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यूपी कैबिनेट: 74 किमी लंबे जेवर लिंक एक्सप्रेसवे सहित इन 21 अहम प्रस्तावों को मिली मंजूरी, किसानों को राहत

Tue, 04 Aug 2026 12:34 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 04 Aug 2026 12:34 PM IST
सार

UP Cabinet meeting:यूपी कैबिनेट की एक अहम बैठक बुधवार को हुई। इस बैठक में एक अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी। 

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UP Cabinet meeting: 21 key proposals, including the 74-km-long Jewar Link Expressway, were approved, bringing
योगी कैबिनेट के फैसले। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश के समग्र विकास, बुनियादी ढांचे, जन-कल्याण और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े 21 अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। इस बैठक में राज्य के ढांचागत विकास को नई गति देने के साथ-साथ किसानों, श्रमिकों और वंचित वर्गों के कल्याण के लिए कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए।

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इंफ्रास्ट्रक्चर और क्षेत्रीय विकास को नया आयाम
प्रदेश में कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कैबिनेट ने जेवर एयरपोर्ट से गंगा एक्सप्रेसवे तक (वाया बुलंदशहर) बनने वाले 74.467 किलोमीटर लंबे, 6-लेन प्रवेश-नियंत्रित  ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के आगणन  को अपनी स्वीकृति दे दी है। इस एक्सप्रेसवे को भविष्य की जरूरतों के अनुसार 8-लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। इसके अलावा, प्रयागराज और चित्रकूट क्षेत्र के समन्वित एवं त्वरित विकास के लिए 'प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण' के गठन को हरी झंडी दी गई है। वहीं, प्रदेश के सात प्रमुख स्थानों पर लोक निर्माण विभाग द्वारा भूमि अधिग्रहित कर उसे बहुउद्देशीय हब विकसित करने हेतु आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया है। तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लखनऊ और नोएडा में अत्याधुनिक 'यु-हब स्थापित किए जाएंगे।

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सामाजिक कल्याण, योजनाएं और बोर्ड का गठन

सामाजिक समरसता और समावेशी विकास को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट ने राज्य के विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समुदायों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए 'उत्तर प्रदेश घुमंतू विकास बोर्ड' के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके साथ ही, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के अंतर्गत संचालित 'विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0' के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु इसके मार्गदर्शी सिद्धांतों में संशोधन एवं नए परिव्यय को स्वीकृति दी गई है। ग्राम्य विकास विभाग की 'समुदाय परियोजना' को सुचारू रूप से चलाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और मेसर्स एच.सी.एल. फाउंडेशन के बीच वर्ष 2015 से चले आ रहे समझौते  को आगामी 5 वर्षों के लिए पुनः विस्तारित करने का फैसला लिया गया है।

कृषि एवं किसान कल्याण हेतु फसल बीमा योजना

किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की बेरुखी से होने वाले नुकसान से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुरूप वित्तीय वर्ष 2026-27 (खरीफ 2026 एवं रबी 2026-27) में संपूर्ण प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना को लागू किए जाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई गई है।

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शिक्षा, श्रम और प्रशासनिक नियमों में सुधार

प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण विधायी फैसले लिए गए। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय के अनुपालन में 'उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम, 2004' में प्रथम संशोधन करने की मंजूरी दी गई। श्रम एवं सेवायोजन विभाग के अंतर्गत 'उत्तर प्रदेश मजदूरी संहिता नियमावली, 2026' के प्रख्यापन को स्वीकृति मिली, जबकि 'भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2020' को केंद्र सरकार से वापस लिए जाने पर सहमति बनी। इसके अतिरिक्त, राज्य संपत्ति विभाग लेखा संवर्ग (अराजपत्रित) सेवा नियमावली और भूतत्त्व एवं खनिकर्म (समूह ‘क’ एवं ‘ख’) सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली, 2026 को प्रख्यापित किया गया है। आबकारी विभाग के तहत 'उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2026' को विधान मंडल में पेश करने तथा यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण नीति-2017 के तहत मेसर्स आइक्यो सॉल्यूशंस प्रा. लि. को व्यावसायिक परिचालन तिथि में ढील देने की स्वीकृति दी गई।

वित्तीय अनुपूरक अनुदान और सीएजी ऑडिट रिपोर्ट

वित्तीय व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए कैबिनेट ने वित्तीय वर्ष 2026-2027 के अनुपूरक अनुदान तथा तत्संबंधी विनियोग विधेयक को अपनी मंजूरी प्रदान की। इसके साथ ही, भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक  द्वारा तैयार की गई वर्ष 2026 की विभिन्न लेखापरीक्षा रिपोर्टों—जिसमें राज्य वित्त, मनरेगा, जल जीवन मिशन, सिविल और राजस्व ऑडिट रिपोर्ट शामिल हैं—को राज्य विधान मंडल के समक्ष प्रस्तुत करने से पूर्व माननीय राज्यपाल महोदया की अनुमति प्राप्त करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।

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