यूपी: चुनाव आयोग को लेकर अखिलेश और भाजपा में ठनी, सपा प्रमुख ने कहा था- BJP के लिए काम कर रहा है आयोग
Akhilesh vs Pankaj Chaudhary: चुनाव आयोग को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव और भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी के बीच वाद-विवाद हुआ है।
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पूर्व मुख्यमंत्री और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर सीधे भाजपा के लिए काम करने का आरोप जड़ा दिया। पश्चिम बंगाल में चुनाव के संबंध में आयोग के पोस्ट का जिक्र कर बोले कि अगर आयोग हट जाए तो चुनाव अपने-आप भयरहित हिंसा रहित और छापा रहित होंगे। बंगाल की जनता से दीदी को जिताने की अपील की और कहा कि एक-एक वोट लोकतंत्र और संविधान बचाने के लिए होगा।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान एक फिल्म के पोस्टर का जिक्र हुआ तो बोले कि भाजपा वाले जानते होंगे कि किसने बनाए हैं। उनकी फिल्म रिलीज होने के पहले फ्लॉप हो गई। बोले कि मुख्यमंत्री योगी के बाद इंजीनियर बन गए। 30 किमी लंबी सड़क सात हजार करोड़ की डिजाइन की। ग्रीन कॉरिडोर ऐसा डिजाइन किया कि हर चौराहे पर सिर मारो। कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल नंदी का जिक्र हुआ तो कहा कि उनके लिए सपा के दरवाजे बंद हैं।
उन्होंने कहा कि बुरे दिन जाने वाले हैं। अगली सरकार सपा बनाएगी। भाजपा वाले दिखावे के लिए लड़ते हैं। मतदाता सूची का जिक्र आने पर कहा कि पीडीए प्रहरी बनाए हैं। एक मामले का उदाहरण देकर कहा कि नकली दस्तखत करवाकर मुस्लिमों के नाम काटे जा रहे हैं। पीडीए वालों का भाजपा हक नहीं देना चाहती। अब बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर छतरी लगवा रहे हैं जबकि सबसे अधिक प्रतिमाएं भाजपा वालों ने ही तोड़ीं। बसपा का नाम लिए बिना बोले कि उनके बाद सबसे अधिक प्रतिमाएं हमने ही लगवाई हैं। बसपा गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने के सवाल पर बात घुमा दी।
चुनाव आयोग पर अखिलेश का बयान ठेस पहुंचाने वाला : पंकज चौधरी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सपा अध्यक्ष द्वारा चुनाव आयोग को लेकर दिए गए बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने बुधवार को जारी अपने बयान में कहा कि अखिलेश का वक्तव्य लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है।
उन्होंने कहा कि सपा अध्यक्ष की नीयत में संविधान के प्रति सम्मान नहीं, बल्कि सिर्फ सत्ता प्राप्ति की बेचैनी दिख रही है। सपा जनता का समर्थन नहीं मिलने पर लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करके अपनी राजनीतिक हताशा छिपाने का प्रयास करती है। सपा अध्यक्ष की भाषा और व्यवहार दर्शाता है कि वे अपनी खिसकती हुई राजनीतिक जमीन से परेशान हैं।
संविधान की दुहाई देकर चुनाव आयोग, सुरक्षा बलों एवं जांच एजेंसियों को लगातार निशाना बनाना सपा की अराजक मानसिकता को उजागर करता है। प्रदेश की जनता अब विकास, सुशासन, सुरक्षा और राष्ट्रहित की राजनीति के साथ है और भ्रम, प्रपंच तथा संस्थाओं के अपमान की राजनीति को नकार चुकी है। जनता सपा की नकारात्मक, निराशाजनक और लोकतंत्र विरोधी राजनीति का तीसरी बार भी सफाया करने के लिए तैयार है।