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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: China and India account for the highest number of retracted TB research papers; BBAU study reveals 150 ret

UP: चीन-भारत में सबसे ज्यादा टीबी शोधपत्र वापस, BBAU अध्ययन में 150 रिट्रैक्टेड पेपर्स का खुलासा

Tue, 30 Jun 2026 03:34 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ
डिजिटल डेस्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Tue, 30 Jun 2026 03:34 PM IST
सार

बीबीएयू के वैज्ञानिकों ने 30 वर्षों में वापस लिए गए 150 टीबी शोधपत्रों का विश्लेषण कर वैज्ञानिक ईमानदारी पर सवाल उठाए हैं। अध्ययन में डेटा गड़बड़ी, अविश्वसनीय परिणाम और प्रकाशकीय जांच प्रमुख कारण मिले। चीन के बाद भारत दूसरे स्थान पर रहा। शोधकर्ताओं ने वैज्ञानिक नैतिकता और पारदर्शिता मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

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UP: China and India account for the highest number of retracted TB research papers; BBAU study reveals 150 ret
टीबी की समस्या। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के वैज्ञानिकों ने तपेदिक (टीबी) शोध में बढ़ती अनियमितताओं पर महत्वपूर्ण अध्ययन किया है। जैव प्रौद्योगिकी विभाग के डॉ. यूसुफ अख्तर और पुस्तकालय विज्ञान विभाग के डॉ. विनीत कुमार ने 1993 से 2023 के बीच वापस लिए गए (रिट्रैक्टेड) टीबी से जुड़े 150 शोधपत्रों का विश्लेषण किया। यह अध्ययन स्प्रिंगर नेचर की प्रतिष्ठित पत्रिका आर्काइव्स ऑफ माइक्रोबायोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। बीबीएयू के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने शोधकर्ताओं को उनकी उपलब्धि पर बधाई दी है।

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अध्ययन से पता चला कि 2010 के बाद टीबी शोधपत्रों की वापसी में तेजी आई। वर्ष 2021 और 2022 में सबसे अधिक 22-22 शोधपत्र वापस लिए गए। गलत वैज्ञानिक शोध इलाज, दवाओं के विकास और स्वास्थ्य नीतियों को प्रभावित करता है। वापस लिए गए 150 शोधपत्रों में 60 अलग-अलग कारण पाए गए। इनमें अविश्वसनीय परिणाम (32), डाटा में गड़बड़ी (31) और प्रकाशकों की जांच (29) प्रमुख थे।
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चौंकाने वाली बात यह है कि वापस लिए गए 143 शोधपत्रों में से 85.3 फीसदी को बाद में भी दूसरे शोधपत्रों में उद्धृत किया जाता रहा। डॉ. विनीत कुमार ने बताया कि हिंदावी, एल्सेवियर, स्प्रिंगर और टेलर एंड फ्रांसिस जैसे बड़े प्रकाशकों की पत्रिकाओं में भी ऐसे मामले मिले। प्लॉस वन में सबसे अधिक नौ टीबी शोधपत्र वापस लिए गए।

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चीन पहले स्थान पर

अध्ययन में चीन 64 रिट्रैक्टेड शोधपत्रों के साथ पहले स्थान पर रहा। भारत 22 शोधपत्रों के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके बाद अमेरिका (12), ईरान (11), पाकिस्तान और ब्रिटेन (नौ-नौ) का स्थान रहा। यह आंकड़ा वैश्विक शोध में वैज्ञानिक ईमानदारी के संकट को दर्शाता है।

भारत में शोधपत्रों की वापसी और सुधार के सुझाव

अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि वर्ष 2025 में भारत से कुल 887 शोधपत्र वापस लिए गए। यह चीन के बाद दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। वैश्विक शोध प्रकाशनों में भारत की हिस्सेदारी पांच फीसदी है, जबकि रिट्रैक्टेड शोधपत्रों में यह करीब 21 फीसदी है। 

अध्ययनकर्ताओं का सुझाव है कि केवल नई नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं होगा। युवा अध्ययनकर्ताओं को वैज्ञानिक नैतिकता का बेहतर प्रशिक्षण देना और शोध मूल्यांकन में पारदर्शिता बढ़ाना आवश्यक है।

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