यूपी: ऊर्जा मंत्री और बिजली कर्मियों में खिंची तलवारें, मंत्री बोले- उनके नाम की सुपारी ले चुके हैं कर्मचारी
UP Energy Minister: यूपी में चल रहे बिजली संकट के बीच ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कहा कि उनकी सुपारी लेने वालों में विद्युत कर्मचारी के वेश में कुछ अराजक तत्व भी हैं।
विस्तार
प्रदेश में ऊर्जा विभाग का पारा चढ़ा हुआ है। ऊर्जा मंत्री और कार्मिकों के बीच तलवारें खिंच गई हैं। दोनों एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। ऊर्जा मंत्री ने सोमवार को एक्स पर लिखा है कि उनकी सुपारी लेने वाले विद्युत कर्मचारी के वेश में कुछ अराजक तत्व हैं। एक संगठन ने भी ऊर्जा मंत्री का समर्थन किया है। दूसरी तरफ कार्मिक ऊर्जा मंत्री को छोड़कर मुख्यमंत्री में आस्था जता रहे हैं। इसे प्रदेश के सियासी नजरिए से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
कर्मचारी के वेश में हैं अराजक तत्व- शर्मा
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा की ओर से जारी बयान में सोमवार को कहा कि उनकी सुपारी लेने वालों में विद्युत कर्मचारी के वेश में कुछ अराजक तत्व भी हैं। कुछ विद्युत कर्मचारी नेता इसलिए परेशान हैं, क्योंकि वह उनके सामने झुकते नहीं हैं। ऐसे लोग विभाग को बदनाम कर रहे हैं।
पहले ऊर्जा मंत्री के कार्यालय से एक्स पर पोस्ट डाला गया और फिर उनका बयान जारी हुआ। इसमें कहा गया कि ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने ये तीन वर्ष में चार बार हड़ताल कर चुके हैं। बाहर से प्रेरित हड़ताल पर हाईकोर्ट भी हस्तक्षेप कर चुका है। उन्होंने यह भी सवाल किया है कि आखिर अन्य विभागों में हड़ताल क्यों नहीं हो रही? ये लोग ऊर्जा मंत्री के सरकारी आवास पर अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं। उन्होंने चार सवाल भी पूछे हैं। इसमें लिखा कि जब 2010 में टोरेंट कंपनी आगरा में निजीकरण कर रही थी तो कर्मचारी नेता हवाई जहाज से विदेश पर्यटन कर चले गए थे।
तब निजीकरण का विरोध क्यों नहीं किया? दूसरा सवाल यह है कि निजीकरण सिर्फ एके शर्मा नहीं कर सकते हैं। जब एक जूनियर इंजीनियर तक का ट्रांसफ़र ऊर्जा मंत्री नहीं करता तो निजीकरण का फैसला कैसे ले सकते हैं? सभी लोग जानते हैं कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी टास्क फोर्स के तहत ही निजीकरण की कार्यवाही चल रही है। यह भी लिखा गया है कि निजीकरण का शासनादेश राज्य सरकार की उच्चस्तरीय अनुमति से ही हुआ है। ऐसा लगता है कि ऊर्जा मंत्री से जलने वाले सभी लोग एक साथ हैं,लेकिन ईश्वर और जनता ऊर्जा मंत्री के साथ है। इसी क्रम में विद्युत संविदा कर्मचारी महासंघ ने भी बयान जारी कर ऊर्जा मंत्री का समर्थन किया है और संघर्ष समिति पर राजनीति से प्रेरित होने का आरोप लगाया है।
सभी विधायकों को बताएंगे निजीकरण का घोटाला- संघर्ष समिति
विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति ने सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सर्वाधिक समय से मुख्यमंत्री रहने के लिए बधाई दी। ऊर्जा विभाग अपने पास रखने और निजीकरण प्रस्ताव रद्द करने की बात दोहराई। यह भी कहा कि मानसून सत्र शुरू होने पर निजीकरण के नाम पर किए गए घोटाले से हर विधायक को अवगत कराया जाएगा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने क हा कि ऊर्जा मंत्री का सोशल मीडिया पर आया बयान पूरी तरह से निराधार और भ्रामक है। बिजली कर्मी कभी अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करते। विदेश यात्रा को टोरेंट के निजीकरण को जोड़ना भी भ्रम फैलाने वाला कदम है।
निजीकरण प्रक्रिया की सीबीआई जांच हो- परिषद
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने मुख्मयंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे मामले में हस्तक्षेप करने और सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि निजीकरण का पूरा मसौदा असंवैधानिक तरीके से तैयार किया गया है। इसे तैयार करने वाली एडवाइजर कंपनी की नियुक्ति भी गलत तरीके से हुए हैं। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के कार्यालय ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में भी कहा गया है कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एनर्जी टास्क फोर्स ने निजीकरण के संबंध में फैसला लिया है। ऐसे में प्रकरण की सीबीआई जांच जरूरी है।

कमेंट
कमेंट X