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Bhopal News: इंदौर के बाद भोपाल की बारी? दूषित पानी पर PHE के पूर्व इंजीनियर की सख्त चेतावनी, कई शहर खतरे में

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Thu, 08 Jan 2026 07:11 PM IST
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सार

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद PHE के पूर्व अधीक्षण ने चेतावनी दी है कि यह खतरा सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है। भोपाल समेत प्रदेश के कई शहरों में स्टाफ की कमी, कम सैंपल टेस्टिंग और पुरानी पाइपलाइन व्यवस्था के कारण हालात बिगड़ रहे हैं। 

Bhopal News: After Indore, is Bhopal next? Former PHE engineer issues stern warning about contaminated water;
PHE विभाग के पूर्व अधीक्षण यंत्री आरबी राय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों ने प्रदेश की जल आपूर्ति व्यवस्था की पोल खोल दी है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के पूर्व अधीक्षण यंत्री आरबी राय का कहना है कि यह खतरा सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है। भोपाल समेत मध्यप्रदेश के कई बड़े और छोटे शहर इसी तरह की स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं।अमर उजाला से बातचीत में आरबी राय ने स्पष्ट किया कि भागीरथपुरा केवल एक उदाहरण है। प्रदेशभर में तकनीकी और गैर-तकनीकी स्टाफ की भारी कमी के चलते समय पर पानी की जांच नहीं हो पा रही है। इसी लापरवाही का नतीजा है कि दूषित पानी लोगों की जान पर बन आ रहा है। उन्होंने कहा कि शुद्ध पेयजल को लेकर भारत की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खराब हो चुकी है। विदेशी नागरिक सबसे पहले सुरक्षित पानी के बारे में पूछते हैं, क्योंकि देश में जल की गुणवत्ता को लेकर भरोसा कमजोर पड़ चुका है।
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भोपाल में भी इंदौर जैसे हालात के संकेत
पूर्व अधीक्षण यंत्री के अनुसार, राजधानी भोपाल में लिए गए करीब 200 पानी के सैंपलों में चार प्रदूषित पाए गए। इतनी बड़ी आबादी वाले शहर में सीमित सैंपल के आधार पर जल गुणवत्ता आंकना गंभीर चूक है। चिंता की बात यह है कि भोपाल में मिले बैक्टीरिया वही हैं, जो इंदौर की घटना में सामने आए थे। इससे साफ है कि राजधानी भी सुरक्षित नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि भोपाल सहित कई शहरों में सीवेज और पेयजल पाइप लाइनें साथ-साथ और पुराने ढांचे में बिछी हैं। कहीं भी लीकेज होने पर गंदा पानी सीधे पीने के पानी में मिल सकता है।

स्टाफ की कमी से बिगड़ रही व्यवस्था
पूर्व अधीक्षण यंत्री के अनुसार, मध्यप्रदेश के लगभग सभी शहरों में जल कार्य से जुड़े तकनीकी और गैर-तकनीकी कर्मचारियों की भारी कमी है। खासकर तकनीकी स्टाफ तो लगभग न के बराबर रह गया है। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से पदोन्नतियां नहीं हुईं, जिससे नई भर्तियां भी नहीं हो सकीं। इस दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए, लेकिन उनके स्थान पर कोई नई नियुक्ति नहीं की गई। भोपाल का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जब जल प्रदाय व्यवस्था का स्थानांतरण हुआ था, तब यहां 36 उपयंत्री, 7 सहायक यंत्री और 2 कार्यपालन यंत्री थे। आज स्थिति यह है कि उपयंत्रियों में से केवल दो-तीन ही बचे हैं, सहायक यंत्री लगभग नदारद हैं और कार्यपालन यंत्री का भी अभाव है। कुछ पदों पर नगर निगम से प्रतिनियुक्ति के सहारे काम चलाया जा रहा है।

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टंकियों की सफाई सिर्फ कागजों में
पानी की टंकियों की सफाई व्यवस्था पर भी उन्होंने सवाल उठाए। नियम के मुताबिक हर छह महीने में टंकियों की सफाई होनी चाहिए, लेकिन हकीकत में तारीखें बदलकर फाइलें पूरी कर दी जाती हैं। टंकियों में जमा गंदगी सीधे घरों तक पहुंच रही है।

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सरकार के लिए चेतावनी
पूर्व अधीक्षण यंत्री का कहना है कि सरकार भले ही भागीरथपुरा जैसी एक-दो जगहों की व्यवस्था सुधार ले, लेकिन अगर पूरे प्रदेश की जल आपूर्ति प्रणाली पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया, तो कोई और शहर अगला भागीरथपुरा बन सकता है। उन्होंने समय रहते सैंपल टेस्टिंग बढ़ाने, स्टाफ की भर्ती और बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने की जरूरत पर जोर दिया।
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