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Barwani: बहन का त्याग बना भाई का जीवनदान, नेहा ने लीवर दान कर सुशील को दी नई जिंदगी; 12 घंटे की सर्जरी पूरी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बड़वानी Published by: बड़वानी ब्यूरो Updated Wed, 22 Apr 2026 01:41 PM IST
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सार

 सेंधवा की एक महिला ने भाई के प्रति प्रेम और समर्पण की मिसाल पेश करते हुए अपने लीवर का हिस्सा दान कर उसकी जान बचाई। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में सफल सर्जरी के बाद मरीज को नई जिंदगी मिली।

A Sister's Sacrifice Becomes a Brother's Lifeline: Neha Donates Liver to Give Her Brother a New
बहन नेहा और भाई सुशील। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

भाई-बहन के रिश्ते को अक्सर प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है, लेकिन बड़वानी के सेंधवा की एक घटना ने इस रिश्ते को त्याग और समर्पण की नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। शहर निवासी नेहा मनीष अग्रवाल (47) ने अपने भाई सुशील कुमार मंगीलाल अग्रवाल (55) को जीवनदान देने के लिए अपने लीवर का एक हिस्सा दान किया।
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18 अप्रैल 2026 को हरियाणा के गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में यह जटिल लीवर ट्रांसप्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम के नेतृत्व में करीब 12 घंटे तक चली इस सर्जरी में डोनर प्रक्रिया लगभग 7 घंटे तक चली। आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञों की निगरानी में यह ऑपरेशन पूरा हुआ, जिसने एक गंभीर मरीज को नई जिंदगी दी।
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इस पूरे निर्णय के दौरान नेहा के पति मनीष अग्रवाल (52) का सहयोग बेहद अहम रहा। पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच लिया गया यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन पति के समर्थन ने नेहा के साहस को मजबूती दी। परिवार के चारों बच्चे शुभदा (20), अनुश्री (15), रिद्धि (12) और निकुंज (9) भी इस कठिन समय में पूरी तरह साथ खड़े रहे।

सुशील अग्रवाल, जो मूल रूप से भिकनगांव के निवासी हैं और वर्तमान में इंदौर के शिव मोती नगर, नवलखा में रह रहे हैं। उनके परिवार में पत्नी अनीता (48), बेटी पलक (25) और बेटा अक्षत (23) शामिल हैं। गंभीर स्वास्थ्य स्थिति में पहुंचे सुशील के लिए यह ट्रांसप्लांट जीवनरक्षक साबित हुआ।

यह घटना केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि पारिवारिक एकजुटता, विश्वास और निस्वार्थ प्रेम की जीवंत मिसाल है। एक बहन का अपने भाई के लिए लिया गया यह साहसिक निर्णय और उसमें परिवार का अटूट साथ, यह दर्शाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी रिश्तों की ताकत सबसे बड़ी होती है।
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