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Lucknow: अफवाहों से घबराहट में बढ़ी पेट्रोल-डीजल की खरीदारी, कंपनियों ने भी की सख्ती
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Thu, 23 Apr 2026 04:08 PM IST
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सार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद देश में दाम स्थिर हैं, जिससे तेल कंपनियों को प्रति लीटर करीब 18 रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है। चर्चा यह भी है कि चुनावों के बाद दाम बढ़ सकते हैं।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
लखनऊ शहर के कई पेट्रोल पंपों पर पिछले दिनों आपूर्ति बाधित होने से उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। ईरान युद्ध और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ने की आशंका ने पैनिक बाइंग (घबराहट में खरीदारी) 13 फीसदी बढ़ा दी है। हालांकि, जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे महज अफवाह करार दिया है, लेकिन तेल कंपनियों की सख्त निगरानी ने डीलरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
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सूत्रों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद देश में दाम स्थिर हैं, जिससे तेल कंपनियों को प्रति लीटर करीब 18 रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है। चर्चा यह भी है कि चुनावों के बाद दाम बढ़ सकते हैं। इसी के मद्देनजर कंपनियां ऑटोमेशन प्रणाली के जरिये स्टॉक पर कड़ी नजर रख रही हैं, ताकि कोई डीलर जमाखोरी न कर सके।
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पेट्रोल पंप डीलरों का कहना है कि कंपनियां तेल की खपत सीमित रखना चाहती हैं। आपूर्ति तभी दी जा रही है, जब टैंक पूरी तरह खाली होने के कगार पर हो। ऐसे में डिपो से पंप तक टैंकर पहुंचने में होने वाली देरी के कारण कुछ घंटों के लिए नो स्टॉक की स्थिति बन जाती है। एक पंप पर तेल खत्म होते ही दूसरे पंपों पर अचानक भीड़ बढ़ जाती है, जिससे व्यवस्था बिगड़ रही है। सोमवार और मंगलवार को शहर के कई इलाकों में यही स्थिति रही, हालांकि बुधवार को हालात में सुधार दिखा।
तेल समन्वयक, उत्तर प्रदेश संजय भंडारी का कहना है कि आपूर्ति में कोई बाधा नहीं है। पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। एक से 21 अप्रैल के बीच केवल पैनिक बाइंग से कुछ जगहों पर भीड़ बढ़ी है, जिसे नियंत्रित किया जा रहा है। वहीं, लखनऊ पेट्रोल पंप विक्रेता एसोसिएशन के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि कंपनियों की निगरानी बहुत सख्त है। कोई भी डीलर अतिरिक्त स्टॉक नहीं कर सकता है। सप्लाई उतनी ही मिल रही है, जितनी जरूरत है।

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