{"_id":"69da22e025d7e907ee0581d7","slug":"bhopal-news-bulldozers-deployed-against-encroachments-at-the-upper-lake-the-lower-lake-s-area-shrinks-under-2026-04-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhopal News: बड़े तालाब के अतिक्रमण पर बुलडोजर, छोटे तालाब पर पिचिंग के नाम पर घट रहा दायरा,बीएमसी पर उठे सवाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhopal News: बड़े तालाब के अतिक्रमण पर बुलडोजर, छोटे तालाब पर पिचिंग के नाम पर घट रहा दायरा,बीएमसी पर उठे सवाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sat, 11 Apr 2026 05:50 PM IST
विज्ञापन
सार
भोपाल में बड़े तालाब से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बीच छोटे तालाब के घटते दायरे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पिचिंग के नाम पर किनारों में मलबा डालने के आरोप लगे हैं, जिससे पानी पीछे खिसकने और बायोडायवर्सिटी पर खतरे की आशंका जताई गई है। मामला NGT तक पहुंच गया है।
छोटा तालाब
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
तालाबों की नगरी भोपाल में संरक्षण की तस्वीर दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है। एक तरफ प्रशासन बड़े तालाब से अतिक्रमण हटाने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ छोटे तालाब का दायरा सिमटता जा रहा है। आरोप है कि पिचिंग के नाम पर किनारों में पत्थर और मलबा डालकर तालाब की सीमा धीरे-धीरे कम की जा रही है।
10 फीट पीछे खिसका पानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां पहले तालाब का पानी किनारे तक नजर आता था, अब वह करीब 10 फीट पीछे चला गया है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि किनारों के साथ छेड़छाड़ हुई है। लोगों का आरोप है कि यह सिर्फ मरम्मत नहीं, बल्कि धीरे-धीरे तालाब की जमीन कम करने जैसा काम है।
NGT पहुंचा मामला, वेटलैंड नियमों का हवाला
इस पूरे मुद्दे को पर्यावरणविद राशिद नूर खान ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में उठाया है। उनका कहना है कि छोटे तालाब को रामसर साइट का दर्जा मिला हुआ है और यह क्षेत्र वेटलैंड नियमों के तहत संरक्षित है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की छेड़छाड़ पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन मानी जाएगी।
यह भी पढ़ें-भोपाल में न्याय पदयात्रा पर ब्रेक, 200KM चलकर पहुंचे छात्र नेता को पुलिस ने CM हाउस जाने रोका
बायोडायवर्सिटी पर खतरे की चेतावनी
राशिद नूर का मानना है कि तालाब के किनारों में इस तरह का हस्तक्षेप उसकी प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंचा सकता है। मिट्टी और मलबा पानी में जाने से न सिर्फ जल गुणवत्ता प्रभावित होगी, बल्कि यहां की जैव विविधता पर भी असर पड़ेगा। लगातार हो रहे इस बदलाव से स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। राहगीरों का कहना है कि पहले यहां सुरक्षा के लिए रेलिंग लगाई गई थी, लेकिन अब उसे हटाकर पत्थर और मिट्टी डाल दी गई है। लोगों को यह काम असुरक्षित और पर्यावरण के खिलाफ लग रहा है।
निगम का बचाव,सिर्फ मजबूती का काम
नगर निगम के अधिकारी इन आरोपों को खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि तालाब के किनारों को मजबूत करने के लिए ही पिचिंग की जा रही है और किसी भी तरह का स्थायी निर्माण या दायरा कम करने का काम नहीं हो रहा।
यह भी पढ़ें-सीहोर से 12 अप्रैल को सीएम जारी करेंगे 35वीं किस्त, 184 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात
अब निगाहें NGT के फैसले पर
फिलहाल यह मामला जांच और सुनवाई के दौर में है। पर्यावरण प्रेमियों को उम्मीद है कि NGT इस पर सख्त रुख अपनाएगा और यदि गड़बड़ी पाई गई तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई के साथ ही डाले गए मलबे को हटाने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।
Trending Videos
10 फीट पीछे खिसका पानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां पहले तालाब का पानी किनारे तक नजर आता था, अब वह करीब 10 फीट पीछे चला गया है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि किनारों के साथ छेड़छाड़ हुई है। लोगों का आरोप है कि यह सिर्फ मरम्मत नहीं, बल्कि धीरे-धीरे तालाब की जमीन कम करने जैसा काम है।
विज्ञापन
विज्ञापन
NGT पहुंचा मामला, वेटलैंड नियमों का हवाला
इस पूरे मुद्दे को पर्यावरणविद राशिद नूर खान ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में उठाया है। उनका कहना है कि छोटे तालाब को रामसर साइट का दर्जा मिला हुआ है और यह क्षेत्र वेटलैंड नियमों के तहत संरक्षित है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की छेड़छाड़ पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन मानी जाएगी।
यह भी पढ़ें-भोपाल में न्याय पदयात्रा पर ब्रेक, 200KM चलकर पहुंचे छात्र नेता को पुलिस ने CM हाउस जाने रोका
बायोडायवर्सिटी पर खतरे की चेतावनी
राशिद नूर का मानना है कि तालाब के किनारों में इस तरह का हस्तक्षेप उसकी प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंचा सकता है। मिट्टी और मलबा पानी में जाने से न सिर्फ जल गुणवत्ता प्रभावित होगी, बल्कि यहां की जैव विविधता पर भी असर पड़ेगा। लगातार हो रहे इस बदलाव से स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। राहगीरों का कहना है कि पहले यहां सुरक्षा के लिए रेलिंग लगाई गई थी, लेकिन अब उसे हटाकर पत्थर और मिट्टी डाल दी गई है। लोगों को यह काम असुरक्षित और पर्यावरण के खिलाफ लग रहा है।
निगम का बचाव,सिर्फ मजबूती का काम
नगर निगम के अधिकारी इन आरोपों को खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि तालाब के किनारों को मजबूत करने के लिए ही पिचिंग की जा रही है और किसी भी तरह का स्थायी निर्माण या दायरा कम करने का काम नहीं हो रहा।
यह भी पढ़ें-सीहोर से 12 अप्रैल को सीएम जारी करेंगे 35वीं किस्त, 184 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात
अब निगाहें NGT के फैसले पर
फिलहाल यह मामला जांच और सुनवाई के दौर में है। पर्यावरण प्रेमियों को उम्मीद है कि NGT इस पर सख्त रुख अपनाएगा और यदि गड़बड़ी पाई गई तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई के साथ ही डाले गए मलबे को हटाने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।

कमेंट
कमेंट X