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एमपी टूरिज्म में 4 करोड़ का घोटाला: दो महीने बाद भी न किसी पर कार्रवाई, न पुलिस ने दर्ज की एफआईआर, अधिकारी मौन
Tue, 07 Jul 2026 07:06 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Tue, 07 Jul 2026 07:06 PM IST
सार
मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपीटी) में होटल और जंगल सफारी बुकिंग के नाम पर करीब 3.91 करोड़ रुपए के कथित गबन का मामला सामने आने के बाद भी दो महीने से अधिक समय बीत गया, लेकिन न एफआईआर दर्ज हुई और न ही किसी अधिकारी-कर्मचारी पर कार्रवाई।
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एमपीटी भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपीटी) में करीब 3.91 करोड़ रुपए के कथित गबन का मामला सामने आने के बाद भी कार्रवाई ठंडे बस्ते में दिखाई दे रही है। मामला उजागर हुए दो महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक न कमला नगर थाने में एफआईआर दर्ज हुई है और न ही निगम ने किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई की है। इससे पूरे मामले में विभागीय कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यह कथित गड़बड़ी वित्तीय वर्ष 2022-23 से फरवरी 2026 तक लगातार चलती रही तो आखिर हर साल होने वाले ऑडिट में यह सामने क्यों नहीं आई? आय-व्यय का मिलान कैसे होता रहा? करोड़ों रुपए निगम के खाते में जमा नहीं हुए, फिर भी किसी स्तर पर इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली? हैरानी की बात यह भी है कि कुछ महीने पहले 26 लाख रुपए की वित्तीय गड़बड़ी में निगम ने दो अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर दिया था, लेकिन करीब चार करोड़ रुपए के इस कथित गबन में अब तक किसी के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई नहीं हुई।
एमपीटी का दावा- रिपोर्ट दे दी, पुलिस नहीं कर रही एफआईआर
मामले में एमपीटी के कंपनी सेक्रेटरी संदेश यशलहा ने बताया कि निगम ने पूरी जांच रिपोर्ट तैयार कर कमला नगर थाने को सौंप दी है और एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया है। इसके बावजूद अब तक पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया है।
पुलिस बोली- दस्तावेज स्पष्ट नहीं, जांच जारी
वहीं मामले की जांच कर रहे एसआई शैलेंद्र सिंह राजावत का कहना है कि पर्यटन विकास निगम की ओर से दी गई रिपोर्ट में कई तथ्य स्पष्ट नहीं हैं। जिस आउटसोर्स कर्मचारी को जिम्मेदार बताया गया है, उससे पूछताछ की जा चुकी है। जिन ग्राहकों के नाम पर भुगतान दिखाया गया है, उनसे भी संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है। सभी आवश्यक दस्तावेज और तथ्यों की पुष्टि होने के बाद ही एफआईआर दर्ज की जाएगी।
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ऐसे सामने आया करोड़ों का कथित गबन
एमपीटी की मार्केटिंग शाखा में कार्यरत मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव पीयूष कुमार सिंह पर आरोप है कि उन्होंने होटल और जंगल सफारी बुकिंग के दौरान ग्राहकों से मिली रकम निगम के खाते में जमा कराने के बजाय अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर ली। जांच में सामने आया कि जूबो सॉफ्टवेयर में दो तरह की रसीदें बनाई जाती थीं। एक श्रेणी की राशि नियमित रूप से एमपीटी के खाते में जमा होती थी, जबकि दूसरी श्रेणी की रकम बैंक में जमा ही नहीं की गई। ग्राहकों को सेवाएं मिलती रहीं, इसलिए यह कथित गड़बड़ी लंबे समय तक पकड़ में नहीं आई।
चार साल में ऐसे बढ़ी रकम
2022-23 : 39.16 लाख रुपए
2023-24 : 56.13 लाख रुपए
2024-25 : 1.19 करोड़ रुपए
2025-26 (फरवरी तक) : 1.76 करोड़ रुपए
कुल मिलाकर 3.91 करोड़ रुपए
10 से 15 लाख की अन्य गड़बड़ियों की भी जांच
सूत्रों के मुताबिक, विभाग में 10 से 15 लाख रुपए तक की कुछ अन्य वित्तीय अनियमितताओं की भी जांच चल रही है। हालांकि इन मामलों में भी अभी तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है। इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि आखिर वित्तीय गड़बड़ियों पर विभाग की कार्रवाई इतनी धीमी क्यों है।
एमडी ने नहीं दिया जवाब
मामले में एमपीटी के प्रबंध संचालक (एमडी) दिलीप यादव से पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क किया गया। उन्हें टेक्स्ट संदेश भेजकर भी पूछा गया कि मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई और एफआईआर दर्ज कराने के लिए विभाग ने आगे क्या कदम उठाए हैं। हालांकि खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
एफआईआर नहीं हुई तो वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत क्यों नहीं?
मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि कमला नगर थाना दो महीने बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं कर रहा है तो निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुलिस के उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग क्यों नहीं की? पुलिस आयुक्त या अन्य सक्षम अधिकारियों को पत्र लिखकर एफआईआर दर्ज कराने का प्रयास क्यों नहीं किया गया? इस संबंध में भी विभाग की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
यह भी पढ़ें-एमपी में बारिश ने पकड़ी रफ्तार, 31 जिलों में अलर्ट, सामान्य के करीब पहुंचा वर्षा का आंकड़ा
कार्रवाई से ज्यादा सवाल
करीब चार करोड़ रुपए के कथित गबन के मामले में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होना, किसी अधिकारी-कर्मचारी पर कार्रवाई न होना और विभाग के शीर्ष स्तर की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। फिलहाल पुलिस जांच जारी होने की बात कह रही है, जबकि विभाग का दावा है कि उसने अपनी ओर
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एमपीटी का दावा- रिपोर्ट दे दी, पुलिस नहीं कर रही एफआईआर
मामले में एमपीटी के कंपनी सेक्रेटरी संदेश यशलहा ने बताया कि निगम ने पूरी जांच रिपोर्ट तैयार कर कमला नगर थाने को सौंप दी है और एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया है। इसके बावजूद अब तक पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया है।
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पुलिस बोली- दस्तावेज स्पष्ट नहीं, जांच जारी
वहीं मामले की जांच कर रहे एसआई शैलेंद्र सिंह राजावत का कहना है कि पर्यटन विकास निगम की ओर से दी गई रिपोर्ट में कई तथ्य स्पष्ट नहीं हैं। जिस आउटसोर्स कर्मचारी को जिम्मेदार बताया गया है, उससे पूछताछ की जा चुकी है। जिन ग्राहकों के नाम पर भुगतान दिखाया गया है, उनसे भी संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है। सभी आवश्यक दस्तावेज और तथ्यों की पुष्टि होने के बाद ही एफआईआर दर्ज की जाएगी।
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ऐसे सामने आया करोड़ों का कथित गबन
एमपीटी की मार्केटिंग शाखा में कार्यरत मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव पीयूष कुमार सिंह पर आरोप है कि उन्होंने होटल और जंगल सफारी बुकिंग के दौरान ग्राहकों से मिली रकम निगम के खाते में जमा कराने के बजाय अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर ली। जांच में सामने आया कि जूबो सॉफ्टवेयर में दो तरह की रसीदें बनाई जाती थीं। एक श्रेणी की राशि नियमित रूप से एमपीटी के खाते में जमा होती थी, जबकि दूसरी श्रेणी की रकम बैंक में जमा ही नहीं की गई। ग्राहकों को सेवाएं मिलती रहीं, इसलिए यह कथित गड़बड़ी लंबे समय तक पकड़ में नहीं आई।
चार साल में ऐसे बढ़ी रकम
2022-23 : 39.16 लाख रुपए
2023-24 : 56.13 लाख रुपए
2024-25 : 1.19 करोड़ रुपए
2025-26 (फरवरी तक) : 1.76 करोड़ रुपए
कुल मिलाकर 3.91 करोड़ रुपए
10 से 15 लाख की अन्य गड़बड़ियों की भी जांच
सूत्रों के मुताबिक, विभाग में 10 से 15 लाख रुपए तक की कुछ अन्य वित्तीय अनियमितताओं की भी जांच चल रही है। हालांकि इन मामलों में भी अभी तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है। इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि आखिर वित्तीय गड़बड़ियों पर विभाग की कार्रवाई इतनी धीमी क्यों है।
एमडी ने नहीं दिया जवाब
मामले में एमपीटी के प्रबंध संचालक (एमडी) दिलीप यादव से पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क किया गया। उन्हें टेक्स्ट संदेश भेजकर भी पूछा गया कि मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई और एफआईआर दर्ज कराने के लिए विभाग ने आगे क्या कदम उठाए हैं। हालांकि खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
एफआईआर नहीं हुई तो वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत क्यों नहीं?
मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि कमला नगर थाना दो महीने बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं कर रहा है तो निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुलिस के उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग क्यों नहीं की? पुलिस आयुक्त या अन्य सक्षम अधिकारियों को पत्र लिखकर एफआईआर दर्ज कराने का प्रयास क्यों नहीं किया गया? इस संबंध में भी विभाग की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
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कार्रवाई से ज्यादा सवाल
करीब चार करोड़ रुपए के कथित गबन के मामले में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होना, किसी अधिकारी-कर्मचारी पर कार्रवाई न होना और विभाग के शीर्ष स्तर की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। फिलहाल पुलिस जांच जारी होने की बात कह रही है, जबकि विभाग का दावा है कि उसने अपनी ओर
