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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: High Court Delivers Major Verdict on Arbitrary Actions; Expresses Displeasure Over Bid Rejection; Entire T

UP: मनमानी पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बिड रिजेक्ट करने पर जताई नाराजगी; पूरी टेंडर प्रक्रिया रुकी

डिजिटल डेस्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Mon, 27 Apr 2026 02:44 PM IST
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सार

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने जरूरी दस्तावेज देने के बावजूद बिड खारिज किए जाने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इसे मनमाना और भेदभावपूर्ण मानते हुए पूरी टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगा दी। फिलहाल किसी भी पक्ष को कॉन्ट्रैक्ट देने पर रोक रहेगी। अगली सुनवाई 14 मई को होगी।

UP: High Court Delivers Major Verdict on Arbitrary Actions; Expresses Displeasure Over Bid Rejection; Entire T
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अहम आदेश में स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ता द्वारा जरूरी दस्तावेज देने के बावजूद बिड (बोली) खारिज किया जाना मनमाना और भेदभाव पूर्ण है। कोर्ट ने यह देखते हुए कि याचिकाकर्ता की बिड, जरूरी दस्तावेज देने के बावजूद खारिज कर दी गई, माना कि टेंडर देने वाले अधिकारी की फ़ैसला लेने की प्रक्रिया भेदभावपूर्ण है। इसलिए कोर्ट ने पूरी टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगा दी और प्रतिवादियों को फिलहाल टेंडर के तहत कोई भी कॉन्ट्रैक्ट देने से मना कर दिया है।

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न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने ने यह आदेश मेसर्स एसोसिएटेड जूट इंडस्ट्रीज की ओर से दाखिल याचिका पर दिया। इसमें याची की बिड को तकनीकी आधार पर खारिज किए जाने को चुनौती दी गई है।

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जरूरी दस्तावेजों के साथ अपनी बिड जमा की थी

दरअसल, उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम लिमिटेड ने अलग-अलग क्षमता वाले हाई डेंसिटी (एंटी-स्किड) पॉली एथिलीन बोरे (बिना लैमिनेशन वाले) और सर्कुलर लूम पर बुने हुए बैग की सप्लाई के लिए एक टेंडर का विज्ञापन निकाला था। याचिकाकर्ता ने जरूरी दस्तावेजों के साथ अपनी बिड जमा की थी। 

याचिकाकर्ता फर्म की ओर से दलील दी गई कि परचेज ऑर्डर और सर्टिफ़िकेट से यह पता चलता था कि याचिकाकर्ता द्वारा सप्लाई किए गए बैग उसी तरह के थे और याचिकाकर्ता के पास टेंडर को पूरा करने की तकनीकी विशेषज्ञता थी। 

फिर भी बिड को मनमाने आधारों पर खारिज कर दिया गया। इसे, इस आधार पर खारिज किया गया कि याचिकाकर्ता ने टेंडर की शर्तों के मुताबिक परचेज़ ऑर्डर और सफलतापूर्वक काम पूरा होने का सर्टिफिकेट अपलोड नहीं किया।

 

आवेदन को भी खारिज कर दिया गया

याची की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि परचेज ऑर्डर की कॉपियों के साथ याचिकाकर्ता के आवेदन को भी खारिज कर दिया गया और ठीक अगले ही दिन, जो कि रविवार था, फाइनेंशियल बिड खोली गई। कहा कि यह प्रक्रिया किसी एक पक्ष को फायदा पहुंचाने के लिए चलाई जा रही थी। 

कोर्ट ने कहा कि इस आधार पर बोली को खारिज करना कि उसने परचेज ऑर्डर और कंप्लीशन सर्टिफिकेट अपलोड नहीं किया था, मनमाना था। कोर्ट ने माना कि निर्णय लेने की प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण और मनमानी होने से से दूषित थी। 

अदालत ने पूरी टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह उन दो प्रतिभागियों को पक्षकार बनाए जिन्हें अलग-अलग साइज के बैग्स के लिए एल 1 घोषित किया गया। कोर्ट ने प्रतिवादी के वकील को यह निर्देश भी दिया कि वह इस संबंध में निर्देश प्राप्त करें कि क्या याचिकाकर्ता को इस चरण पर टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है। इस आदेश के साथ कोर्ट ने मामले को 14 मई को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

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