UP: नमामि गंगे विभाग की अनूठी पहल, कार्मिकों को मिली मनचाही तैनाती; चट पोस्टिंग, पट मिला ट्रांसफर ऑर्डर
उत्तर प्रदेश के नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने पारदर्शी तबादला प्रक्रिया लागू करते हुए 170 अधिकारियों और कर्मचारियों को मनचाही तैनाती दी। वरिष्ठता और कार्य गुणवत्ता के आधार पर स्क्रीन पर रिक्त पद दिखाकर विकल्प चुने गए। बटन दबाते ही ट्रांसफर आदेश मोबाइल पर पहुंच गए।
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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार तबादला नीति में पारदर्शिता को लेकर विशेष ध्यान दे रही है। सरकार का पूरा प्रयास है कि विभागों में तबादले के दौरान किसी भी तरह का भ्रष्टाचार न हो और कार्मिकों को मेरिट के आधार पर तैनाती मिले। इसके तहत शुक्रवार को नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने एक अनूठी पहल शुरू की।
जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह की अगुवाई में आज ट्रांसफर के इच्छुक सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को मनचाही तैनाती उनके सामने पारदर्शी तरीके से दी गई। इस पूरी प्रक्रिया में 170 अधिकारियों-कर्मचारियों का तबादला किया गया। प्रक्रिया के दौरान विभाग के राज्य मंत्री दिनेश खटीक, रामकेश निषाद और अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव भी मौजूद रहे।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान 170 कर्मचारियों और अधिकारियों का ट्रांसफर किया गया। इसमें जल निगम ग्रामीण विभाग के 131, लघु सिंचाई विभाग के 28 और भूगर्भ जल विभाग के 11 अधिकारियों का ट्रांसफर किया गया। इसमें 2 मुख्य अभियंता, 15 अधीक्षण अभियंता, 35 अधिशासी अभियंता, 40 सहायक अभियंता और 78 जूनियर इंजीनियर के तबादले किए गए।
पहली बार कार्मिकों से पूछकर दी गई तैनाती
प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जल निगम ग्रामीण विभाग के हॉल में 8 स्क्रीनों की व्यवस्था की गई थी। इन 8 स्क्रीनों पर संबंधित पदों के लिए रिक्त जिलों की सूची प्रदर्शित की गई। सबसे वरिष्ठ और सक्षम अधिकारियों से क्रमवार उनके तबादले की प्राथमिकता पूछी गई और उनके मनचाहे जिले को लॉक कर दिया गया।
कम्प्यूटर का बटन दबते ही कुछ सेकेंड में ही कार्मिकों का ट्रांसफर लेटर उनके मोबाइल में पहुंच गया। इस प्रक्रिया में पूरे प्रदेश के ट्रांसफर के इच्छुक अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे। इस दौरान जो कार्मिक किसी कारणवश नहीं आ पाए थे, उन्हें ऑनलाइन प्रक्रिया से जोड़ा गया था, जिससे वो अपनी बात मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रख सकें।
वरिष्ठता क्रम और कार्य की गुणवत्ता को बनाया मानक
जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने बताया कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कार्मिकों के वरिष्ठता क्रम और कार्य की गुणवत्ता को मानक बनाया गया था। जो उनके केपीआई (की परफॉर्मेंस इंडेक्स) के आधार पर तय होता है। इस पूरी प्रक्रिया में कोई भी हस्तक्षेप नहीं हो सकता है। इस पूरी प्रक्रिया से सभी कार्मिकों में खुशी की लहर है।
इस दौरान अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन और जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह की अगुवाई में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत काम हो रहा है। इसी के तहत पारदर्शी तरीके से ट्रांसफर प्रक्रिया को पूरा किया गया।