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Bhopal News: बारिश से पहले उजड़े परिवारों ने निगम मुख्यालय पर लगाई गुहार, पुनर्वास की मांग को लेकर प्रदर्शन

Tue, 09 Jun 2026 06:34 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Tue, 09 Jun 2026 06:34 PM IST
सार

इंद्रपुरी लेबर कॉलोनी में मकान और दुकानें टूटने के बाद प्रभावित परिवार नगर निगम मुख्यालय पहुंचे और पुनर्वास की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। रहवासियों का दावा है कि 55 मकान और 70 दुकानें टूटने से 300 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। बारिश के मौसम में बेघर हुए परिवारों ने तत्काल आवास, मुआवजा और वैकल्पिक दुकानें उपलब्ध कराने की मांग की है।

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Bhopal News: Families displaced before the rains appealed to the municipal corporation headquarters and staged
बीएमसी के बाहर प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंद्रपुरी लेबर कॉलोनी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद बेघर हुए परिवार मंगलवार को नगर निगम मुख्यालय पहुंच गए। प्रभावित लोगों ने महापौर और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए पुनर्वास की मांग की। उनका कहना है कि घर और दुकानें तोड़ने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था का आश्वासन दिया गया था, लेकिन कार्रवाई के बाद सैकड़ों लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं।
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55 मकान और 70 दुकानें टूटने का दावा
प्रभावित परिवारों के अनुसार हाल ही में हुई कार्रवाई में 55 मकान और 70 दुकानें ध्वस्त कर दी गईं। इससे करीब 300 से अधिक लोगों का आशियाना और रोजगार प्रभावित हुआ है। लोगों का कहना है कि कई परिवार दशकों से यहां रह रहे थे और उनके पास पट्टे सहित अन्य दस्तावेज भी मौजूद हैं।
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महापौर और कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन के दौरान रहवासियों ने महापौर और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर तत्काल पुनर्वास की मांग की। उनका कहना है कि बारिश का मौसम शुरू हो चुका है और रहने के लिए कोई सुरक्षित स्थान नहीं बचा है। ऐसे में प्रशासन को जल्द से जल्द आवास और अन्य बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था करनी चाहिए।
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घर के साथ रोजगार भी छिना
प्रभावित महिलाओं और दुकानदारों ने बताया कि कार्रवाई में केवल मकान ही नहीं टूटे, बल्कि आजीविका का साधन भी खत्म हो गया। कई परिवारों की दुकानें ध्वस्त होने से आय का स्रोत बंद हो गया है। उनका कहना है कि घर और दुकान दोनों चले जाने से परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है।

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घर टूटने के बाद खाने-पीने और रहने की समस्या
प्रभावित परिवारों ने बताया कि घर टूटने के बाद खाने-पीने और रहने की समस्या खड़ी हो गई है। कई परिवारों का सामान खुले में पड़ा हुआ है। महिलाओं ने कहा कि छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ खुले में रहना पड़ रहा है, जबकि लगातार बदलते मौसम ने चिंता और बढ़ा दी है।

बीमार और बुजुर्गों के सामने संकट कई प्रभावितों ने बताया कि परिवार में बीमार सदस्य और छोटे बच्चे हैं, जिनकी देखभाल करना मुश्किल हो गया है। उनका आरोप है कि पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना कार्रवाई कर दी गई, जिससे पूरा परिवार संकट में आ गया है।

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मलबे में दब गया गृहस्थी का सामान
रहवासियों का कहना है कि कार्रवाई के दौरान सामान हटाने का पर्याप्त समय नहीं मिला। कई परिवारों का घरेलू सामान, राशन और जरूरी वस्तुएं मलबे में दब गईं। प्रभावितों ने प्रशासन से नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की भी मांग की है। प्रभावित परिवारों ने मांग की है कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्राथमिकता से मकान आवंटित किए जाएं। जिन दुकानदारों की दुकानें तोड़ी गई हैं, उन्हें वैकल्पिक दुकानें दी जाएं। साथ ही पुनर्वास होने तक अस्थायी आवास, पेयजल, बिजली और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।


 
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