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UP: आप सांसद बोले- एप्स्टीन फाइल और अडानी को बचाने के लिए मोदी ने देश का स्वाभिमान गिरवी रखा

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Sun, 14 Jun 2026 05:16 PM IST
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सार

आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि यदि चीन के जहाज, रूस के जहाज और पाकिस्तान के जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से आ-जा सकते हैं तो भारत के जहाजों को रोकने और उन पर हमला करने का अधिकार अमेरिका को किसने दिया? उन्होंने कहा कि यह स्थिति देश के लिए बेहद अपमानजनक है और मोदी सरकार की कमजोरी का परिणाम है।

UP: AAP MP Sanjay Singh said that Modi mortgaged the country's self-respect to Trump
आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह। - फोटो : वीडियो ग्रैब
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विस्तार

आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि एप्स्टीन फाइल के दबाव और अपने मित्र अडानी को बचाने की कोशिश में उन्होंने देश के स्वाभिमान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हाथों गिरवी रख दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा तीन भारतीय जहाजों पर हमले और तीन भारतीय नागरिकों की हत्या के बावजूद प्रधानमंत्री की चुप्पी उनकी कमजोरी और डर को उजागर करती है। संजय सिंह ने कहा कि आदित्य शर्मा, शिवानंद, आसिया और मुख्य अभियंता सुरेश जैसे भारतीय नागरिकों की मौत पर प्रधानमंत्री ने न शोक संवेदना व्यक्त की और न ही अमेरिका के खिलाफ एक शब्द बोला, जबकि अमेरिका स्वयं हमले की जिम्मेदारी स्वीकार कर रहा है।



संजय सिंह ने बयान जारी कर कहा कि देश में लोग साउंड प्रूफ और वाटर प्रूफ जैसी चीजों के बारे में सुनते हैं। वाटर प्रूफ घड़ी, वाटर प्रूफ जूते, चप्पल और साउंड प्रूफ कमरे होते हैं, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री अब शर्म प्रूफ हो चुके हैं। उन्हें किसी भी विषय पर शर्म नहीं आती। उन्होंने कहा कि किसी भी स्वाभिमानी देश का प्रधानमंत्री अपने नागरिकों की मौत पर कम से कम संवेदना तो व्यक्त करता है, लेकिन नरेन्द्र मोदी ने ऐसा भी नहीं किया।
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उन्होंने कहा कि एप्स्टीन फाइल का ऐसा दबाव प्रधानमंत्री पर है और अपने मित्र अडानी को बचाने की ऐसी चिंता है कि तीन भारतीयों की मौत के बाद भी वह अमेरिका के खिलाफ एक शब्द नहीं बोल पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने हमारे तीन भारतीयों की जान ले ली, हमारे तीन जहाजों पर हमला किया, लेकिन प्रधानमंत्री मौन बने हुए हैं। यहां तक कि विदेश मंत्रालय के बयान में भी अमेरिका का नाम तक नहीं लिया गया और न ही कोई विरोध दर्ज कराया गया। उन्होंने कहा कि यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली स्थिति है।
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संजय सिंह ने सवाल किया कि आखिर प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका और ट्रम्प से इतना डरते क्यों हैं? उन्होंने कहा कि एप्स्टीन फाइल में ऐसा क्या है कि प्रधानमंत्री पूरी तरह दबाव में दिखाई दे रहे हैं? उन्होंने कहा कि उनका मित्र अडानी रिश्वतखोरी के मामले में अमेरिका में फंसा हुआ है और क्या उसी कारण देश के सम्मान और स्वाभिमान से समझौता किया जा रहा है? उन्होंने कहा कि देश जानना चाहता है कि क्या अडानी को बचाने के लिए भारत का सम्मान दांव पर लगाया जाएगा?

उन्होंने कहा कि तीन दिनों के भीतर तीन भारतीय जहाजों पर हमला हुआ और अमेरिका का बयान बेहद बेशर्मी भरा है। अमेरिका खुले तौर पर कह रहा है कि भारतीय जहाज ईरान से तेल लेने जा रहा था, इसलिए उस पर हमला किया गया। संजय सिंह ने कहा कि यदि कोई भारतीय जहाज अपने व्यापारिक कार्य के लिए जा रहा था तो उसने कौन सा अपराध किया था। उन्होंने कहा कि जहाज पर मौजूद अधिकारियों का स्पष्ट बयान है कि उन्होंने किसी भी प्रतिबंध का उल्लंघन नहीं किया और सभी नियमों का पालन किया।

संजय सिंह ने कहा कि यदि चीन के जहाज, रूस के जहाज और पाकिस्तान के जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से आ-जा सकते हैं तो भारत के जहाजों को रोकने और उन पर हमला करने का अधिकार अमेरिका को किसने दिया? उन्होंने कहा कि यह स्थिति देश के लिए बेहद अपमानजनक है और मोदी सरकार की कमजोरी का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि आदित्य शर्मा एक युवा अधिकारी थे, जबकि शिवानंद और आसिया फिटर के रूप में काम कर रहे थे और साधारण तथा गरीब परिवारों से आते थे। मुख्य अभियंता सुरेश आंध्र प्रदेश से थे और अपने परिवार का सहारा थे। तीन अलग-अलग राज्यों के इन भारतीय नागरिकों की मौत के बाद भी प्रधानमंत्री की चुप्पी असहनीय है। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री अपने नागरिकों के सम्मान और जीवन की रक्षा के लिए आवाज नहीं उठा सकते तो यह देश के लिए चिंता का विषय है।

संजय सिंह ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री अमेरिका के सामने मौन रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकों को हाथों में हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां डालकर अमेरिका ने वापस भेजा, तब भी प्रधानमंत्री नहीं बोले। ट्रम्प ने भारत को नरक कहा, तब भी प्रधानमंत्री नहीं बोले। ट्रम्प ने दावा किया कि पाकिस्तान के साथ संघर्ष विराम उन्होंने व्यापार समझौते की धमकी देकर कराया, तब भी प्रधानमंत्री चुप रहे। यहां तक कि ट्रम्प ने यह तक कहा कि वह नरेन्द्र मोदी का राजनीतिक करियर चौपट कर सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रधानमंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

उन्होंने कहा कि देश यह जानना चाहता है कि आखिर ट्रम्प के पास ऐसा क्या है जिससे प्रधानमंत्री इतने भयभीत हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कायरता और दब्बूपन के साथ दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का नेतृत्व नहीं किया जा सकता। भारत के प्रधानमंत्री को देश की प्रतिष्ठा गिराने का अधिकार नहीं है। संजय सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री बिना किसी से सलाह किए दूसरे देशों के नेताओं के चुनाव प्रचार तक में शामिल हो जाते हैं और उनके समर्थक ऐसे नेताओं के लिए पूजा-पाठ तक करते हैं। लेकिन जब वही व्यक्ति भारतीयों की मौत का जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, भारत को अपमानित कर रहा है, तब न प्रधानमंत्री बोल रहे हैं, न सरकार का कोई मंत्री, न समर्थक।

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