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Anuppur News: मत्स्य पालन के लिए दी गई तालाब में डाल रहे ओबी की मिट्टी, लगातार घट रहा जलस्तर

न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अनूपपुर Published by: अनूपपुर ब्यूरो Updated Mon, 03 Mar 2025 01:56 PM IST
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सार

अनूपपुर जिले में मत्स्य पालन के लिए जिला प्रशासन ने महिला स्व सहायता समूह को जो तालाब लीज पर प्रदान की, उसके समीप कॉलरी प्रबंधन ने कोयला उत्खनन शुरू कर दिया है। इससे मिट्टी तालाब में डालने से यह सूखता जा रहा है।

Anuppur News OB soil is being put in pond given for fish farming water level is continuously decreasing
तालाब में मत्स्य पालन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अनूपपुर की बंद कोयला खदानों को मत्स्य पालन के लिए जिला प्रशासन एवं मत्स्य विभाग ने महिला स्व सहायता समूह को मत्स्य पालन के लिए लीज पर प्रदान किया था, जिससे कि स्वस्थ सहायता समूहों को इससे आर्थिक लाभ मिल सके। इसके साथ ही मत्स्य पालन में जिला और भी आगे बढ़ सके, जिसके अंतर्गत एसईसीएल हसदेव क्षेत्र अंतर्गत राजनगर बंद ओपन कास्ट कोयला खदान में जमा वर्षा जल में मत्स्य पालन के लिए महिला स्व सहायता समूह को यह दिया गया था, जिसके बाद कालरी प्रबंधन ने यहां पर कोयले का उत्पादन फिर से प्रारंभ कर दिया और जिस तालाब को 10 वर्षों के लिए मत्स्य विभाग ने स्व सहायता समूह को लीज पर प्रदान किया था, उसी की सीमा से लगे हुए क्षेत्र पर कोयल का उत्खनन प्रारंभ कर दिए जाने के कारण यहां जमी ओबी (कोयला उत्खनन के लिए हटाई जाने वाली मिट्टी) को तालाब की सीमा पर फेंका जा रहा है, जिसके कारण लगातार तालाब का जलस्तर कम होते जा रहा है तो दूसरी ओर इसके कारण मछलियां भी मर रही हैं, जिसकी वजह से मत्स्य पालन के कार्य में जुटे हुए स्व सहायता समूह को लगातार घाटे का सामना करना पड़ रहा है।

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एसईसीएल हसदेव क्षेत्र के राजनगर ओपन कास्ट राम मंदिर बड़ा तालाब में ज्योति मत्स्य सहकारी समिति डोला को मत्स्य पालन के लिए 2017 से 2027 तक मत्स्य विभाग ने लीज पर संपदा योजना के अंतर्गत मत्स्य पालन के लिए प्रदान किया था। जहां पर 30 केज से 90 लख रुपए की लागत से मछली उत्पादन किया जा रहा था। इसके साथ ही इस कार्य के लिए समूह में 15 लाख रुपए का लोन भी ले लिया था जिससे कि कार्य को और बढ़ाया जा सके। जिसमें वर्ष 2021 में 8 टन मछली का उत्पादन समिति ने किया था। इसके पहले कोरोना की वजह से यह कार्य बंद था। इसी दौरान बंद कोयला खदान को एसईसीएल प्रबंधन ने फिर से प्रारंभ कर दिया और यहां कोयले का उत्खनन किया जाने लगा तथा कोयला उत्खनन के लिए ओ बी को प्रबंधन मत्स्य पालन के लिए दी गई तालाब की सीमा पर फेंक रहा है। जिसके कारण लगातार तालाब का जलस्तर कम होता जा रहा है। वहीं दूसरी ओर कोयला उत्खनन के लिए की जा रही बारूदी विस्फोट की वजह से भी तालाब का जलस्तर घटने जा रहा है।
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शिकायत के बावजूद नहीं हो रही कार्रवाई
इस मामले की शिकायत ज्योति मत्स्य सहकारी समिति डोला की अध्यक्ष रेखा साव एवं अन्य सदस्यों ने मत्स्य विभाग के अधिकारियों एवं जनसुनवाई में कलेक्टर से भी दर्ज कराई है। पूर्व में की गई शिकायत के बाद एसडीएम और तत्कालीन कलेक्टर ने मौके पर पहुंचकर समस्या का निरीक्षण भी किया था इसके बावजूद कालरी प्रबंधन के ठेके जा रहे ओ बी मिट्टी को कहीं अन्यत्र डंप करने के निर्देश अब तक नहीं दिए गए।

समूह के सदस्यों ने कहा प्रबंधन दे क्षतिपूर्ति राशि
ज्योति मत्स्य सहकारी समिति डोला में 23 सदस्य हैं जो की मिलकर मत्स्य पालन का कार्य कर रहेहैं। जिससे 23 परिवार इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं इसके साथ ही मत्स्य पालन का कार्य भी किया जा रहा है। कोयला खदान फिर से प्रारंभ कर दिए जाने एवं इसके विस्तार तथा कोयला उत्खनन के लिए मिट्टी को हटाते हुए तालाब की सीमा में फेंकने की वजह से लगातार समिति के सदस्यों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। जहां तालाब सूखने जा रहा है तो दूसरी ओर मछलियों की भी मौत हो रही है और समिति सदस्यों की मेहनत पर पानी फिर रहा है। जिसको लेकर समिति सदस्यों ने प्रबंधन से क्षतिपूर्ति दिलाए जाने की मांग भी की है।

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