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यूपी: प्राइमरी टीचरों के ट्रांसफर में हाईकोर्ट की दो टूक, कहा- पसंद का स्कूल मांगना शिक्षक का अधिकार नहीं
Sun, 16 Aug 2026 10:05 AM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Sun, 16 Aug 2026 10:05 AM IST
सार
Primary Teachers in UP: हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि तबादलों के लिए पीटीआर का उद्देश्य केवल यह निर्धारित करना है कि किन जिलों में शिक्षकों को भेजा जा सकता है।
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प्राथमिक शिक्षकों के ट्रांसफर की प्रक्रिया।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के आदेश से प्राथमिक शिक्षकों की अंतरजनपदीय तबादला नीति का रास्ता साफ हो गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक अपनी पसंद के किसी विशेष स्कूल में तैनाती का दावा नहीं कर सकते। न्यायालय ने कहा कि तबादला नीति के तहत शिक्षक के आवेदन पर जिले के स्तर पर विचार किया जाएगा, किसी खास विद्यालय में नियुक्ति का अधिकार नहीं है।
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न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने यह आदेश ऋषी कटियार सहित तीन शिक्षकों की याचिकाएं खारिज करते हुए पारित किया। इन याचिकाओं में 22 जून 2026 के शासनादेश के तहत तबादलों के लिए निर्धारित जिलेवार छात्र-शिक्षक अनुपात (पीटीआर) को चुनौती दी गई थी।
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याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अनुसार, पीटीआर का निर्धारण विद्यालय और कक्षा के आधार पर होना चाहिए। उनका यह भी कहना था कि जिलेवार पीटीआर तय होने से शिक्षकों को यह स्पष्ट नहीं हो पाएगा कि उन्हें तबादले के लिए किस स्थान पर आवेदन करना चाहिए।
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न्यायालय ने इन दलीलों को अस्वीकार कर दिया। पीठ ने कहा कि आरटीई के तहत विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या निर्धारित करने वाला पीटीआर और तबादलों के लिए सरकार द्वारा तैयार जिलेवार पीटीआर के उद्देश्य अलग-अलग हैं। तबादलों के लिए पीटीआर का उद्देश्य केवल यह निर्धारित करना है कि किन जिलों में शिक्षकों को भेजा जा सकता है। इससे विद्यालयों में आरटीई के अनुसार शिक्षक-छात्र अनुपात बनाए रखने की व्यवस्था प्रभावित नहीं होती।
चार जून 2026 की तबादला नीति में विशेष परिस्थितियों में अंतरजनपदीय तबादलों का प्रावधान है। इसमें उन पति-पत्नी के मामलों को भी शामिल किया गया है, जो दोनों बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक हैं और अलग-अलग जिलों में तैनात हैं। कम पीटीआर वाले जिलों में ऐसे आवेदनों पर विचार किया जा सकता है।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षकों को तबादले का कोई स्वतः प्राप्त वैधानिक अधिकार नहीं है। तबादले का अवसर राज्य सरकार की नीति के तहत ही मिलता है। इसलिए, नीति में जिले के स्तर पर आवेदन पर विचार का प्रावधान होने के बावजूद, शिक्षक किसी खास विद्यालय में नियुक्ति की मांग नहीं कर सकते।