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एम्स भोपाल के चिकित्सकों का कमाल: एक सर्जरी में दो कैंसर का खात्मा, 52 वर्षीय मरीज को मिली नई जिंदगी
Tue, 02 Jun 2026 06:42 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Tue, 02 Jun 2026 06:42 PM IST
सार
एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने दुर्लभ चिकित्सा उपलब्धि हासिल करते हुए एक मरीज के शरीर में मौजूद दो अलग-अलग कैंसरों का एक ही ऑपरेशन में सफल उपचार किया। पित्त नली और किडनी के कैंसर को एक साथ हटाकर डॉक्टरों ने न सिर्फ मरीज की जान बचाई, बल्कि उसे कई बड़े ऑपरेशनों की पीड़ा से भी राहत दिलाई।
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एम्स भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एम्स भोपाल ने एक बार फिर जटिल चिकित्सा उपचार में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। डॉक्टरों की टीम ने 52 वर्षीय मरीज के शरीर में एक साथ मौजूद दो अलग-अलग कैंसरों का एक ही ऑपरेशन में सफल उपचार कर उसे नई जिंदगी दी है। यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि मरीज को पित्त नली का कैंसर और किडनी कैंसर दोनों एक साथ थे, जो बेहद दुर्लभ स्थिति मानी जाती है।
पीलिया की जांच में सामने आया बड़ा खतरा
मरीज लगातार बढ़ते पीलिया, शरीर में खुजली और तेजी से वजन कम होने की शिकायत लेकर एम्स पहुंचा था। जांच के दौरान डॉक्टरों को पता चला कि पित्त नली में कैंसर के कारण रुकावट पैदा हो गई है। इसी दौरान दाहिनी किडनी में करीब साढ़े छह सेंटीमीटर का कैंसरग्रस्त ट्यूमर भी मिला। दो अलग-अलग अंगों में एक साथ कैंसर मिलने के बाद मामला बेहद जटिल हो गया। ऐसे मामलों में आमतौर पर अलग-अलग चरणों में कई बड़ी सर्जरी करनी पड़ती हैं।
एक ही ऑपरेशन थिएटर में दो बड़ी सर्जरी
एम्स भोपाल के यूरोलॉजी और सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने संयुक्त रणनीति बनाई और एक ही ऑपरेशन में दोनों कैंसर को हटाने का फैसला लिया। सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी टीम ने पहले व्हिपल प्रक्रिया के जरिए पित्त नली और उससे जुड़े कैंसरग्रस्त हिस्से को हटाया तथा पाचन तंत्र का पुनर्निर्माण किया। इसके बाद यूरोलॉजी विभाग ने राइट रेडिकल नेफ्रेक्टॉमी कर कैंसर प्रभावित पूरी दाहिनी किडनी निकाल दी। कई घंटे चली इस जटिल सर्जरी के बाद डॉक्टर दोनों कैंसर को पूरी तरह हटाने में सफल रहे।
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बार-बार ऑपरेशन से बचा मरीज
विशेषज्ञों के मुताबिक यदि दोनों कैंसर का अलग-अलग उपचार किया जाता तो मरीज को कई बड़े ऑपरेशन और लंबी अस्पताल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता। एक ही सर्जरी में दोनों कैंसर हट जाने से न केवल जोखिम कम हुआ बल्कि रिकवरी की संभावना भी बढ़ गई। मरीज फिलहाल तेजी से स्वस्थ हो रहा है।
यह भी पढ़ें-15 साल पुरानी मशीनें, क्षमता से ज्यादा चल चुकीं,13 में से सिर्फ 8 चालू
पीलिया और पेशाब में खून को न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि बिना दर्द वाला पीलिया कई बार पित्त नली या अग्न्याशय के कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है। इसी तरह पेशाब में खून आना, लगातार बुखार रहना, अचानक वजन घटना, भूख कम लगना और कमर के एक हिस्से में लगातार दर्द किडनी कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और शुरुआती पहचान से कैंसर का सफल इलाज संभव है।
यह भी पढ़ें-9 जून को EOW के सामने सबूत पेश करेंगे कांग्रेस नेता, जीतू पटवारी का सरकार पर तंज
एम्स में हर साल सैकड़ों कैंसर मरीजों का इलाज
एम्स भोपाल का सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग लीवर, अग्न्याशय, पित्ताशय और जठरांत्र कैंसर के जटिल मामलों का उपचार करता है। वहीं यूरोलॉजी विभाग किडनी, प्रोस्टेट और मूत्राशय कैंसर के इलाज में विशेषज्ञता रखता है। संस्थान के अनुसार पिछले एक वर्ष में करीब 75 किडनी कैंसर मरीजों का सफल उपचार किया जा चुका है। विभाग हर महीने छह से सात किडनी कैंसर सर्जरी नियमित रूप से कर रहा है।
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पीलिया की जांच में सामने आया बड़ा खतरा
मरीज लगातार बढ़ते पीलिया, शरीर में खुजली और तेजी से वजन कम होने की शिकायत लेकर एम्स पहुंचा था। जांच के दौरान डॉक्टरों को पता चला कि पित्त नली में कैंसर के कारण रुकावट पैदा हो गई है। इसी दौरान दाहिनी किडनी में करीब साढ़े छह सेंटीमीटर का कैंसरग्रस्त ट्यूमर भी मिला। दो अलग-अलग अंगों में एक साथ कैंसर मिलने के बाद मामला बेहद जटिल हो गया। ऐसे मामलों में आमतौर पर अलग-अलग चरणों में कई बड़ी सर्जरी करनी पड़ती हैं।
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एक ही ऑपरेशन थिएटर में दो बड़ी सर्जरी
एम्स भोपाल के यूरोलॉजी और सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने संयुक्त रणनीति बनाई और एक ही ऑपरेशन में दोनों कैंसर को हटाने का फैसला लिया। सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी टीम ने पहले व्हिपल प्रक्रिया के जरिए पित्त नली और उससे जुड़े कैंसरग्रस्त हिस्से को हटाया तथा पाचन तंत्र का पुनर्निर्माण किया। इसके बाद यूरोलॉजी विभाग ने राइट रेडिकल नेफ्रेक्टॉमी कर कैंसर प्रभावित पूरी दाहिनी किडनी निकाल दी। कई घंटे चली इस जटिल सर्जरी के बाद डॉक्टर दोनों कैंसर को पूरी तरह हटाने में सफल रहे।
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बार-बार ऑपरेशन से बचा मरीज
विशेषज्ञों के मुताबिक यदि दोनों कैंसर का अलग-अलग उपचार किया जाता तो मरीज को कई बड़े ऑपरेशन और लंबी अस्पताल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता। एक ही सर्जरी में दोनों कैंसर हट जाने से न केवल जोखिम कम हुआ बल्कि रिकवरी की संभावना भी बढ़ गई। मरीज फिलहाल तेजी से स्वस्थ हो रहा है।
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पीलिया और पेशाब में खून को न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि बिना दर्द वाला पीलिया कई बार पित्त नली या अग्न्याशय के कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है। इसी तरह पेशाब में खून आना, लगातार बुखार रहना, अचानक वजन घटना, भूख कम लगना और कमर के एक हिस्से में लगातार दर्द किडनी कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और शुरुआती पहचान से कैंसर का सफल इलाज संभव है।
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एम्स में हर साल सैकड़ों कैंसर मरीजों का इलाज
एम्स भोपाल का सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग लीवर, अग्न्याशय, पित्ताशय और जठरांत्र कैंसर के जटिल मामलों का उपचार करता है। वहीं यूरोलॉजी विभाग किडनी, प्रोस्टेट और मूत्राशय कैंसर के इलाज में विशेषज्ञता रखता है। संस्थान के अनुसार पिछले एक वर्ष में करीब 75 किडनी कैंसर मरीजों का सफल उपचार किया जा चुका है। विभाग हर महीने छह से सात किडनी कैंसर सर्जरी नियमित रूप से कर रहा है।
