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यूपी: जनता को सीधे लाभ देंगे योगी सरकार के ये फैसले, किसानों को खुश करने के साथ होगा छोटे शहरों का विकास भी

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 24 Mar 2026 07:40 AM IST
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सार

Support price of wheat: यूपी सरकार की कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले हुए। इन फैसलों में सरकार ने जनता को सीधे राहत या तोहफा देने की कोशिश की। 

UP: These decisions of the Yogi government will directly benefit the public, along with making farmers happy,
योगी कैबिनेट के बड़े फैसले। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

 वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। केंद्र सरकार ने गत वर्ष की तुलना में 160 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। प्रदेश में रामनवमी के बाद 30 मार्च से गेहूं खरीद शुरू होगी, जो 15 जून तक चलेगी। इससे संबंधित प्रस्ताव को सोमवार को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई।

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कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि प्रदेश में खाद्य विभाग की विपणन शाखा सहित कुल 8 एजेंसियां खरीद करेंगी। कुल 6500 क्रय केंद्र स्थापित होंगे। क्रय केंद्र सुबह 9 से शाम 6 बजे तक खुले रहेंगे। क्रय केंद्रों पर किसानों के लिए छाया, पानी व बैठने समेत सभी व्यवस्थाएं पूरी कराने के निर्देश दे दिए गए हैं।
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शाही ने बताया कि उतराई, छनाई व सफाई के लिए किसानों को 20 रुपये प्रति क्विंटल अलग से दिया जाएगा। खाद्य व रसद विभाग ने 30 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा था, लेकिन मुख्यमंत्री ने इसे बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन किए जाने का निर्देश दिया है। 48 घंटे के भीतर किसानों को भुगतान के भी निर्देश दिए हैं। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। खाद्य व रसद विभाग के मुताबिक गेहूं की बिक्री के लिए सोमवार दोपहर दो बजे तक 195628 किसानों ने पंजीकरण करा लिया है।

नवयुग पालिका योजना 58 शहरों को बनाएगी स्मार्ट

UP: These decisions of the Yogi government will directly benefit the public, along with making farmers happy,
योगी कैबिनेट का फैसला। - फोटो : अमर उजाला
 प्रदेश में नगर निगमों की तर्ज पर छोटे जिला मुख्यालय वाले 58 नगर निकायों को भी स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसके लिए सरकार नवयुग पालिका योजना लागू करने जा रही है। इससे संबंधित नगर विकास विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी गई है। इस योजना के तहत गौतमबुद्ध नगर के दादरी समेत कुल 55 नगर पालिका परिषद और तीन नगर पंचायतें शामिल हैं। इसमें अवध क्षेत्र के लखनऊ और अयोध्या को छोड़कर नगर पालिका परिषद वाले सभी जिला मुख्यालय भी हैं। इन निकायों के विकास पर पांच साल में 2916 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

योजना के तहत निकायों के विकास पर सालाना 583.20 करोड़ रुपये खर्च कर शहरी सुविधाओं से संबंधित विकास के काम होंगे। योजना में खर्च होने वाली पूरी राशि राज्य सरकार वहन करेगी। सरकार के इस फैसले से जहां स्मार्ट सॉल्यूशन्स से डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा मिलेगा, वहीं क्षेत्रीय असमानताएं भी दूर होंगी। जिला मुख्यालयों पर बुनियादी सुविधाएं दुरुस्त होने से आर्थिक विकास और जीवन की गुणवत्ता में सुधार पूरे प्रदेश में समान रूप से विस्तारित होगा। लोगों को स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित वातावरण और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं मिल सकेंगी। प्रस्ताव के मुताबिक वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक पांच वर्षों में इन शहरों को स्मार्ट बनाया जाएगा। जिला स्तर पर गठित समिति के माध्यम से कामों का चयन होगा। इसके बाद राज्य स्तरीय तकनीकी समिति के परीक्षण के बाद सक्षम स्तर से परियोजनाओं का अनुमोदन होगा।

जनसंख्या के आधार पर निकायों की बनेेंगी दो श्रेणियां
नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने बताया कि नवयुग पालिका योजना के तहत उत्सव भवन, ऑडिटोरियम, प्रदर्शनी केंद्र, पार्कों का विकास तथा बिजली व्यवस्था के आधुनिकीकरण जैसे काम होंगे। निकायों को उनकी जनसंख्या के आधार पर दो श्रेणियों (डेढ़ लाख से अधिक और डेढ़ लाख से कम आबादी) में बांटा गया है, ताकि उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जा सके।

 

अयोध्या-रायबरेली समेत पांच शहरों में होगा 3540 करोड़ का निवेश, प्रस्तावों को मिली मंजूरी

 कैबिनेट की सोमवार को हुई बैठक में अयोध्या, गोरखपुर, रायबरेली, फतेहपुर और मिर्जापुर में सुपर मेगा श्रेणी की पांच औद्योगिक इकाइयों की स्थापना का रास्ता साफ हो गया। इसके लिए 3540 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। जल्द ही सभी कंपनियों को लेटर ऑफ कम्फर्ट भी जारी किया जाएगा। साथ ही सीतापुर में स्थापित रेडिको खेतान लिमिटेड को पूंजीगत सब्सिडी के रूप में प्रस्तावित 6.88 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव भी मंजूर हो गया।

औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने बताया कि कैबिनेट ने पक्का लिमिटेड को अयोध्या में 676.26 करोड़ रुपये, गोरखपुर में गैलेंट इस्पात लिमिटेड को 765.11 करोड़ रुपये, रायबरेली में रिलायंस सीमेंट को 550.31 करोड़, फतेहपुर में डालमिया भारत ग्रीन विजन लिमिटेड को 776.35 करोड़ और मिर्जापुर में डालमिया भारत ग्रीचे विजन को 772.26 करोड़ रुपये की लागत से औद्योगिक इकाई स्थापित करने की मंजूरी दी है। नंदी ने कहा कि प्रत्येक निवेश प्रस्ताव को धरातल पर उतारना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इन औद्योगिक इकाइयों को एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति
कैबिनेट ने औद्योगिक इकाइयों को ऊर्जा एवं गति देने के लिए 566.77 करोड़ रुपये की एसजीएसटी प्रतिपूर्ति देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। उप्र त्वरित निवेश प्रोत्साहन नीति 2020 के तहत प्रतिपूर्ति राशि पाने वालों में गोरखपुर की मेसर्स अंकुर उद्योग लिमिटेड व मेसर्स गैलेंट इंडस्ट्री, मेरठ की मेसर्स पसवारा पेपर्स लिमिटेड, सोनभद्र की मेसर्स अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड, उन्नाव की मेसर्स इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड और गौतमबुद्धनगर की मेसर्स विजन सोर्स एलएलपी शामिल हैं।

प्राधिकरणों से नक्शा पास होते ही माना जाएगा भू-उपयोग परिवर्तन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-80 में संशोधन के लिए अध्यादेश 2026 को मंजूरी दे दी गई। इस अहम फैसले के तहत विकास प्राधिकरणों, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों, विनियमित क्षेत्रों और उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अधीन क्षेत्रों में गैर-कृषि उपयोग (लैंड यूज) परिवर्तन की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया गया है।

अब इन क्षेत्रों में अलग से लैंड यूज बदलवाने की आवश्यकता नहीं होगी। अगर किसी भूखंड का नक्शा प्राधिकरण द्वारा पास हो जाता है, तो उसी को भूमि उपयोग परिवर्तन माना जाएगा। इससे पहले लोगों को दोहरी प्रक्रिया यानी पहले लैंड यूज परिवर्तन और फिर नक्शा पास कराने से गुजरना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों की अधिक खपत होती थी।

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि नई व्यवस्था में नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में ही सभी औपचारिकताएं शामिल कर दी गई हैं। इससे न केवल आमजन को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि निवेशकों के लिए भी प्रक्रिया आसान और पारदर्शी बनेगी। इस सुधार से प्रदेश में निवेश को बढ़ावा मिलेगा, उद्योग स्थापना में तेजी आएगी और उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी।
 

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