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भोपाल निगम का बजट : पिछले साल के मुकाबले 327 करोड़ बढ़ा भोपाल का बजट, लेकिन अधूरे वादों पर अभी भी सन्नाटा
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Mon, 23 Mar 2026 08:20 PM IST
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सार
भोपाल नगर निगम का बजट हर साल आकार में बड़ा होता जा रहा है, लेकिन शहर की जमीनी समस्याएं और अधूरे प्रोजेक्ट्स यह बताते हैं कि विकास की रफ्तार अभी भी उम्मीद के मुताबिक नहीं है। इस सत्र में भी 327 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।
भोपाल का बजट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी भोपाल में विकास के बड़े दावों के बीच नगर निगम ने 2026-27 का 3,938 करोड़ का बजट पेश किया है। यह पिछले साल के 3,611 करोड़ के मुकाबले 327 करोड़ ज्यादा है। आंकड़ों में यह बढ़ोतरी शहर के लिए बड़ी दिखाई देती है, लेकिन हकीकत यह है कि पिछले बजट के कई अहम प्रोजेक्ट अब भी अधूरे पड़े हैं और उन पर इस बार भी स्पष्ट जवाब नहीं मिला। नगर निगम हर साल नए प्रोजेक्ट्स का ऐलान करता है, लेकिन पुराने वादों की फाइलें अब भी पूरी नहीं हो पाई हैं। यानी, नगर निगम का बजट लगातार बढ़ रहा है, लेकिन शहर की समस्याओं में उतनी तेजी से सुधार नजर नहीं आ रहा।
बजट बढ़ा, लेकिन काम अधूरे ही रहे
- 7 हेरिटेज गेट का काम अब तक अधूरा
- गीता भवन का निर्माण लंबित
- सिटी बस स्मार्ट पास योजना एक साल में भी शुरू नहीं
पिछले साल बनाम इस साल: बढ़े आंकड़े
2025-26 बजट: 3,611 करोड़
2026-27 बजट: 3,938 करोड़
कुल बढ़ोतरी: 327 करोड़
टैक्स में राहत या छुपा बोझ?
इस बार बजट में सीधे तौर पर कोई नया टैक्स नहीं बढ़ाया गया है, जो राहत की बात कही जा रही है। लेकिन पिछले साल ही प्रॉपर्टी टैक्स में 10% और जलकर में 15% तक बढ़ोतरी हो चुकी है। अब वार्ड परिसीमन शुल्क बढ़ाने की तैयारी है, जिससे आम नागरिकों पर अप्रत्यक्ष आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
जमीनी मुद्दे अब भी अनसुलझे
- कई वार्डों में साफ पानी की कमी
- अंदरूनी सड़कों की खराब हालत
- सफाई कर्मचारियों की कमी
- आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या
- मेट्रो स्टेशनों पर पार्किंग की सुविधा नहीं
इन समस्याओं पर बजट में ठोस और समयबद्ध समाधान की कमी साफ नजर आई।
यह भी पढ़ें-स्लॉटर हाउस से गोमांस तक गरमाया मुद्दा, आदमपुर लैंडफिल टेंडर कमिश्नर लेंगे निर्णय
सदन में हंगामा, विकास पीछे
बजट सत्र के दौरान गोमांस और अन्य मुद्दों को लेकर जमकर हंगामा हुआ। सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के कारण विकास से जुड़े मुद्दे चर्चा में पीछे रह गए। यह भी देखने को मिला कि लंबी बैठक के दौरान कई पार्षद बीच में ही गायब हो गए, जिससे गंभीरता पर सवाल उठे।
नई घोषणाएं, पुराना अनुभव
इस बार भी बजट में म्यूजियम, ऑडिटोरियम, पार्किंग, ट्रांसपोर्ट नगर और अन्य विकास योजनाओं की घोषणा की गई है। लेकिन पिछले अनुभव को देखते हुए यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या ये प्रोजेक्ट समय पर पूरे हो पाएंगे या फिर अगली बार भी अधूरे वादों की सूची में जुड़ जाएंगे।
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- गीता भवन का निर्माण लंबित
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पिछले साल बनाम इस साल: बढ़े आंकड़े
2025-26 बजट: 3,611 करोड़
2026-27 बजट: 3,938 करोड़
कुल बढ़ोतरी: 327 करोड़
टैक्स में राहत या छुपा बोझ?
इस बार बजट में सीधे तौर पर कोई नया टैक्स नहीं बढ़ाया गया है, जो राहत की बात कही जा रही है। लेकिन पिछले साल ही प्रॉपर्टी टैक्स में 10% और जलकर में 15% तक बढ़ोतरी हो चुकी है। अब वार्ड परिसीमन शुल्क बढ़ाने की तैयारी है, जिससे आम नागरिकों पर अप्रत्यक्ष आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
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- कई वार्डों में साफ पानी की कमी
- अंदरूनी सड़कों की खराब हालत
- सफाई कर्मचारियों की कमी
- आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या
- मेट्रो स्टेशनों पर पार्किंग की सुविधा नहीं
इन समस्याओं पर बजट में ठोस और समयबद्ध समाधान की कमी साफ नजर आई।
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सदन में हंगामा, विकास पीछे
बजट सत्र के दौरान गोमांस और अन्य मुद्दों को लेकर जमकर हंगामा हुआ। सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के कारण विकास से जुड़े मुद्दे चर्चा में पीछे रह गए। यह भी देखने को मिला कि लंबी बैठक के दौरान कई पार्षद बीच में ही गायब हो गए, जिससे गंभीरता पर सवाल उठे।
नई घोषणाएं, पुराना अनुभव
इस बार भी बजट में म्यूजियम, ऑडिटोरियम, पार्किंग, ट्रांसपोर्ट नगर और अन्य विकास योजनाओं की घोषणा की गई है। लेकिन पिछले अनुभव को देखते हुए यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या ये प्रोजेक्ट समय पर पूरे हो पाएंगे या फिर अगली बार भी अधूरे वादों की सूची में जुड़ जाएंगे।

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