यूपी: प्रदेश में बढ़ा स्वाइन फ्लू का दायरा, राजधानी में मिले चार नए मरीजों से अलर्ट; तय नहीं हुईं जांच की दर
Swine flu in UP: प्रदेश में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ते जा रहे हैं। सोमवार को राजधानी लखनऊ में चार नए केस मिलने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।
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सीएमओ डॉ. एनबी सिंह के मुताबिक चार नए मरीजों में से तीन पुरुष हैं। सभी की हालत ठीक है। कोई विशेष चिंता की बात नहीं है। लखनऊ के सभी जिला स्तरीय अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए बेड रिजर्व हैं। दवाओं का भी पर्याप्त स्टॉक है। संक्रमितों के इलाज के लिए टीम भी लगाई गई है।
महिला की मौत के बाद बढ़ी चिंता
बीते दिनों स्वाइन फ्लू से 50 वर्षीय महिला की मौत हुई थी। इंदिरानगर निवासी महिला को सर्दी-जुकाम, तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी के बाद 25 अगस्त को बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी जान चली गई। बाद में परिजनों ने अस्पताल को निजी पैथोलॉजी की स्वाइन फ्लू पॉजिटिव रिपोर्ट दिखाई। इसके बाद महिला के संपर्क में आए डॉक्टरों, कर्मचारियों और मरीजों के सैंपल केजीएमयू भेजे गए। हालांकि, अभी तक इनकी रिपोर्ट नहीं आई है।
निजी लैब में स्वाइन फ्लू जांच की दर तय नहीं कर पाए सीएमओ
स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों को जांच के लिए निजी पैथोलॉजी सेंटरों मनमानी पर उतारू हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अब तक निजी पैथोलॉजी सेंटरों में स्वाइन फ्लू जांच की कीमत तय नहीं की है। इसका फायदा उठाकर अलग-अलग सेंटर मरीजों से आरटीपीसीआर जांच के नाम पर पांच से छह हजार रुपये तक वसूल रहे हैं। घर से नमूना लेने की सुविधा लेने पर अतिरिक्त शुल्क देने पड़ रहे हैं। आरोप है स्वाइन फ्लू का ग्राफ न बढ़े इसलिए अभी तक निजी केंद्रों की जांच दर तय नहीं की जा रही है।
राजधानी में स्वाइन फ्लू से एक महिला मरीज की जान जा चुकी है। करीब 20 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। स्वाइन फ्लू के लक्षण सामने आने पर कई मरीज बीमारी की पुष्टि के लिए निजी केंद्रों का रुख कर रहे हैं। लेकिन जांच की दर तय न होने के कारण उन्हें पहले ही यह स्पष्ट नहीं होता कि जांच में कितना खर्च आएगा? एक ही जांच के लिए विभिन्न पैथोलॉजी सेंटरों पर अलग शुल्क लिया जा रहा है। मरीजों का कहना है कि स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच जांच की दर स्पष्ट नहीं होने से आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से निजी केंद्रों के लिए जांच शुल्क तय होने से मरीजों को राहत मिल सकती है। मनमानी वसूली पर भी रोक लग सकेगी।
सरकारी में आसान नहीं जांच
सरकारी अस्पतालों में स्वाइन फ्लू की जांच की व्यवस्था भी सभी संदिग्ध मरीजों के लिए आसान नहीं है। यहां मरीजों को बीमारी की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में रखा गया है। निर्धारित कैटेगरी में आने वाले मरीजों की ही जांच कराई जा रही है। इससे हल्के लक्षण वाले संदिग्ध मरीजों को जांच के लिए निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं निजी केंद्र पर जांच का शुल्क अधिक होने से सामान्य मरीज जांच कराने से बच रहे हैं।