UP: राहुल गांधी का केस सुनने से हाईकोर्ट के जज ने मना किया, बोले- कोर्ट का राजनीति के लिए इस्तेमाल किया गया
राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के जज ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। जज ने कहा कि अदालत का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया। अब मामले की फाइल नई बेंच गठन के लिए मुख्य न्यायाधीश को भेजी गई है।
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने खुद को अलग कर लिया है। सोमवार को सुनवाई शुरू होते ही जज ने याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर की सोशल मीडिया पोस्टों का जिक्र किया और नाराजगी जताई।
कहा कि कोर्ट का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया। याचिकाकर्ता की सफाई सुनने से इनकार करते हुए कोर्ट ने मामले की फाइल चीफ जस्टिस के समक्ष नई बेंच गठन के लिए भेजने का आदेश दिया।
पहले FIR आदेश, फिर नोटिस जरूरी मानकर फैसला बदला
17 अप्रैल की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने याचिकाकर्ता तथा केंद्र और राज्य सरकार के वकीलों से पूछा था कि क्या राहुल गांधी को नोटिस जारी करना जरूरी है। वकीलों ने इसकी जरूरत नहीं बताई, जिसके बाद एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया था।
बाद में पुराने मामलों का अध्ययन करने पर अदालत ने पाया कि ऐसे प्रकरणों में नोटिस जरूरी है। 18 अप्रैल को कोर्ट ने अपना पूर्व आदेश बदलते हुए कहा कि राहुल गांधी को नोटिस दिए बिना फैसला उचित नहीं होगा।

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