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यूपी: इस रणनीति के तहत विधानसभा चुनावों से दूर रहना चाहते हैं अखिलेश यादव, पहले भी बिना विधायक बने हैं सीएम

Tue, 03 Nov 2026 08:31 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 03 Nov 2026 08:31 PM IST
सार

Akhilesh Yadav: सपा प्रमुख अखिलेश यादव यूपी के आने वाले विधानसभा चुनावों में खुद चुनाव लड़ते हुए नहीं दिखेंगे। 

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UP: Akhilesh Yadav wants to stay away from the assembly elections under this strategy
अखिलेश यादव का बड़ा फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

वाराणसी के अपने चुनावी दौरे के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बड़ा संकेत देते हुए कहा है कि वह आने वाले प्रदेश विधानसभा चुनाव में खुद किसी एक सीट से प्रत्याशी नहीं होंगे। वह सभी विधानसभा सीटों पर प्रचार के लिए उपलब्ध रहेंगे। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं। 

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सपा सूत्रों के अनुसार, अखिलेश यादव का यह कदम बेहद सोच-समझकर उठाया गया एक रणनीतिक फैसला है, जिसके दूरगामी राजनीतिक मायने हैं।

पूरे प्रदेश पर ध्यान केंद्रित करने की मंशा
अखिलेश यादव अपनी ऊर्जा और समय को केवल अपनी पारंपरिक या किसी एक सीट पर केंद्रित नहीं रखना चाहते हैं। वह पार्टी के मुख्य चेहरे के रूप में पूरे उत्तर प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों पर धुआंधार प्रचार करने के लिए उपलब्ध रहना चाहते हैं।चुनावी समर में अक्सर बड़े नेताओं को अपनी ही सीट पर अधिक समय देना पड़ता है, जिससे वे अन्य निर्वाचन क्षेत्रों को पूरा वक्त नहीं दे पाते। इस रणनीति से वह खुद को किसी एक सीट तक सीमित नहीं करना चाहते हैं। 
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बाद में उपचुनाव के जरिए सदन में आने का विकल्प

राजनीति में यह एक आजमाया हुआ फॉर्मूला रहा है। यदि पार्टी पूर्ण बहुमत या मजबूत स्थिति में आती है, तो अखिलेश यादव बाद में किसी सुरक्षित सीट पर उपचुनाव लड़कर आसानी से विधानसभा (या सदन) में प्रवेश कर सकते हैं, जैसा कि वह पहले भी कर चुके हैं।

जब बिना विधानसभा सदस्य रहे मुख्यमंत्री बने थे अखिलेश यादव

उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह कोई पहला मौका नहीं है जब अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर अनूठा राजनीतिक कदम उठाया हो। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में जब समाजवादी पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला था, तब अखिलेश यादव लोकसभा सांसद (कन्नौज से) थे। चुनाव के बाद पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री चुना। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया और बाद में विधान परिषद के रास्ते प्रदेश की कमान संभाली थी।

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