मां बगलामुखी मंदिर दान विवाद: जांच के बाद समिति भंग, अब सरकारी खाते में जमा होगा मंदिर का खजाना; मनमानी खत्म
आगर मालवा के विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में दान संग्रह को लेकर विवादों में रही अशासकीय समिति की जांच पूरी हो गई है। जांच में वित्तीय अनियमितता नहीं मिली है।
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कलेक्टर प्रीति यादव ने बताया कि जांच दल ने समिति के बैंक खातों, लॉकर और अभिलेखों की जांच के साथ समिति सदस्यों से भी चर्चा की। रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितता सामने नहीं आई, लेकिन मंदिर परिसर में इस प्रकार की अशासकीय समिति का संचालन नियम विरुद्ध पाया गया। इसलिए समिति के पास जमा समस्त नकद राशि, 29 किलोग्राम चांदी और 105 ग्राम सोना मंदिर की शासकीय प्रबंध समिति को सौंपा जाएगा। यह राशि और आभूषण शासकीय खाते एवं लॉकर में सुरक्षित रखे जाएंगे।
दान व्यवस्था होगी पूरी तरह पारदर्शी
जांच रिपोर्ट के बाद प्रशासन ने मंदिर में दान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने का निर्णय लिया है। मंदिर में आने वाले प्रत्येक दान की निगरानी की जाएगी तथा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि श्रद्धालुओं द्वारा दिया गया दान केवल मंदिर विकास और मां की सेवा में ही उपयोग हो। मंदिर प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि भविष्य में मंदिर के नाम पर किसी भी प्रकार की समानांतर व्यवस्था संचालित न होने पाए।
श्रद्धालुओं को किया जाएगा जागरूक
प्रशासन श्रद्धालुओं को भी जागरूक करेगा ताकि उनका दान गलत हाथों में न पहुंचे। मंदिर परिसर में प्रचार-प्रसार के माध्यम से बताया जाएगा कि दान केवल अधिकृत दान पात्र या मंदिर समिति कार्यालय में रसीद प्राप्त कर ही करें। मंदिर कर्मचारियों को भी सक्रिय भूमिका दी जाएगी, जो दान देने वाले श्रद्धालुओं को तत्काल रसीद उपलब्ध कराने और व्यवस्था की निगरानी करेंगे।
2024 में बनी थी समिति
जांच में सामने आया कि वर्ष 2024 में गठित इस अशासकीय समिति द्वारा मंदिर परिसर में रसीद काउंटर लगाकर नकद राशि, सोना और चांदी का संग्रह किया जा रहा था। समिति की रसीदों पर पंजीयन क्रमांक, बैंक खाते का विवरण और मोबाइल नंबर भी अंकित थे। इसी व्यवस्था को लेकर शिकायतें मिलने के बाद प्रशासन ने जांच कराई थी।
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कलेक्टर प्रीति यादव का बयान
कलेक्टर प्रीति यादव ने कहा कि जिले में पदस्थापना के दौरान उन्हें मां बगलामुखी की सेवा का अवसर मिला है। प्रयास है कि मंदिर का विकास हो और यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर एवं पारदर्शी व्यवस्था मिले। उन्होंने कहा कि जांच में वित्तीय गड़बड़ी नहीं मिली है, लेकिन भविष्य में दान व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो।
जानें कैसे आस्था को हथियार बना रहे थे ठग
गौरलतब है कि पूर्व में मंदिर के नाम और तस्वीरों का उपयोग कर फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम सहित कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी आईडी संचालित की जा रही हैं थी। इन प्लेटफॉर्मों पर गारंटी से मिर्ची हवन, वशीकरण, सरकारी नौकरी में सफलता और विशेष तांत्रिक अनुष्ठान जैसे दावे कर श्रद्धालुओं से मोटी रकम वसूली जा रही थी। बता दें ऐसे मामलों से बचाव के लिए मंदिर प्रबंधन स्पष्ट कर चुका है कि मंदिर परिसर में मिर्ची हवन पूरी तरह प्रतिबंधित है और इस प्रकार की ऑनलाइन सेवाओं से मंदिर का कोई संबंध नहीं है।
समिति ने किया था आगाह
मंदिर प्रबंध समिति ने अपने पत्र में उल्लेख किया था कि सोशल मीडिया पर मां बगलामुखी मंदिर की धार्मिक पहचान का दुरुपयोग कर श्रद्धालुओं को भ्रमित किया जा रहा है। फर्जी पेजों और चैनलों के माध्यम से हवन-पूजन के नाम पर धन वसूला जा रहा था। समिति ने पुलिस से ऐसे सभी प्लेटफॉर्मों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई और फर्जी आईडी बंद कराने की मांग की थी।
