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UP: जर्जर लाल बारादरी को खुलवाने की जिद पर अड़े छात्र, सपा छात्रसभा-एनएसयूआई और एबीवीपी कार्यकर्ता आमने-सामने

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Mon, 23 Feb 2026 01:16 PM IST
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सार

राजधानी में छात्र लविवि स्थित जर्जर लाल बारादरी को खुलवाने की जिद पर अड़े हैं। जबकि, लविवि प्रशासन ने इसे क्षतिग्रस्त और असुरक्षित घोषित किया है। इसके लिए चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं। आगे पढ़ें पूरी खबर...

Students adamant on reopening dilapidated Lal Baradari LU administration has declared damaged and unsafe
जर्जर लाल बारादरी खुलवाने को प्रदर्शन करते छात्र। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राजधानी लखनऊ में लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर स्थित जर्जर लाल बारादरी के दरवाजों को बंद कराने के निर्णय के विरोध में सपा छात्रसभा और एनएसयूआई छात्रों का विरोध सोमवार को भी जारी रहा। यह लोग नारेबाजी करते हुए हंगामा करते है। उधर, एबीवीपी कार्यकर्ता भी एकत्र हो गए। वह लोग जय शिवाजी, जय भवानी करे नारे लगाते रहे। स्थिति तनावपूर्ण होती, इससे पहले ही मामले को नियंत्रण में ले लिया गया। 

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इससे पहले रविवार को एनएसयूआई और समाजवारी छात्र सभा के छात्र नेताओं के नेतृत्व में सैकड़ों विद्यार्थी धरने पर बैठ गए। लविवि प्रशासन के फैसले पर आपत्ति जताई। छात्रों का कहना है कि लाल बारादरी विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। इसे बंद करना ठीक नहीं है। धरने पर बैठे छात्रों ने मांग की कि इस भवन को पहले की तरह खुला रखा जाए। यदि मरम्मत या संरक्षण की आवश्यकता है तो उसे संरक्षित धरोहर के रूप में विकसित किया जाए।
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लविवि प्रशासन ने जर्जर लाल बारादरी भवन को क्षतिग्रस्त और असुरक्षित घोषित करते हुए इसमें प्रवेश व किसी भी गतिविधि पर रोक लगा दी है। कुलसचिव डॉ. भावना मिश्रा की ओर से यहां चेतावनी होर्डिंग भी लगाए गए हैं।



छात्र नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि लाल बारादरी के संरक्षण के लिए सरकार की ओर से लविवि को दी गई राशि का अब तक क्या उपयोग हुआ है, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन, पुरातत्व विशेषज्ञों और छात्र प्रतिनिधियों की संयुक्त समिति गठित करने की मांग की गई है, ताकि पारदर्शी और संतुलित निर्णय लिया जा सके।

रविवार को देर शाम तक एनएसयूआई के प्रिंस प्रकाश, अहमद रजा, विशाल कुमार के साथ समाजवारी छात्र सभा से प्रेम प्रकाश, तौकील गाजी, नवनीत यादव आदि विरोध में धरने पर बैठे रहे।
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