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Lucknow News: हुनर सीखने पहुंचीं महिलाएं पर मशीनें खामोश
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डालीगंज स्थित मंडलीय ग्रामोद्योग प्रशिक्षण केंद्र में सिलाई मशीन के काम नहीं करने के कारण खाली
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लखनऊ। ग्रामीण महिलाओं को हुनर सिखाकर आत्मनिर्भर बनाने के लिए डालीगंज स्थित मंडलीय ग्रामोद्योग प्रशिक्षण केंद्र में शुरू हुए प्रशिक्षण की तीसरे दिन ही व्यवस्था की पोल खुल गई। जूट बैग और चिकनकारी का काम सीखने पहुंच रहीं महिलाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण के बजाय इंतजार करना पड़ रहा है। बुधवार को अमर उजाला की टीम ने केंद्र की पड़ताल की तो जूट बैग निर्माण की कक्षा में करीब 50 सिलाई मशीनें लगी मिलीं, लेकिन इनमें सिर्फ तीन ही चालू थीं।
जूट बैग बनाने का प्रशिक्षण ले रहीं सोनी कनौजिया, प्रीति देवी और अंजू लता ने बताया कि वे तीन दिन से केंद्र आ रही हैं लेकिन मशीनें खराब होने के कारण काम सीखने का मौका नहीं मिल रहा। 25 महिलाओं के बैच में बुधवार को करीब 15 महिलाएं ही मौजूद थीं। प्रशिक्षणार्थियों का कहना था कि लेक्चर सुनने के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ रहा है।
चिकनकारी में भी अभ्यास के बजाय प्रमाणपत्र की चर्चा
चिकनकारी के 25 प्रशिक्षणार्थियों की कक्षा में भी व्यावहारिक प्रशिक्षण की स्थिति संतोषजनक नहीं मिली। ट्रेनर डॉ. सुमित कुमार सोनकर मौजूद थे। प्रशिक्षणार्थियों के मुताबिक, उन्हें चिकनकारी का काम सिखाने के बजाय प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मिलने वाले प्रमाणपत्र के इस्तेमाल की जानकारी दी जा रही थी। कक्षा में कागज, कैंची और अन्य सामग्री रखी थी, लेकिन चिकन सूट की कढ़ाई का अभ्यास कराने के लिए कोई प्रशिक्षक मौजूद नहीं था।
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ग्रामीण क्षेत्र की 25 महिलाएं जूट बैग और 25 महिलाएं चिकनकारी का प्रशिक्षण ले रही हैं। सिलाई मशीनें लगभग ठीक हैं, लेकिन ज्यादातर मशीनें बॉबिन केस न होने से काम नहीं कर पा रही हैं। दो दिन पहले ही मरम्मत के लिए मिस्त्री को सूचना दी गई है। बृहस्पतिवार तक मशीनें चालू करा दी जाएंगी।
- तनुजा, प्राचार्य, मंडलीय ग्रामोद्योग प्रशिक्षण केंद्र
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जूट बैग बनाने का प्रशिक्षण ले रहीं सोनी कनौजिया, प्रीति देवी और अंजू लता ने बताया कि वे तीन दिन से केंद्र आ रही हैं लेकिन मशीनें खराब होने के कारण काम सीखने का मौका नहीं मिल रहा। 25 महिलाओं के बैच में बुधवार को करीब 15 महिलाएं ही मौजूद थीं। प्रशिक्षणार्थियों का कहना था कि लेक्चर सुनने के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ रहा है।
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चिकनकारी में भी अभ्यास के बजाय प्रमाणपत्र की चर्चा
चिकनकारी के 25 प्रशिक्षणार्थियों की कक्षा में भी व्यावहारिक प्रशिक्षण की स्थिति संतोषजनक नहीं मिली। ट्रेनर डॉ. सुमित कुमार सोनकर मौजूद थे। प्रशिक्षणार्थियों के मुताबिक, उन्हें चिकनकारी का काम सिखाने के बजाय प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मिलने वाले प्रमाणपत्र के इस्तेमाल की जानकारी दी जा रही थी। कक्षा में कागज, कैंची और अन्य सामग्री रखी थी, लेकिन चिकन सूट की कढ़ाई का अभ्यास कराने के लिए कोई प्रशिक्षक मौजूद नहीं था।
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ग्रामीण क्षेत्र की 25 महिलाएं जूट बैग और 25 महिलाएं चिकनकारी का प्रशिक्षण ले रही हैं। सिलाई मशीनें लगभग ठीक हैं, लेकिन ज्यादातर मशीनें बॉबिन केस न होने से काम नहीं कर पा रही हैं। दो दिन पहले ही मरम्मत के लिए मिस्त्री को सूचना दी गई है। बृहस्पतिवार तक मशीनें चालू करा दी जाएंगी।
- तनुजा, प्राचार्य, मंडलीय ग्रामोद्योग प्रशिक्षण केंद्र