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UP: हर मंडल की एक सड़क का होगा औचक निरीक्षण, गुणवत्ता पर शासन की पैनी नजर, लापरवाही पर नपेंगे इंजीनियर
Mon, 13 Jul 2026 08:39 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Mon, 13 Jul 2026 08:39 AM IST
सार
उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, सड़कों की जांच पूरी तरह निष्पक्ष और औचक हो, इसके लिए शासन स्तर पर तैयारी की जा रही है। यूपीपीडब्ल्यूडी की तकनीकी विंग और गुणवत्ता नियंत्रण की टीमों को इस काम में लगाया गया है।
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में सड़कों के निर्माण और उनकी गुणवत्ता को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीरो टॉलरेंस विजन के तहत शासन ने एक बड़ा फैसला किया है। प्रदेश की सड़कों की हकीकत जानने और गुणवत्ता परखने के लिए अब शासन स्तर से सीधे हर मंडल की एक प्रमुख सड़क का औचक निरीक्षण किया जाएगा।
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इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि धरातल पर सड़कों का निर्माण और मरम्मत कार्य मानकों के अनुरूप हो रहा है या नहीं। यदि किसी भी मंडल में सड़क की क्वालिटी खराब पाई गई, तो संबंधित ठेकेदार और विभागीय अभियंताओं के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सुल्तानपुर में सड़क की गुणवत्ता खराब पाए जाने पर अधिशासी अभियंता को निलंबित करके इस अभियान की शुरुआत की जा चुकी है। वहां ठेकेदार को सड़क दुबारा बनाने के निर्देश भी दिए गए है। शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार इस औचक जांच के पीछे की मंशा पूरे प्रदेश के लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों को क्वालिटी को लेकर कड़ा संदेश देना है। एक सड़क पर होने वाली कड़ी कार्रवाई से उस मंडल के सभी जिलों और पूरे उत्तर प्रदेश के अभियंताओं को यह समझ आ जाएगा कि गुणवत्ता के मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, सड़कों की जांच पूरी तरह निष्पक्ष और औचक हो, इसके लिए शासन स्तर पर तैयारी की जा रही है। यूपीपीडब्ल्यूडी की तकनीकी विंग और गुणवत्ता नियंत्रण की टीमों को इस काम में लगाया गया है।
जांच में हर मंडल से किसी भी एक महत्वपूर्ण जिला मार्ग, राज्य मार्ग या अन्य किसी मुख्य मार्ग को शामिल किया जा सकता है। टीम मौके पर जाकर सड़क की मोटाई और इस्तेमाल की सामग्री (तारकोल, गिट्टी आदि) की गुणवत्ता की जांच करेगी। विभाग की आंतरिक सूचना प्रणालियों और डेली न्यूज प्रविष्टियों के माध्यम से भी कार्यों की प्रगति की निगरानी की जा रही है।
एफआईआर और रिकवरी : शासन ने साफ कर दिया है कि केवल कागजी कार्रवाई या चेतावनी देकर कोरम पूरा नहीं किया जाएगा। अगर जांच में सड़क तय मानकों से खराब मिली, तो न केवल संबंधित फर्म व ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा, बल्कि जिम्मेदार अभियंताओं के खिलाफ विभागीय जांच के साथ-साथ वित्तीय नुकसान की रिकवरी और जरूरत होने पर एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है।