UP: कोविड खत्म, लेकिन डीएनए अभी भी डैमेज, KGMU और IITR का चौंकाने वाला खुलासा; पुरुषों को ज्यादा खतरा
केजीएमयू और आईआईटीआर के संयुक्त अध्ययन में पता चला कि कोविड से ठीक होने के बाद भी शरीर में लंबे समय तक प्रभाव बने रह सकते हैं। शोध में डीएनए क्षति, कोशिकीय तनाव और एंटीऑक्सीडेंट स्तर में कमी देखी गई। 40 मरीजों पर हुए अध्ययन में पुरुषों में असर अधिक पाया गया। वैज्ञानिकों ने पोस्ट कोविड स्वास्थ्य निगरानी और उपचार की आवश्यकता बताई।
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कोविड संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों को पूरी तरह स्वस्थ मान लेना जल्दबाजी हो सकती है। यह शरीर में छिपे तौर पर नुकसान छोड़ जाता है। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) और भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) के वैज्ञानिकों के साझा अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया है कि कोविड संक्रमण खत्म होने के बाद भी शरीर के अंदर कुछ नुकसान लंबे समय तक बने रहते हैं।
ऐसे मरीजों के शरीर में कोशिकाओं पर दबाव बढ़ जाता है और डीएनए को भी नुकसान पहुंचता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि पोस्ट कोविड मरीजों में शरीर को नुकसान से बचाने वाले एंटीऑक्सीडेंट तत्व कम हो गए थे। दूसरी ओर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले तत्व अधिक मिले। इससे शरीर के ऊतकों और डीएनए पर असर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।
40 मरीजों और 40 स्वस्थ लोगों पर अध्ययन
अध्ययन में 40 ऐसे लोगों को शामिल किया गया जो कोविड से ठीक हो चुके थे। उनकी तुलना 40 स्वस्थ लोगों से की गई। जांच में पाया गया कि कोविड से उबर चुके लोगों के शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा क्षमता पहले जैसी मजबूत नहीं रह जाती। इससे शरीर की कोशिकाओं पर बुरा असर पड़ता है।
पुरुषों में हुआ ज्यादा असर
अध्ययन में यह भी सामने आया कि पुरुषों में यह समस्या महिलाओं की तुलना में अधिक देखी गई। सामान्य तौर पर बढ़ती उम्र के साथ शरीर कुछ हद तक ऐसे नुकसान की भरपाई कर लेता है, लेकिन कोविड से ठीक हुए लोगों में यह प्रक्रिया प्रभावित पाई गई।
फेफड़ों ही नहीं, डीएनए पर भी हो रहा असर
वैज्ञानिकों का कहना है कि पोस्ट कोविड समस्या केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर की कोशिकाओं और डीएनए तक पर असर डालती है। ऐसे में एंटीऑक्सीडेंट आधारित दवाएं और उपचार भविष्य में मरीजों की मदद कर सकते हैं। अध्ययन में प्रमुख रूप से डॉ. नंदिनी दीक्षित, डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी, डॉ. ज्योति बाजपेयी, डॉ. अजय वर्मा और अन्य वैज्ञानिक शामिल रहे।