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केंद्रीय बजट: प्रदेश में बढ़ेगा पर्यटन, हाई स्पीड रेल से बढ़ेगी कनेक्टिविटी; अस्पताल होंगे और भी बेहतर

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 01 Feb 2026 07:16 PM IST
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सार

Budget 2026: केंद्रीय बजट में घोषित 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में से 2 महत्वपूर्ण कॉरिडोर सीधे उत्तर प्रदेश से जुड़े हैं, जिनमें दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रमुख हैं। 

Union Budget: Tourism will increase in the state, high-speed rail will enhance connectivity; hospitals will be
केंद्रीय बजट से यूपी को होगा लाभ। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026–27 उत्तर प्रदेश के विकास को नई गति देगा। इस बजट में राज्य के आर्थिक, औद्योगिक व सामाजिक परिदृश्य को सशक्त करने वाली कई दूरगामी घोषणाएं की गई हैं। आधुनिक कनेक्टिविटी, बड़े पैमाने पर इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश और रोजगारोन्मुखी योजनाओं के माध्यम से उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को और प्रभावी तरीके से निभा सकेगा।

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बजट में किसान, महिला, युवा, कारीगर व छोटे उद्यमियों को केंद्र में रखते हुए समावेशी विकास का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। विशेष रूप से पूर्वांचल, काशी क्षेत्र, बुंदेलखंड और टियर-2 व टियर-3 शहरों के लिए ये योजनाएं क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार, निवेश व आर्थिक गतिविधियों को गति देने में अहम भूमिका निभाएंगी।
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हाई-स्पीड रेल से बदलेगी कनेक्टिविटी की तस्वीर
केंद्रीय बजट में घोषित 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में से 2 महत्वपूर्ण कॉरिडोर सीधे उत्तर प्रदेश से जुड़े हैं, जिनमें दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रमुख हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से राजधानी दिल्ली से काशी, पूर्वांचल और आगे पूर्वी भारत तक की रेलयात्रा तेज, सुरक्षित, सुविधाजनक तरीके से संपन्न होगी। आधुनिक तकनीक से लैस रेल नेटवर्क प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगा। हाई-स्पीड रेल से लंबी दूरी की यात्रा का समय काफी कम होगा, जिससे व्यापारिक गतिविधियों, औद्योगिक निवेश व पर्यटन को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। काशी, पूर्वांचल व सीमावर्ती जिलों में उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा होंगे और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था अधिक मजबूत होगी। साथ ही, धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को गति मिलने से होटल, ट्रांसपोर्ट, टूरिस्ट गाइड जैसे स्थानीय व्यवसायों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। 

वाराणसी को मिलेगा जल परिवहन में नया आयाम

राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (गंगा) के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा जल परिवहन को सुदृढ़ करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में केंद्रीय बजट में वाराणसी में इनलैंड वॉटरवेज शिप रिपेयर इकोसिस्टम स्थापित किए जाने की घोषणा की गई है। यह पहल गंगा नदी पर विकसित हो रहे जलमार्ग आधारित परिवहन तंत्र को तकनीकी व व्यावसायिक रूप से मजबूत बनाएगी। शिप रिपेयर इकोसिस्टम के स्थापित होने से मालवाहक जहाजों और जलपोतों के रखरखाव व मरम्मत की सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगी, जिससे समय और लागत दोनों में कमी आएगी। इससे लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बढ़ावा मिलने के साथ जल परिवहन, एक किफायती और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप में प्रभावी होगा। साथ ही, तकनीकी विशेषज्ञों, इंजीनियरों और कुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। स्थानीय युवाओं को स्किल डेवलपमेंट और तकनीकी प्रशिक्षण से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने में यह परियोजना अहम भूमिका निभाएगी। 

पर्यटन व धार्मिक स्थलों को नई पहचान

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बजट 2026 - फोटो : amarujala.com

केंद्रीय बजट में पर्यटन व सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण को विशेष महत्व दिया गया है। इसी क्रम में भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ तथा हस्तिनापुर को देश के 15 प्रमुख पुरातात्विक पर्यटन स्थलों के विकास कार्यक्रम में शामिल किया जाना उत्तर प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इससे न केवल यूपी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर नई मजबूती मिलेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। इससे धार्मिक, सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन को नया आयाम मिलेगा। पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से होटल, होम-स्टे, गाइड सेवाएं, ट्रांसपोर्ट, हस्तशिल्प, स्थानीय बाजार और अन्य सहयोगी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। परिणामस्वरूप स्थानीय युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

सिटी इकोनॉमिक रीजन से शहरों का समग्र विकास

केंद्रीय बजट 2026–27 में टियर-2 और टियर-3 शहरों को विकास की मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से सिटी इकोनॉमिक रीजन (सीईआर) योजना की शुरुआत की घोषणा की गई है। इस योजना के तहत बड़े महानगरों पर निर्भरता कम करते हुए पांच लाख से ज्यादा आबादी वाले अन्य शहरों में बुनियादी ढांचे व आर्थिक गतिविधियों को सुदृढ़ किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और झांसी जैसे प्रमुख शहरों को इस योजना का सीधा लाभ मिल सकता है। आगामी पांच वर्षों में प्रत्येक सिटी इकोनॉमिक रीजन के लिए लगभग ₹5000 करोड़ तक का चरणबद्ध निवेश प्रस्तावित है। इस निवेश से इन शहरों और उनके आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक क्लस्टर, स्टार्टअप हब, लॉजिस्टिक्स पार्क और सेवा क्षेत्र को विकसित किया जाएगा। साथ ही शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे सड़क, जलापूर्ति, सीवरेज, आवास, सार्वजनिक परिवहन और डिजिटल कनेक्टिविटी को भी आधुनिक बनाया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और निजी निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।

इन्फ्रास्ट्रक्चर में रिकॉर्ड निवेश

केंद्रीय बजट में देशभर में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास को गति देने के लिए ₹12.2 लाख करोड़ के रिकॉर्ड कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) की घोषणा की गई है, जिसका सीधा व अप्रत्यक्ष लाभ उत्तर प्रदेश को भी मिलेगा। केंद्र सरकार के इस कैपेक्स का उद्देश्य आर्थिक विकास को रफ्तार देना, रोजगार सृजन करना और भारत को वैश्विक निवेश का आकर्षक केंद्र बनाना है। उत्तर प्रदेश में इस निवेश से सड़क, राष्ट्रीय राजमार्ग, एक्सप्रेसवे, रेलवे नेटवर्क और लॉजिस्टिक हब के विस्तार को नई गति मिलेगी। राज्य का पहले से मजबूत होता एक्सप्रेसवे नेटवर्क (पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गंगा और लिंक एक्सप्रेसवे) औद्योगिक कनेक्टिविटी को और सुदृढ़ करेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से माल और यात्रियों की आवाजाही सुगम होगी, जिससे उद्योगों की लॉजिस्टिक लागत घटेगी और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। इसके साथ ही डिफेंस कॉरिडोर, औद्योगिक क्षेत्रों और लॉजिस्टिक पार्कों में निवेश बढ़ने से यूपी की सामरिक और औद्योगिक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। रेलवे और मल्टीमोडेल लॉजिस्टिक्स के विकास से राज्य उत्तर भारत के एक प्रमुख ट्रांजिट और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरेगा।

खेल, एमएसएमई व टेक्सटाइल सेक्टर को प्रोत्साहन

केंद्रीय बजट में खेल, एमएसएमई और टेक्सटाइल सेक्टर को रोजगार सृजन और निर्यात बढ़ाने वाले प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया है। खेल सामग्री निर्माण को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष प्रोत्साहन दिए जाने से उत्तर प्रदेश के मेरठ, नोएडा और आगरा जैसे परंपरागत खेल उद्योग केंद्रों को नई ऊर्जा मिलेगी। मेरठ पहले से ही देश का प्रमुख स्पोर्ट्स गुड्स हब है, जहां क्रिकेट, एथलेटिक्स और फिटनेस से जुड़ी सामग्री का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। 
 
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