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यूपी: प्रदेश में हो सकता है बड़ा बिजली संकट, तकनीकी वजहों से कई इकाइयों में उत्पादन ठप; 21 जून से मिलेगी राहत

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Fri, 19 Jun 2026 10:16 PM IST
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सार

Power supply in UP: यूपी में आने वाले दो दिनों में बड़ा बिजली संकट आ सकता है। प्रदेश में तकनीकी वजहों से कई इकाइयों में बिजली उत्पादन ठप हो गया है। 

UP: State may face major power crisis, production halted at many units due to technical reasons; relief to be
यूपी में आ सकता है बिजली संकट।
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विस्तार

 प्रदेश में तकनीकी गड़बडी से कई बिजली उत्पादन इकाइयां ठप हो गई हैं। इससे उत्तर प्रदेश के हिस्से की करीब चार हजार मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुई है। इन इकाइयों को ठीक करने के लिए टीमें लगी हैं। उम्मीद है कि 21 जून तक सभी इकाइयां फिर से उत्पादन करने लगेंगी।



प्रदेश में इन दिनों अधिकतम बिजली की मांग करीब 30 से 31 हजार मेगावाट के बीच बनी हुई है। अधिकतम मांग बढ़ने के साथ ही न्यूनतम मांग में भी इजाफा हुआ है। सप्ताहभर पहले जहां न्यूनतम मांग 15 हजार मेगावाट थी, वह बढ़कर अब 22 हजार मेगावाट से अधिक हो गई है। इस बीच 18 जून की शाम सिंगरौली क्षेत्र की दोनों उच्च वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों में अर्थ फॉल्ट आ गया। इससे ट्रिपिंग हुई और एनटीपीसी की रिहंद तापीय विद्युत स्टेशन की तीनों इकाइयों से करीब तीन हजार मेगावाट बिजली उत्पादन ठप हो गया। 
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इसमें करीब 960 मेगावाट विद्युत हिस्सा उत्तर प्रदेश का था। इसी तरह कई इकायां तकनीकी कारणों से ठप हो गई हैं। इसमें केंद्रीय सेक्टर की ज्वाइंट वैचर की घाटमपुर यूनिट-2 से 660 मेगावाट खुर्जा यूनिट 2 से 660 मेगावाट, ललितपुर तापीय परियोजना यूनिट-3 से 660 मेगावाट, अनपरा-सी यूनिट-1 से 600 मेगावाट, रोजा यूनिट-1 से 300 मेगावाट सहित कुल करीब 3041 मेगावाट का उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसी तरह राज्य विद्युत उत्पादन निगम की ओबरा-सी यूनिट-2 एवं हरदुआगंज-डी यूनिट-9 भी तकनीकी कारणों से प्रभावित रही, लेकिन देर शाम तक उन्हें चालू कर दिया गया है। पावर कार्पोरेशन के प्रवक्ता ने बताया कि तकनीकी कारणों से प्रभावित होने वाली उत्पादन इकाइयों में टीमें लगी हैं। विद्युत मांग को पूरा करने में चुनौतियां जरूर आई हैं, लेकिन पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा विद्युत उपलब्धता बनाए रखने में तत्पर है। विभिन्न स्त्रोतों से अतिरिक्त विद्युत व्यवस्था का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। विद्युत व्यवस्था की सतत निगरानी की जा रही है।

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ईंधन अधिभार शुल्क वसूली पर तत्काल लगे रोक

 उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने उत्तर प्रदेश विद्युत विनियामक आयोग में प्रस्ताव दाखिल कर ईंधन अधिभार वसूली पर रोक लगाने की मांग की। दाखिल प्रस्ताव में बताया कि ईंधन और बिजली खरीद लागत समायोजन प्रकरण में उपभोक्ताओं से 10 फीसदी ईंधन अधिभार शुल्क वसूला जा रहा है। आयोग ने पावर कार्पोरेशन को दोबारा 19 जून तक अपना पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। कार्पोरेशन ने अपने जवाब में कहा है कि दिल्ली सहित कई अन्य राज्यों में एफपीपीसीए की गणना इसी प्रकार की जाती है। 

इसलिए उत्तर प्रदेश में अपनाई गई प्रक्रिया को भी उचित माना जाना चाहिए। कार्पोरेशन ने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग का अंतिम निर्णय उसे स्वीकार्य होगा। उपभोक्ता परिषद का तर्क है कि अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का हवाला देकर उत्तर प्रदेश के लागू विनियमों का उल्लंघन सही नहीं ठहराया जा सकता। परिषद ने जोर दिया कि जब आयोग स्वयं कार्रवाई को नियमों के विपरीत मान चुका है, तो उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। परिषद ने आयोग से कार्पोरेशन की विवादित कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने का आदेश जारी करने का आग्रह किया है। परिषद ने उन उपभोक्ताओं के पैसे वापस करने या जुलाई के बिल में समायोजित करने की मांग की है जिनसे 10 फीसदी ईंधन अधिभार शुल्क वसूला गया है। यह कदम उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए आवश्यक अंतरिम राहत के तौर पर देखा जा रहा है।

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