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यूपी: जातीय रैलियों पर रोक को लेकर हाईकोर्ट सुना सकता है आज अहम फैसला, केंद्र-राज्य ने दाखिल किया जवाब

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Mon, 19 Jan 2026 11:01 AM IST
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सार

Caste rallies in UP: यूपी में जाति के नाम पर होने वाली रैलियों को लेकर लखनऊ हाईकोर्ट आज अहम फैसला सुना सकता है। इस मामले में राज्य सरकार अपना जवाब दे चुकी है। 

UP: High Court likely to pronounce crucial verdict today on ban on caste rallies; Centre and state file respon
हाईकोर्ट लखनऊ खंडपीठ
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विस्तार
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हाईकोर्ट की लखनउ पीठ में जातीय रैलियों पर रोक के मामले में सोमवार को सुनवाई होगी। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ के समक्ष स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की वर्ष 2013 में दाखिल जनहित याचिका 19 जनवरी को सूचीबद्ध है।मामले की पिछली सुनवाई पर राज्य सरकार ने जवाब दाखिल कर कहा था कि जातीय रैलियों को रोकने समेत अपराधिक मामलों में लोगों की जाति न लिखे जाने का आदेश जारी किया गया है। जिसके तहत पुलिस महानिदेशक ने सर्कुलर भी जारी कर दिया है।मामले में केंद्र सरकार ने भी अपना जवाब दाखिल कर दिया है। कोर्ट ने केंद्र के जवाब पर याची को प्रतिउत्तर दाखिल करने का समय दिया था।

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पहले, इस मामले में कोर्ट ने प्रदेश में जातीय रैलियों पर रोक का अंतरिम आदेश जारी करके, पक्षकारों केंद्र व राज्य सरकार समेत केंद्रीय निर्वाचन आयोग एवं चार राजनीतिक दलों कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से जवाब मांगा था।

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हाईकोर्ट में सरकारी वकीलों की तैनाती मामले की सुनवाई आज

इलाहाबाद उच्च न्यायालय और लखनऊ पीठ में सरकारी वकीलों की तैनाती प्रक्रिया को चुनौती मामले की सुनवाई सोमवार को होगी। न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ के समक्ष मामले में दाखिल चार जनहित याचिकाएं, 19 जनवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं।इस मामले में हाईकोर्ट में सरकारी वकीलों की तैनाती में पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने का आग्रह किया गया है। साथ ही सरकारी वकीलों की तैनाती के 1975 के एल आर मैनुअल में भी संशोधन करने की गुजारिश भी की गई है। मामले में वर्ष 2017 में दाखिल महेंद्र सिंह पवार की जनहित याचिका समेत चार जनहित याचिकाओं में हाईकोर्ट में सरकारी वकीलों की तैनाती प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय और लखनऊ पीठ में दो हजार से अधिक सरकारी वकील तैनात हैं।

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