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UP: माहवरी से अनजान हैं यूपी के स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राएं, 60 प्रतिशत के पास पहली बार नहीं होती जानकारी
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Tue, 21 Apr 2026 08:02 PM IST
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सार
Correct age of menstruation: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सर्वे के अनुसार, माहवारी शुरू होने के बाद लगभग 2.3% लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं। सुरक्षित सैनिटरी पैड अभी भी पूरी तरह से प्रयोग नहीं हो रहे हैं।
माहवारी को लेकर सेमिनार।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोमतीनगर स्थित होटल में माहवारी स्वच्छता प्रबंधन पर राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स के दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में किशोरियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सर्वे के अनुसार, माहवारी शुरू होने के बाद लगभग 2.3% लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं। इसके अलावा, करीब 27% महिलाएं सुरक्षित सैनिटरी पैड का उपयोग नहीं करतीं, जबकि 60% लड़कियां अपनी पहली माहवारी के बारे में पहले से अनजान रहती हैं। लगभग 54% लड़कियों को इस विषय में जानकारी उनकी मां से ही मिलती है।
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कार्यक्रम में माध्यमिक शिक्षा विभाग की संयुक्त निदेशक सांत्वना तिवारी ने बताया कि माहवारी के दौरान 40 से 50% लड़कियां स्कूल से अनुपस्थित रहती हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, माहवारी के कारण लड़कियों की सालाना लगभग 60 दिन की पढ़ाई प्रभावित होती है, जिससे उनका आत्मविश्वास भी कमजोर पड़ता है।
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समग्र शिक्षा और यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग की शिक्षिकाओं को छात्राओं में जागरूकता बढ़ाने, विद्यालयों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और माहवारी स्वच्छता प्रबंधन कॉर्नर विकसित करने की जानकारी दी गई। बड़ौत और सुल्तानपुर के कुछ विद्यालयों को मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों की आवश्यकता इसलिए पड़ती है क्योंकि समाज में अभी भी जागरूकता की कमी है। उन्होंने अभिभावकों, खासकर माताओं से अपील की कि वे अपनी बेटियों के साथ मित्रवत व्यवहार करें ताकि वे खुलकर अपनी समस्याएं साझा कर सकें।
2.3 % लड़कियां स्कूल छोड़ देती
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सर्वे के अनुसार माहवारी शुरू होने के बाद लगभग 2.3 % लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं। इतना ही नहीं लगभग 27 फीसदी महिलाएं सुरक्षित सैनेटरी पैड का प्रयोग नहीं कर रही हैं। 60 % लड़कियां अपनी पहली माहवारी के बारे में नहीं जानती हैं। लगभग 54 फीसदी लड़कियों के लिए उनकी मां ही इसके बारे में जानकारी का प्राथमिक स्रोत हैं।
यह जानकारी गोमतीनगर स्थित होटल में माहवारी स्वच्छता प्रबंधन पर राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स के दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में माध्यमिक शिक्षा विभाग की संयुक्त निदेशक सांत्वना तिवारी ने दी। उन्होंने बताया कि माहवारी के दौरान 40 से 50 फीसदी लड़कियां माहवारी के दौरान अनुपस्थित रहती हैं। इतना ही नहीं एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक माहवारी की वजह से लड़कियों की साल में 60 दिन की पढ़ाई प्रभावित होती हैं। इससे छात्राओं का आत्मविश्वास कमजोर होता है।
समग्र शिक्षा व यूनिसेफ की ओर से बेसिक, माध्यमिक शिक्षा विभाग व डायट की शिक्षिकाओं के लिए आयोजित दो दिन के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण में इस बारे में ज्यादा से ज्यादा छात्राओं को जागरूक करने, उनको विद्यालय में सुविधाएं देने, माहवारी स्वच्छता प्रबंधन कोना विकसित करने की जानकारी दी गई। बड़ौत व सुल्तानपुर के कुछ विद्यालय इसके मॉडल के रूप में भी प्रस्तुत किए गए।
कार्यक्रम में माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि पीएम को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा क्यों देना पड़ रहा है। क्योंकि हमारे अंदर यह भावना पूरी तरह से नहीं है। बेटियों के बिना समाज आगे नहीं बढ़ सकता है। स्कूल चलो अभियान तेजी से चल रहा है। इसमें छात्राओं पर फोकस किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आज जो समस्या सामने आई है, उसका क्या कारण है। क्योंकि मां अपने बच्चे को दोस्त, सहेली की तरह नहीं रख रही हैं। इसकी वजह से आपको ट्रेनिंग देनी पड़ रही है। सही जानकारी न होने से छात्राओं को गंभीर बीमारी हो जाती है। बेटियों के साथ ही अभिभावकों को भी स्कूल बुलाकर इसके बारे में शिक्षित करें। बेटियों से अनुशासन और मर्यादा में रहकर मित्रवत व्यवहार करें। तभी वे खुलकर अपनी बात रखेंगी।
माहवारी पर बेटियों की झिझक तोड़े
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने स्कूलों के शौचालय बेहतर करने के लिए कंपोजिट ग्रांट का प्रयोग करें। माहवारी पर बेटियों की झिझक तोड़े। एमएचएम कॉर्नर, शक्ति मंच आदि के माध्यम से उनको जानकारी दें। यूनिसेफ की प्रतिभा सिंह ने और किसी राज्य में इस पहल पर ज्यादा काम नहीं है। यूपी में बेहतर हो रहा है। कंपोजिट ग्रांट का प्रदेश में प्रतिशत बढ़ाना होगा। कार्यक्रम में अपर राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा विष्णुकांत पांडेय, सहायक निदेशक प्रतिमा सिंह, कुमार विक्रम आदि उपस्थित थे।

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