांच की तेज
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। परिवहन विभाग में डीएल बनाने वाले प्राइवेटकर्मियों की नियुक्ति अफसरों की सिफारिश पर भी हुई है। 60 कर्मियों की नियुक्ति अफसरों के रिफरेंस से हुई। इन कर्मियों से भी नियुक्ति के लिए वसूली हुई है। अधिकारियों की ओर से प्राइवेटकर्मियों से वसूली को लेकर हो रही जांच के दायरे में यह कर्मचारी भी आ गए हैं। साथ ही इन सिफारिशी कर्मियों से अफसरों व निजी कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजरों ने वसूली की है। जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सेवानिवृत्त अपर परिवहन आयुक्त, आईटी की सिफारिश पर 16 कर्मियों को तैनात किया गया है।
यह तथ्य आगरा, कानपुर, मथुरा सहित 25 जिलों के जिलाधिकारियों की ओर से कराई जा रही जांच में सामने आ रही है। जिलाधिकारियों की ओर से इस हफ्ते जांच की रिपोर्ट परिवहन आयुक्त किंजल सिंह को सौंप दी जाएगी, ऐसी उम्मीद जताई जा रही है। परिवहन विभाग में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का काम सिल्वर टच, फोकाम नेट व रोजमार्टा, इन तीन कंपनियों के पास है। कंपनियों ने प्रदेशभर में डीएल बनाने, प्रिंटिंग व डिलीवरी का कामकाज देखने के लिए 320 कर्मियों की भर्ती की। इसमें फोकाम नेट कंपनी को आगरा व कानपुर जोन के जिलों की जिम्मेदारी मिली। इसमें 120 प्राइवेटकर्मियों की भर्ती की गई, जिनसे भर्ती के नाम पर लाखों रुपये वसूले गए। फोकाम के पूर्व प्रोजेक्ट मैनेजर व वर्तमान प्रोजेक्ट मैनेजर पर वसूली के आरोप लगे, जिसके बाद उन्हें व उनकी ओर से नियुक्त किए गए पंद्रह कर्मियों को हटा दिया गया। मामले ने तूल पकड़ा, जिसके बाद परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने प्रदेश के 25 जिलों के डीएम को पत्र लिखकर मामले की जांच के लिए कहा। जांच शुरू हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
सिफारिशी नियुक्तियों से अफसरों ने की वसूली
सूत्र बताते हैं कि जांच में कई तथ्य सामने आ रहे हैं। इसमें फोकाम नेट में तैनात किए गए 120 कर्मियों में से 60 कर्मचारी ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति अफसरों व उनके मातहतों की सिफारिश पर हुई। इसमें अकेले सेवानिवृत्त हो चुकीं अपर परिवहन आयुक्त, आईटी सुनीता वर्मा की सिफारिश पर 16 कर्मी तथा आरटीओ, एआरटीओ के कहने पर भी 20 नियुक्तियां हुई हैं। इसके अलावा अफसरों के मातहत बाबुओं ने भी सिफारिश कर नियुक्तियाँ करवाईं। पूर्व प्रोजेक्ट मैनेजर एसएन पांडेय ने 15, वर्तमान प्रोजेक्ट मैनेजर तौकीर ने 20 से अधिक नियुक्तियां की हैं। जांच से जुड़े अफसर बताते हैं कि सिफारिशी नियुक्तियों से अफसरों ने कमाई की है। उनके नाम टीम रिपोर्ट में उजागर करेगी।
आरटीओ के भतीजे को भी नहीं बख्शा
फोकाम नेट में डीएल से संबंधित कामकाज के लिए प्रदेश के एक आरटीओ ने अपने भतीजे की सिफारिश की। प्रोजेक्ट मैनेजरों ने उनकी सिफारिश पर भतीजे को भर्ती कर लिया। लेकिन कुछ दिनों बाद उसे परेशान करने लगे। उस पर अन्य कर्मचारियों की तरह कम्प्यूटर, वेबकैम, बैटरी सहित अन्य सामान खरीदने का दबाव बनाया तथा तनख्वाह की धनराशि पहले देने को कहा गया। भतीजे ने जब आपत्ति की तो मामले को निपटाने के लिए उससे डेढ़ लाख रुपये की वसूली की गई।
