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MP Rajaysabha: मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर भाजपा ने जताई आपत्ति, विधानसभा में आमने-सामने आए दोनों दल; हंगामा
Tue, 09 Jun 2026 04:44 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Tue, 09 Jun 2026 04:44 PM IST
सार
कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर भाजपा ने तेलंगाना में लंबित मामले की जानकारी छिपाने का आरोप लगाते हुए आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद विधानसभा परिसर में दोनों दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लग गया और जमकर नारेबाजी हुई। अब मामले में अंतिम निर्णय रिटर्निंग अफसर को लेना है।
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विधान सभा में हंगामा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र पर भाजपा की आपत्ति के बाद मंगलवार को विधानसभा परिसर राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया। भाजपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के पहुंचने से माहौल गरमा गया। रिटर्निंग अफसर के कक्ष के बाहर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की, जबकि अंदर कानूनी दलीलों का दौर चलता रहा।
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तेलंगाना के मामले को लेकर उठाया सवाल
भाजपा ने रिटर्निंग अफसर के समक्ष आपत्ति दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि मीनाक्षी नटराजन ने तेलंगाना की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी अपने नामांकन पत्र में नहीं दी। भाजपा नेताओं ने इसे नामांकन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने का मामला बताते हुए नामांकन निरस्त करने की मांग की।
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कैलाश विजयवर्गीय समेत भाजपा नेताओं ने संभाला मोर्चा
आपत्ति दर्ज कराने के दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी विधानसभा पहुंचे। भाजपा नेताओं ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता आवश्यक है और उम्मीदवारों को अपने खिलाफ लंबित मामलों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
कांग्रेस भी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरी
भाजपा के आरोपों के बाद कांग्रेस ने भी मोर्चा संभाल लिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कांग्रेस के विधिक प्रकोष्ठ से जुड़े नेता विधानसभा पहुंचे। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा की आपत्ति को राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताया।
उमंग सिंघार बोले- कोई आपराधिक प्रकरण नहीं
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस मामले का भाजपा जिक्र कर रही है, उसमें केवल कोर्ट का नोटिस मिला है। चुनावी नियमों के अनुसार नोटिस का उल्लेख करना अनिवार्य नहीं है। कांग्रेस की ओर से कानूनी जवाब रिटर्निंग अफसर के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है।
रिटर्निंग अफसर कक्ष के बाहर बढ़ी हलचल
मामले की सुनवाई के दौरान रिटर्निंग अफसर के कक्ष में प्रवेश को लेकर कांग्रेस नेताओं और सुरक्षा कर्मियों के बीच तीखी बहस हो गई। कुछ समय के लिए धक्का-मुक्की जैसी स्थिति भी बनी। बड़ी संख्या में नेताओं और कार्यकर्ताओं के पहुंचने से विधानसभा परिसर में अफरा-तफरी का माहौल रहा।
भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच नारेबाजी
रिटर्निंग अफसर कार्यालय के बाहर दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। भाजपा कार्यकर्ताओं ने "वंदे मातरम्" और "भारत माता की जय" के नारे लगाए, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी जवाबी नारेबाजी की। दोनों पक्षों की मौजूदगी से परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
फैसले पर टिकी राजनीतिक नजरें
नामांकन पर आपत्ति के बाद अब पूरे मामले में रिटर्निंग अफसर के फैसले का इंतजार है। राज्यसभा चुनाव के बीच उठे इस विवाद ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही फैसले पर नजर बनाए हुए हैं।
नटराजन के खिलाफ लंबित आपराधिक मामले
भाजपा की ओर से आपत्ति दर्ज कराने वाले अधिवक्ता संकेत गुप्ता ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ लंबित आपराधिक मामले की जानकारी नामांकन पत्र के शपथ पत्र में नहीं दी गई है। उन्होंने दावा किया कि संबंधित मामले की प्रति उपलब्ध है और मीनाक्षी नटराजन उस प्रकरण में जवाब भी प्रस्तुत कर चुकी हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपने हलफनामे में इसका उल्लेख नहीं किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को अपने खिलाफ लंबित सभी आपराधिक मामलों की जानकारी शपथ पत्र में देना अनिवार्य है। यदि कोई उम्मीदवार ऐसी जानकारी छिपाता है तो उसके नामांकन पर सवाल उठ सकता है और नियमानुसार कार्रवाई भी हो सकती है। इसी आधार पर भाजपा के राज्यसभा उम्मीदवार की ओर से रिटर्निंग अफसर के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई गई है।
नामांकन पत्र में अन्य विसंगतियां भी
संकेत गुप्ता ने यह भी आरोप लगाया कि नामांकन पत्र में अन्य विसंगतियां भी सामने आई हैं। उनके अनुसार, नामांकन के एक हिस्से में उम्मीदवार द्वारा संपत्तियों का विवरण दिया गया है, जबकि दूसरे हिस्से में उन्हें शून्य दर्शाया गया है। उन्होंने कहा कि इससे दस्तावेजों में विरोधाभास की स्थिति बनती है और पूरी जानकारी सामने नहीं आने का संदेह पैदा होता है। उन्होंने कहा कि भाजपा की ओर से इस संबंध में लिखित आपत्ति, संबंधित दस्तावेज और न्यायालयों के फैसलों की प्रतियां भी रिटर्निंग अफसर को सौंप दी गई हैं। अब पूरे मामले में अंतिम निर्णय रिटर्निंग अफसर द्वारा लिया जाएगा।
