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Bhopal News: लगातार दूसरे दिन हड़ताल पर रहे प्रदेश के संविदा स्वास्थ्यकर्मी, स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ने लगा असर
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Wed, 03 Jun 2026 05:22 PM IST
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सार
प्रदेश के संविदा स्वास्थ्यकर्मी लगातार दूसरे दिन भी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहे। कर्मचारियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन सभी कार्यों का बहिष्कार जारी रखा, जिससे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की कई गतिविधियां प्रभावित होने लगी हैं।
भोपाल में संविदा स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत प्रदेश के 32 हजार से अधिक संविदा स्वास्थ्यकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रही। प्रदेशभर में कर्मचारियों ने कामकाज से दूरी बनाए रखते हुए अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। हड़ताल के चलते विभागीय योजनाओं की निगरानी, रिपोर्टिंग और अन्य प्रशासनिक गतिविधियों पर असर पड़ने लगा है।
मांगों पर फैसले का इंतजार, आंदोलन जारी
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में कर्मचारी लंबे समय से लंबित मांगों के निराकरण की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार स्तर पर कई बार आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसी कारण कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाया है।
मिशन की गतिविधियों पर पड़ रहा असर
हड़ताल के कारण स्वास्थ्य विभाग के कई ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्य प्रभावित हो रहे हैं। एनएचएम के तहत संचालित योजनाओं की रिपोर्टिंग, डेटा एंट्री, मॉनिटरिंग और फील्ड गतिविधियों की रफ्तार धीमी पड़ गई है। कर्मचारियों का दावा है कि मिशन की अधिकांश व्यवस्थाएं संविदा कर्मचारियों के भरोसे संचालित होती हैं, इसलिए आंदोलन का असर जमीनी स्तर तक दिखाई देने लगा है।
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यह भी पढ़ें-भोपाल में कुत्तों के चाटने वाली बर्फ का वीडियो वायरल, बीएमसी ने की कार्रवाई
8 जून को सीएम हाउस घेरने की तैयारी
संघ ने आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया है। कर्मचारियों ने 8 जून को भोपाल में मुख्यमंत्री निवास के घेराव का ऐलान किया है। इसके लिए प्रदेशभर के जिलों से बड़ी संख्या में संविदा स्वास्थ्यकर्मियों को राजधानी पहुंचने का आह्वान किया गया है।
चरणबद्ध आंदोलन के बाद शुरू हुई हड़ताल
संविदा स्वास्थ्यकर्मियों ने 25 मई से चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया था। पहले काली पट्टी बांधकर विरोध जताया गया, फिर जिला स्तर पर ज्ञापन सौंपे गए और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर मांगों के समर्थन की अपील की गई। मांगों पर समाधान नहीं निकलने के बाद कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी, जो दूसरे दिन भी जारी रही।
यह भी पढ़ें-आंतरिक मूल्यांकन 30 की जगह होगा 40, कंपनियों की डिजिटल जांच, AI पर फोकस
प्रमुख मांगें
- मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार संविदा स्वास्थ्यकर्मियों का नियमितीकरण किया जाए।
- सामान्य प्रशासन विभाग की नीति के तहत एनपीएस और स्वास्थ्य बीमा का लाभ दिया जाए।
- अन्य राज्यों की तर्ज पर 10 प्रतिशत वार्षिक वेतनवृद्धि लागू की जाए।
- नियमित कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ता प्रदान किया जाए।
- सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के वेतन संबंधी विसंगतियों का निराकरण किया जाए।
- वेतन समकक्षता निर्धारण में संशोधन कर विसंगतियां दूर की जाएं।
- नियमित कर्मचारियों की तरह अवकाश सुविधाएं दी जाएं।
- समान कार्य के लिए समान वेतन और समान सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
मांगों पर फैसले का इंतजार, आंदोलन जारी
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में कर्मचारी लंबे समय से लंबित मांगों के निराकरण की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार स्तर पर कई बार आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसी कारण कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाया है।
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मिशन की गतिविधियों पर पड़ रहा असर
हड़ताल के कारण स्वास्थ्य विभाग के कई ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्य प्रभावित हो रहे हैं। एनएचएम के तहत संचालित योजनाओं की रिपोर्टिंग, डेटा एंट्री, मॉनिटरिंग और फील्ड गतिविधियों की रफ्तार धीमी पड़ गई है। कर्मचारियों का दावा है कि मिशन की अधिकांश व्यवस्थाएं संविदा कर्मचारियों के भरोसे संचालित होती हैं, इसलिए आंदोलन का असर जमीनी स्तर तक दिखाई देने लगा है।
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चरणबद्ध आंदोलन के बाद शुरू हुई हड़ताल
संविदा स्वास्थ्यकर्मियों ने 25 मई से चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया था। पहले काली पट्टी बांधकर विरोध जताया गया, फिर जिला स्तर पर ज्ञापन सौंपे गए और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर मांगों के समर्थन की अपील की गई। मांगों पर समाधान नहीं निकलने के बाद कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी, जो दूसरे दिन भी जारी रही।
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- मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार संविदा स्वास्थ्यकर्मियों का नियमितीकरण किया जाए।
- सामान्य प्रशासन विभाग की नीति के तहत एनपीएस और स्वास्थ्य बीमा का लाभ दिया जाए।
- अन्य राज्यों की तर्ज पर 10 प्रतिशत वार्षिक वेतनवृद्धि लागू की जाए।
- नियमित कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ता प्रदान किया जाए।
- सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के वेतन संबंधी विसंगतियों का निराकरण किया जाए।
- वेतन समकक्षता निर्धारण में संशोधन कर विसंगतियां दूर की जाएं।
- नियमित कर्मचारियों की तरह अवकाश सुविधाएं दी जाएं।
- समान कार्य के लिए समान वेतन और समान सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।

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