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UP : हरदोई में मानकों की अनदेखी कर पंजीकृत हो रहीं बसें, दे रहीं हादसों को दावत, प्रति बस 50 हजार की उगाही

नीरज 'अम्बुज', अमर उजाला, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Tue, 28 Apr 2026 12:03 PM IST
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सार

दलालों की अफसरों से सांठगांठ में नई बसों की बॅाडी, इमरजेंसी गेट और सिटिंग में गड़बड़ी है। इसके बावजूद अफसरों ने पंजीकरण कर दिया है।

UP News: Buses being registered in Hardoi without following norms are leading to accidents.
आरटीओ। - फोटो : amar ujala
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विस्तार

केस 1: रजिया हाशमी हरदोई में मुन्ने मियां चैाराहा खजांची टोला निवासी हैं। उन्होंने टाटा मोटर्स से नई बस यूपी 30 ईटी 4037 खरीदी। जिसकी बॅाडी बनवाई गई, जो मानकों के विपरीत थी। बस की बॅाडी बड़ी थी। सिटिंग व इमरजेंसी गेट में भी गड़बड़ी थी। लेकिन दलालों से सांठगांठ कर अफसरों से बस का पंजीकरण कर दिया। बस सवारियां ढो रही है, जिससे कभी भी हादसे हो सकते हैं।

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केस 2: बसुधा हरदोई में हरदेवगंज की रहने वाली हैं। उन्होंने अशोक लीलैंड की नई बस यूपी 30 ईटी 4066 खरीदी। उन्होंने भी बॅाडी बनवाई और दलालों से बस का पंजीकरण एआरटीओ हरदोई में करवा दिया। सूत्र बताते हैं कि बस की बॅाडी, फ्लोर, सीटों, गेट आदि मानकों पर फिट नहीं थीं। लेकिन दलालों ने पंजीकरण करवा दिया।
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हरदोई में मानकों के विपरीत ऐसे ही बसों के पंजीकरण खुलेआम किए जा रहे हैं। दलालों से मिलीभगत कर अफसर बसों को रजिस्टर कर हैं, जो सड़कों पर फर्राटा भर रही हैं। ऐसी बसें कभी भी सड़क हादसे की वजहें बन सकती हैं।

मोहनलालगंज में दिल्ली से बिहार जा रही बस में आग लग गई थी और पांच यात्रियों की जलकर दर्दनाक मैात हो गई थी। हाल ही में गोसाईंगंज में हुए बस हादसे में भी मुसाफिरों को चोटें आई थीं। ऐसे तमाम बस हादसे हैं। इन बस हादसों की पड़ताल पर फिटनेस सवालों के घेरे में आई थी।

रिपोर्टों में यह बात उजागर हुई कि बसों की फिटनेस व बॅाडी में मानकों की अनदेखी की गई। सिटिंग से छेड़छाड़ हुई और इमरजेंसी गेट तक नहीं थे। परिवहन विभाग के अफसर इन हादसों से भी सबक नहीं ले रहे हैं। हरदोई में खुलेआम बसों का पंजीकरण मानकों की अनदेखी कर हो रहा है। उपरोक्त मामले इसकी बानगीभर हैं। हरदोई लखनऊ संभाग में आता है। ऐसे में लखनऊ में बैठे संभाग व मुख्यालय के अफसर भी अनफिट बसों के पंजीकरण के लिए जिम्मेदार हैं।

50 हजार रुपये प्रति बस उगाही कर अफसरों तक पहुंचाए गए

सूत्र बताते हैं कि उपरोक्त बसें मानकों के विपरीत थीं। लिहाजा उनका पंजीकरण करने में काफी समय तक टालमटोली की जाती रही। इसके बाद जब दलालों ने एंट्री ली और अफसरों से सांठगांठ की, जिसके बाद पंजीकरण हो सका। 50 हजार रुपये प्रति बस उगाही कर अफसरों तक पहुंचाए गए।

इन मानकों की होती है जांच
- उत्सर्जन की जांच होती है। ताकि प्रदूषण जांचा जा सके।
- बस बॅाडी व डायमेंशन में लंबाई, चैाड़ाई, ऊंचाई चेक होती है।
- टायर के केंद्र से बस के अगले व पिछले हिस्से की दूरी नियमानुसार हो।
- आपातकालीन निकास, दरवाजे व खिड़कियों पर इमजरेंसी एग्जिट लिखा हो।
- स्पीड गवर्नर चेक होता है। स्पीड लिमिट डिवाइस सील है या नहीं।
- पैनिक बटन व व्हीकल लोकेशन सिस्टम।
-आंतरिक बनावट में सीटों की क्षमता परमिट के अनुसार होनी चाहिए। सीटों के बीच जगह पर्याप्त होनी चाहिए।
-अग्निशमन यंत्र कम से कम दो हो, सही जगह पर लगे होने चाहिए।
-रिफ्लेक्टिव टेप लगे हों, वायरिंग छिपी हुई होनी चाहिए।
-लाइट, इंडिकेटर, ब्रेकलाइट व बस के अंदर की लाइटें।

लखनऊ संभाग के आरटीओ प्रशासन संजय तिवारी का कहना है कि नई बसों के पंजीकरण के लिए मानकों की जांच की जाती है। इन मामलों की जांच करवाई जाएगी। मानक विपरीत पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। साथ ही बसों का पंजीकरण भी निरस्त किया जाएगा।

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