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MP: दान विवाद से चर्चा में आया मां बगलामुखी मंदिर, आखिर क्यों देशभर की आस्था का बड़ा केंद्र है यह सिद्धपीठ?
Fri, 10 Jul 2026 10:38 AM IST
आगर मालवा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगर मालवा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगर मालवा
Published by: आगर मालवा ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jul 2026 10:38 AM IST
सार
मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित विश्व प्रसिद्ध पीतांबरा सिद्धपीठ मां बगलामुखी मंदिर दान में कथित वित्तीय अनियमितताओं और चंदे की अनाधिकृत वसूली के आरोपों के बाद चर्चा में है।
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महाभारत काल से जुड़ी है मंदिर की मान्यता
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अयोध्या राम मंदिर में दान और चंदे को लेकर उठे विवाद की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले के विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर से भी दान में कथित हेरफेर का मामला सामने आ गया। शिकायतों के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। लेकिन इस विवाद के बीच सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर नलखेड़ा का मां बगलामुखी मंदिर इतना प्रसिद्ध क्यों है, जहां हर साल देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु, साधक और विशिष्ट लोग पहुंचते हैं।
दान में हेरफेर के आरोप, सरकार ने बनाई जांच समिति
आगर-मालवा कलेक्टर ने मंगलवार को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने का आदेश जारी किया। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि आधिकारिक मंदिर प्रबंधन समिति से अलग एक गैर-सरकारी समिति श्रद्धालुओं से चंदा और दान एकत्र कर रही थी। आरोप है कि भक्तों द्वारा दान में दिए गए नकद, सोना, चांदी, आभूषण और अन्य कीमती सामान समानांतर व्यवस्था के जरिए एकत्र कर निजी बैंक खातों में जमा किए जा रहे थे। इन शिकायतों के आधार पर राज्य सरकार ने पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
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दान में हेरफेर के आरोप, सरकार ने बनाई जांच समिति
आगर-मालवा कलेक्टर ने मंगलवार को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने का आदेश जारी किया। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि आधिकारिक मंदिर प्रबंधन समिति से अलग एक गैर-सरकारी समिति श्रद्धालुओं से चंदा और दान एकत्र कर रही थी। आरोप है कि भक्तों द्वारा दान में दिए गए नकद, सोना, चांदी, आभूषण और अन्य कीमती सामान समानांतर व्यवस्था के जरिए एकत्र कर निजी बैंक खातों में जमा किए जा रहे थे। इन शिकायतों के आधार पर राज्य सरकार ने पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
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मंदिर के बाहर मौजूद श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
आस्था और तंत्र साधना का बड़ा केंद्र है नलखेड़ा
आगर मालवा जिले की नलखेड़ा तहसील में लखुंदर नदी के किनारे स्थित पीतांबरा सिद्धपीठ मां बगलामुखी मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों और तंत्र साधना स्थलों में गिना जाता है। हर साल यहां देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु, साधक और तांत्रिक दर्शन, विशेष पूजा और अनुष्ठान के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि मां बगलामुखी की आराधना से शत्रु बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
महाभारत काल से जुड़ी है इस मंदिर की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां बगलामुखी की प्रतिमा स्वयंभू है। मंदिर का वर्तमान स्वरूप वर्ष 1816 में हुए जीर्णोद्धार के बाद विकसित हुआ, जबकि इसकी स्थापना महाभारत काल से जुड़ी मानी जाती है। लोक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर पांडवों ने कौरवों पर विजय प्राप्त करने के लिए इसी स्थान पर मां बगलामुखी की साधना की थी। तभी से यह सिद्धपीठ विजय, शत्रु बाधा निवारण और मनोकामना पूर्ति का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
आगर मालवा जिले की नलखेड़ा तहसील में लखुंदर नदी के किनारे स्थित पीतांबरा सिद्धपीठ मां बगलामुखी मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों और तंत्र साधना स्थलों में गिना जाता है। हर साल यहां देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु, साधक और तांत्रिक दर्शन, विशेष पूजा और अनुष्ठान के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि मां बगलामुखी की आराधना से शत्रु बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
महाभारत काल से जुड़ी है इस मंदिर की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां बगलामुखी की प्रतिमा स्वयंभू है। मंदिर का वर्तमान स्वरूप वर्ष 1816 में हुए जीर्णोद्धार के बाद विकसित हुआ, जबकि इसकी स्थापना महाभारत काल से जुड़ी मानी जाती है। लोक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर पांडवों ने कौरवों पर विजय प्राप्त करने के लिए इसी स्थान पर मां बगलामुखी की साधना की थी। तभी से यह सिद्धपीठ विजय, शत्रु बाधा निवारण और मनोकामना पूर्ति का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
बगलामुखी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
न्यायालयीन विवाद से लेकर चुनावी सफलता तक की मान्यता
नलखेड़ा का यह मंदिर तंत्र साधना के लिए भी विशेष पहचान रखता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां मां बगलामुखी की आराधना से शत्रुओं का स्तंभन होता है और न्यायालयीन विवाद, चुनावी सफलता तथा कठिन परिस्थितियों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं। यही वजह है कि यहां आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ न्यायपालिका से जुड़े लोग, राजनेता, उद्योगपति, फिल्म जगत की हस्तियां और अन्य विशिष्ट लोग भी विशेष हवन, पूजन और अनुष्ठान कराने पहुंचते हैं।
देश के तीन प्रमुख बगलामुखी मंदिरों में एक
धार्मिक ग्रंथ कालीपुराण में भी मां बगलामुखी के स्वरूप और महिमा का उल्लेख मिलता है। देश में मां बगलामुखी के केवल तीन प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर माने जाते हैं। इनमें मध्य प्रदेश के दतिया, हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और आगर मालवा के नलखेड़ा स्थित मंदिर का नाम प्रमुख है। तीनों शक्तिपीठों की अपनी अलग धार्मिक मान्यताएं हैं।
नलखेड़ा का यह मंदिर तंत्र साधना के लिए भी विशेष पहचान रखता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां मां बगलामुखी की आराधना से शत्रुओं का स्तंभन होता है और न्यायालयीन विवाद, चुनावी सफलता तथा कठिन परिस्थितियों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं। यही वजह है कि यहां आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ न्यायपालिका से जुड़े लोग, राजनेता, उद्योगपति, फिल्म जगत की हस्तियां और अन्य विशिष्ट लोग भी विशेष हवन, पूजन और अनुष्ठान कराने पहुंचते हैं।
देश के तीन प्रमुख बगलामुखी मंदिरों में एक
धार्मिक ग्रंथ कालीपुराण में भी मां बगलामुखी के स्वरूप और महिमा का उल्लेख मिलता है। देश में मां बगलामुखी के केवल तीन प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर माने जाते हैं। इनमें मध्य प्रदेश के दतिया, हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और आगर मालवा के नलखेड़ा स्थित मंदिर का नाम प्रमुख है। तीनों शक्तिपीठों की अपनी अलग धार्मिक मान्यताएं हैं।
मां बगलामुखी का दरबार
- फोटो : अमर उजाला
तीन मुखों वाली त्रिशक्ति माता की होती है आराधना
नलखेड़ा मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां तीन मुखों वाली त्रिशक्ति माता बगलामुखी की पूजा होती है। मध्य प्रदेश में यह अपनी तरह का एकमात्र मंदिर माना जाता है। मंदिर परिसर में स्थित विशाल और प्राचीन दीप स्तंभ भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है, जिसे पर्व और उत्सवों पर दीपों से सजाया जाता है।
प्राचीन स्थापत्य भी बढ़ाता है मंदिर की महिमा
मंदिर की वास्तुकला इसकी प्राचीनता की गवाही देती है। गर्भगृह की करीब पांच फीट मोटी दीवारें और उन पर की गई नक्काशी को देखकर इतिहासकार इसका निर्माण सम्राट विक्रमादित्य के काल का मानते हैं। मंदिर की स्थापत्य शैली उज्जैन के मां हरसिद्धि मंदिर से भी काफी मेल खाती है, जिससे इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता और बढ़ जाती है।
नलखेड़ा मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां तीन मुखों वाली त्रिशक्ति माता बगलामुखी की पूजा होती है। मध्य प्रदेश में यह अपनी तरह का एकमात्र मंदिर माना जाता है। मंदिर परिसर में स्थित विशाल और प्राचीन दीप स्तंभ भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है, जिसे पर्व और उत्सवों पर दीपों से सजाया जाता है।
प्राचीन स्थापत्य भी बढ़ाता है मंदिर की महिमा
मंदिर की वास्तुकला इसकी प्राचीनता की गवाही देती है। गर्भगृह की करीब पांच फीट मोटी दीवारें और उन पर की गई नक्काशी को देखकर इतिहासकार इसका निर्माण सम्राट विक्रमादित्य के काल का मानते हैं। मंदिर की स्थापत्य शैली उज्जैन के मां हरसिद्धि मंदिर से भी काफी मेल खाती है, जिससे इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता और बढ़ जाती है।
दान विवाद से सुर्खियों में आया बगलामुखी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
नवरात्रि में उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब
आस्था, इतिहास, तंत्र साधना और प्राचीन स्थापत्य का अनूठा संगम बना नलखेड़ा का मां बगलामुखी मंदिर आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। विशेष पर्वों और नवरात्रि के दौरान यहां देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और मां बगलामुखी के दरबार में पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। फिलहाल दान में कथित अनियमितताओं की जांच जारी है। ऐसे में यह मंदिर एक ओर जहां विवादों की वजह से सुर्खियों में है, वहीं दूसरी ओर अपनी ऐतिहासिक, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता के कारण देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है।
आस्था, इतिहास, तंत्र साधना और प्राचीन स्थापत्य का अनूठा संगम बना नलखेड़ा का मां बगलामुखी मंदिर आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। विशेष पर्वों और नवरात्रि के दौरान यहां देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और मां बगलामुखी के दरबार में पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। फिलहाल दान में कथित अनियमितताओं की जांच जारी है। ऐसे में यह मंदिर एक ओर जहां विवादों की वजह से सुर्खियों में है, वहीं दूसरी ओर अपनी ऐतिहासिक, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता के कारण देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है।
